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मुंबई HC ने सीबीआई से कहा- दाभोलकर और पानसरे की हत्या की स्वतंत्र जांच करें

कोर्ट ने सीबीआई और महाराष्ट्र सीआईडी से कहा है कि गोरी लंकेश केस में आरोपियों के बयानों के अलावा वो स्वतंत्र जांच करें

Updated On: Jan 17, 2019 05:59 PM IST

Bhasha

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मुंबई HC ने सीबीआई से कहा- दाभोलकर और पानसरे की हत्या की स्वतंत्र जांच करें

मुंबई हाईकोर्ट ने सीबीआई और महाराष्ट्र सीआईडी से कहा कि वे केवल गौरी लंकेश हत्याकांड से हुए खुलासे पर ही भरोसा नहीं करें बल्कि तर्कवादी नेता नरेंद्र दाभोलकर और वामपंथी नेता गोविंद पानसरे की हत्याओं की स्वतंत्र रूप से जांच करें.

जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस एमएस कार्णिक ने दोनों ही जांच एजेंसियों से कहा कि वे पानसरे और दाभोलकर हत्याकांडों के फरार आरोपितों का पता लगाने के लिए ‘ईमानदारी से प्रयास’ करें.

महाराष्ट्र सीआईडी ने जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है जिसने हाईकोर्ट के सामने अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल की. बेंच ने इसके बाद यह निर्देश जारी किया.

बेंच ने रेखांकित किया कि एसआईटी ने अन्य चीजों के अलावा यह भी कहा है कि पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले में कर्नाटक के अधिकारियों ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है उन भी पूछताछ कर रही है ताकि पानसरे मामले में फरार आरोपितों का पता चल सके.

बेंच ने यह भी हाइलाइट किया कि पिछली सुनवाई के दौरान भी सीबीआई और एसआईटी दोनों ने कहा था कि वे दाभोलकर और पानसरे हत्याकांडों के बारे में सूचना हासिल करने के लिए गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोपितों से पूछताछ कर रहे हैं.

कोर्ट ने कहा, ‘आप एक अन्य मामले के आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं...लेकिन (एसआईटी की प्रगति) रिपोर्ट में यह उजागर नहीं होता कि भगोड़े आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कौन से असल कदम उठाए.’

बेंच ने कहा, ‘आप एक दूसरे मामले में आरोपियों के रहस्योद्घाटन पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकते. कब तक यह चलता रहेगा? आपको एक स्वतंत्र जांच करनी होगी, स्वतंत्र सामग्री जुटानी होगी, खासकर इसलिए कि महाराष्ट्र के ये अपराध (पानसरे और दाभोलकर की हत्याएं) कर्नाटक के अपराध से पहले हुए हैं.’

इस पर सीबीआई की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘ऐसा नहीं कि हमारे अधिकारी कुछ नहीं कर रहे हैं. वे सभी संभव कदम उठा रहे हैं और सिर्फ बहुत ही सक्षम अधिकारियों को ही (सीबीआई के और सीआईडी के) इन दो आपरेशन के लिए चुना गया है.’

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि कर्नाटक की जांच मशीनरी बहुत प्रगति कर रही है लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा नही हुआ, खासकर नौकरशाही की अड़ंगेबाजी और एक दूसरे से समन्वय में कमी की वजह से.

अदालत ने कहा कि बदकिस्मती से एक राज्य में मशीनरी को पूरी मदद मिलती है, जबकि हमारे राज्य में, या तो मशीनरी काम नहीं कर रही या उसे सहयोग नहीं मिल रहा है. सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र में जांच एजेंसियां ‘किसी अन्य (राज्य) से बेहतर’ काम कर रही हैं.

बेंच ने अब सीबीआई और सीआईडी दोनों को अपनी-अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट 6 फरवरी तक दाखिल करने का निर्देश दिया है.

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