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Mother's Day: चित्रकूट, यूपी पुलिस प्रशासन के नाम एक मां का खुला खत

अपराधी खुलेआम बाहर घूम रहा है, मुझे कई बार दिखता है. तो आप ही बताइए, क्या मैं इस दिन को मदर्स डे के रूप में मनाऊं?

Khabar Lahariya Updated On: May 14, 2018 01:40 PM IST

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Mother's Day: चित्रकूट, यूपी पुलिस प्रशासन के नाम एक मां का खुला खत

सुना है आज मदर्स डे मनाया जा रहा है, लेकिन उस मां का क्या, जो महीनों से अपनी बेटी के न्याय के लिए पुलिस प्रशासन के चक्कर काट रही हो?

अपराधी खुलेआम बाहर घूम रहा है, मुझे कई बार दिखता है. तो आप ही बताइए, क्या मैं इस दिन को मदर्स डे के रूप में मनाऊं? किस तरह अपने मन को स्थिर करूं, जब मैं खुद ही इंसाफ के लिए भटक रही हूं? जब मैं अपने दिल के टुकड़े के लिए लोगों के हाथ पैर जोड़ रही हूं?

मैं हूं निवि (बदला हुआ नाम) की मां रानी. निवि तो अब दुनिया में नहीं रही, लेकिन आज भी मुझे लगता है जैसे वो मुझे बुला रही है, उसकी चीख ‘मां मुझे बचा लो’, ऐसा लगता है मेरे कानों से ये आवाज़ कभी नहीं जाएगी. जबकि ये चीखें मैंने तो सुनी भी नहीं, इन चीखों को तो उसने सुना होगा, लेकिन फिर भी उस राक्षस ने उसे नहीं छोड़ा, खत्म कर दिया मेरी निवि  को.

अपने परिवार के साथ पिछले बीस साल से कर्वी में लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता के मकान में मैं रहती थी. लक्ष्मी प्रसाद और उसका बेटा राजा किराने की दूकान चलाते हैं. मेरे परिवार में मेरी चार लडकियां और एक बेटा. 14 जनवरी 2017 की वो काली रात मैं कभी नहीं भुला पाउंगी, जब निवि घर से लापता थी. मैं और मेरे पति घर चलाने के लिए शादी में बर्तन धोने का काम करते हैं. उस रात भी हम घरों में काम करने गए थे. बच्चों से बोल गई थी कि खाना खाकर सो जाएं. मुझे क्या मालूम था कि निवि हमेशा के लिए सो जाएगी.

जब मैं रात में घर आई, तो निवि नहीं थी. बच्चों ने कहा कि अंकल के यहां टीवी देख रही है, मैं रात में बुलाने गई, तो लक्ष्मी प्रसाद के बेटे राजा ने कहा कि निवि वहां नहीं आई थी. मुझे उसका जवाब कुछ अजीब लगा और मैंने बार-बार पूछा, लेकिन उसका जवाब वही था. मैं रात भर उसे ढूंढती, यहां से वहां भटकती रही, पर कुछ पता नहीं चला. सुबह राजा घर आया और उसने कहा, ‘भाभी जी, निवि की लाश मोहल्ले में पड़ी है, एक बोरे में है.’ मैं भागकर वहां गई लेकिन तब तक वहां पुलिस भी आ गई थी और बोरे को उठाकर चीर घर ले गई थी. मैं रोती रही, ‘मेरी निवि को दिखा दो, एक बार दिखा दो.’ बोरे से बाहर उसके पैर दिख रहे थे. चीरघर में मैंने निवि को देखा, उसकी लाश को, उसके पूरे शरीर में दांत से काटने के निशान थे.

मुझे पता था कि ये राजा ही है

मेरी लड़की ने क्या बिगाड़ा था राजा का, जो उसने उसके साथ ऐसा किया, और किस तरह का इंसान है वो, ऐसे करने के बाद वह खुद ही मुझे बताने आया. इसके बाद लाश को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया और मेरी नहीं सुनी. 14 जनवरी के बाद मैंने अपनी सुनवाई के लिए क्या नहीं किया. अपने बच्चों को भूखा प्यासा छोड़कर मैं पुलिस के चक्कर काटती रही, कभी सीओ से मिली, कभी एसपी से, तो कभी कोतवाली के चक्कर, लेकिन पुलिस वाले हमेशा एक ही बात बोलते, कि आज नहीं कल आना. ऐसे तीन महीने बीत गए.

इसके बाद मैने संस्थाओं और पत्रकारों का सहयोग लिया, तब जाकर चार महीने बाद मेरी कुछ सुनवाई हुई और राजा को पुलिस ने पकड़कर जेल में डाल दिया. उसके परिवार के लोग मुझे पैसे का लालच दे रहे थे, कह रहे थे केस को दबा दो, समझौता कर लो, लेकिन मैंने तो लड़की खोई, पैसे लेकर क्या करती मैं? मैं अपने में पक्की रही, ये सोचते हुए की आज जो मेरी बेटी के साथ हुआ, कल और लड़की के साथ हो सकता है. राजा जेल से चार महीने बाद पैसों के बल पर जमानत पर बाहर आ गया, लेकिन उसे सज़ा मिलनी चाहिए. इसलिए मैं अभी भी न्याय की लड़ाई लड़ रही हूं. राजा को सज़ा मिलनी ही चाहिए. इसलिए आज भी मैं पुलिस प्रशासन के चक्कर लगा रही हूं, और आज भी कोई सुनवाई नहीं है.

अब मुझे डर भी है, कि पैसों के बल पर मुझे, मेरे पति या बच्चों को कुछ हो ना जाए. हमारे लिए कोई सुरक्षा नहीं दी गई है. पुलिस लगातार ये कहती है कि राजा को जितनी सज़ा मिलनी थी, उसे मिल चुकी है. लेकिन ये कहां का कानून है, और कहां का इंसाफ?

निवि मेरी सबसे सीधी बच्ची थी. बिल्कुल मासूम, हमेशा कहना सुनने वाली. पढ़ने में भी तेज़ थी, लेकिन मैं उसे दूसरी कक्षा के बाद पढ़ा नहीं पाई, ये बात मुझे हमेशा सताएगी. लेकिन उसका इस तरह से खत्म हो जाना, ये कोई कैसे सोच सकता है? एक मां, तो कभी नहीं.

आरोपी को तत्काल सज़ा मिलनी चाहिए, उसमें कानून व्यवस्था ढीली नहीं होनी चाहिए, तभी हम इस तरह के केस को आगे रोक पाएंगे. मुझे अपनी निवि तो वापस नहीं मिलेगी, लेकिन उसकी याद में मैं तो इतना तो कर सकती हूं, कि जिसने उसके साथ बलात्कार किया, जिसने उसकी हत्या की, उसे सज़ा दिलवाऊं?

आज मदर्स डे है, क्या आज एक मां की सुनवाई होगी?

(निवि बछरन गांव, कर्वी, चित्रकूट की रहनी वाली 14 साल की बच्ची थी. जनवरी 14 2017 की रात उसके साथ बलात्कार किया गया, और फिर उसे मार दिया गया. निवि की मां, रानी, 15 जनवरी से इस पर एक लड़ाई लड़ रही है. मार्च 19, 2018 को ख़बर लहरिया द्वारा आयोजित बुंदेलखंड बैठक में भी रानी ने इंसाफ के लिए आवाज़ उठाई थी. इस पर मऊ मानिकपुर से बीजेपी विधायक आर के पटेल का कहना था की अगर घटना बीजेपी सरकार के राज्य में आने से पहले की है, तो उसमें वे कुछ नहीं कर सकतें. रानी को रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष से 10 लाख रुपय मुआवजा दिया गया है.)

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