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'मुन्नाभाई MBBS' की तर्ज पर चल रहा था अस्पताल, SC ने दिए जांच के आदेश

केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने जांच के दौरान पाया था कि 410 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के बिस्तरों में नकली मरीज़ लेटे हुए थे

FP Staff Updated On: Dec 15, 2017 03:16 PM IST

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'मुन्नाभाई MBBS' की तर्ज पर चल रहा था अस्पताल, SC ने दिए जांच के आदेश

आपको संजय दत्त की फिल्म 'मुन्नाभाई MBBS' का वह सीन तो याद ही होगा, जब नकली अस्पताल में नकली मरीज़ मुन्नाभाई के माता-पिता को यह यक़ीन दिलाने की कोशिश करते हैं कि उनका बेटा बड़ा डॉक्टर बन गया है. फिल्म में यह सीन बेहद मजेदार था, लेकिन असल जिंदगी में ऐसा कर मध्य प्रदेश का एक अस्पताल मुसीबत में फंस गया. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं.

इस जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस बोबड़े और एल नागेश्वर राव की बेंच ने भोपाल के सर्वपल्ली राधाकृष्णन यूनिवर्सिटी मेडिकल कॉलेज की जांच के लिए एक कमिटी का गठन किया है. इस कमिटी में एक सीनियर सीबीआई ऑफिसर और एम्स के दो डॉक्टर शामिल हैं. यह कमिटी अस्पताल में भर्ती मरीजों की सत्यता, उनकी मेडिकल हिस्ट्री, बीमारी, उनके इलाज और अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत को लेकर पड़ताल करेगी.

केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने जांच के दौरान पाया था कि 410 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के बिस्तरों में नकली मरीज़ लेटे हुए थे. इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नंदकर्नी केंद्र सरकार की तरफ से और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह एमसीआई की तरफ से केस लड़ रहे हैं. दोनों का दावा है 2017-18 में छात्रों की भर्ती की अनुमति के लिए अस्पताल ने धोखीधड़ी की.

वहीं मेडिकल कॉलेज की तरफ से केस लड़ रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निधेष गुप्ता ने मरीजों की सत्यता का दावा किया और कहा कि उनके पास सभी मरीजों का मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध है.

कमिटी के लिए नॉमिनेशन के लिए कोर्ट ने 15 दिन का वक्त दिया है. इसके बाद जांच पूरी करने और रिपोर्ट जमा करने के लिए 3 महीने का अतिरिक्त वक्त दिया गया है. कोर्ट ने निर्देश दिए, 'यह कमिटी कॉलेज का दौरा कर सकती है, जांच के लिए जरूरी हर जानकारी अस्पताल को इस कमिटी को उपलब्ध करानी होगी. कॉलेज को इस कमिटी का रपूरा सहयोग करना होगा.'

छात्रों के प्रोविशनल एडमिशन पर कोर्ट ने कहा कि अपनी जांच में एमसीआई को अस्पताल में कई कमियां दिखीं. एमसीआई ने जांच के दौरान यह पाया कि पूरे दिन में अस्पताल के ब्लड बैंक से एक यूनिट खून भी डिस्पेंस नहीं किया गया था. इसके अलावा अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे, इसकी वजह पूछे जाने पर प्रबंधन ने बताया था कि सड़क हादसे के एक केस के चलते डॉक्टरों को पुलिस थाने में बुलाया गया है.

बेंच ने साल 2017-18 में कॉलेज में हुए सभी एडमिशन रद्द कर दिए हैं. हालांकि छात्रों को राहत देते हुए कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को निर्देश दिये कि इन छात्रों को राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में उनके मेरिट के आधार पर एकोमोडेट किया जाएगा.

कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है कि छात्रों की फीस रिफंड करने और उन्हें मुआवज़ा देने को लेकर कोर्ट को आदेश क्यों नहीं देना चाहिए? कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी.

न्यूज-18 के लिए उत्कर्ष आनंद की रिपोर्ट

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