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मुंबई: BMC के पास पहले थी लिस्ट तो खाली क्यों नहीं हुई बिल्डिंग?

बीएमसी ने मॉनसून से पहले ही 791 बिल्डिंगों को C-1 कैटेगरी में शामिल कर लिया था. इनमें से 186 (23%) बिल्डिंगों को ध्वस्त कर दिया गया था

Updated On: Aug 31, 2017 01:40 PM IST

FP Staff

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मुंबई: BMC के पास पहले थी लिस्ट तो खाली क्यों नहीं हुई बिल्डिंग?

मुंबई के भिंडी बाजार में गुरुवार को 7 मंजिला इमारत गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई. यह कोई पहला हादसा नहीं है. इससे पहले घाटकोपर में भी बिल्डिंग गिर गई थी. मुंबई में पिछले करीब 5 दिनों से मूसलाधार बारिश हो रही है. इससे मुंबई के डेंजर जोन में रह रहे लोगों के लिए खतरा बहुत ज्यादा है.

कितनी बिल्डिंग थीं C-1 कैटेगरी में

मुंबई में 791 बिल्डिंग ऐसी हैं. जो रहने के लिए खतरनाक हैं. जगह की कमी के चलते लोग इन बिल्डिंगों में रहने के लिए मजबूर हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बीएमसी ने मॉनसून से पहले ही 791 बिल्डिंगों को C-1 कैटेगरी में शामिल कर लिया था. इनमें से 186 (23%) बिल्डिंगों को ध्वस्त कर दिया गया था. जबकि 117 (14%) बिल्डिंगों को मार्च के अंत तक खाली करा लिया गया था.

कौन से इलाके में सबसे ज्यादा असुरक्षित बिल्डिंग हैं

मुंबई मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक कुर्ला में सबसे ज्यादा ऐसी बिल्डिंग हैं जो रहने के हिसाब से सुरक्षित नहीं हैं. कुर्ला में करीब 113 बिल्डिंग हैं जो रहने के लिए सुरक्षित नहीं है. वहीं घाटकोपर में 80 और वडाला/माटुंगा में 77 बिल्डिंग खतरे के निशान पर हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा ध्वस्त हुई बिल्डिंगों की संख्या L वार्ड और कुर्ला (113) में है. N वार्ड या घाटकोपर में 80 बिल्डिंग C-1 कैटेगरी की हैं. जिसमें से सिर्फ दो ही बिल्डिंगों को धाराशायी किया गया है. जबकि 19 बिल्डिंग खाली कराई गई थीं. पश्चिमी मुंबई के अंधेरी (वेस्ट) और के/वेस्ट वार्ड में 50 बिल्डिंग C-1 कैटेगरी में हैं. 30 साल से ज्यादा पुरानी बिल्डिंगों के लिए डिजाइन-संबंधी ऑडिट अनिवार्य है.

क्या मतलब है C-1, C-2 और C-3 कैटेगरी का

बीएमसी के द्वारा बिल्डिंगों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है. C-1 कैटेगरी ऐसी है. जो सबसे ज्यादा खतरनाक हैं और मरम्मत से परे है. जबकि C-2 ऐसी कैटेगरी है. जिसमें सबसे ज्यादा मरम्मत की जरूरत है. C-3 कैटेगरी में आने वाली बिल्डिंगों में सबसे ज्यादा मरम्मत की जरूरत है.

आंकड़ों के मुताबिक ऐसी बिल्डिंग पर फैसले के लिए करीब 145 केस कोर्ट में विचाराधीन हैं और 21 केस आंतरिक कमेट के अधीन विचाराधीन हैं.

2013 में मुंबई के डॉकयार्ड में 32 साल पुरानी बिल्डिंग गिरने से 61 लोगों की मौत हो गई थी. जबकि 32 लोग घायल हो गए थे. यह पांच मंजिला इमारत बीएमसी के अधीन थी. बावजूद इसके गुरुवार को हुए हादसे के बाद सवाल उठने लाजिमी है कि आखिर क्यों इन बिल्डिंगों को बीएमसी ने खाली नहीं कराया?

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