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मोस्ट वांटेड नागा विद्रोही खापलांग की दिल का दौरा पड़ने से मौत

मणिपुर में सेना के 18 जवानों को मारने सहित सुरक्षा बलों पर अन्य कई हमलों का आरोप था खापलांग पर

Updated On: Jun 10, 2017 10:54 AM IST

FP Staff

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मोस्ट वांटेड नागा विद्रोही खापलांग की दिल का दौरा पड़ने से मौत

नागा विद्रोही समूह नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड-खापलांग (एनएससीएन-के) के अध्यक्ष एस एस खापलांग की शुक्रवार की रात म्यांमार के कचिन राज्य के टक्का में मौत हो गई.

मणिपुर में सेना के 18 जवानों को मारने सहित सुरक्षा बलों पर अन्य कई हमलों के मास्टरमाइंड रहे खापलांग की उम्र 77 साल थी.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एनएससीएन-के के नेता की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई. शांगवांग खापलांग म्यांमार के हेमी नागा थे और उन्होंने अपना ज्यादातर वक्त म्यांमार में ही गुजारा.

सेना पर हमला, वसूली, लूटपाट में रहा है शामिल

एनएससीएन का यह गुट 1980 के दशक से सुरक्षा बलों पर हमले, जबरन वसूली और लूटपाट जैसी गतिविधियों में लिप्त रहा है.

मणिपुर में चार जून 2015 को घात लगा कर किए गए हमले में एनएससीएन-के का हाथ होने की खबर थी. इस हमले में सेना के 18 जवान मारे गए थे. इस घटना के बाद भारतीय सेना ने सीमा पार जा कर म्यांमार में स्थित एनएससीएन-के के शिविरों पर हमला किया जिसमें कई उग्रवादी मारे गए थे.

एनएससीएन-के ने सेना के काफिले पर घात लगा कर हमला तब किया था जब वह केंद्र सरकार के साथ शांति वार्ता कर रहा था. इसके बाद यह बातचीत बंद कर दी गई और सितंबर, 2015 में एनएससीएन-के को पांच साल के लिए प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया गया.

बनाया था अलग गुट म्यांमार के पांगसाउ पास के स्थित वाकथाम गांव में अप्रैल, 1940 में जन्मे खापलांग 1964 में नागा राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े और एनएससीएन का गठन करने वाले प्रमुख लोगों में से एक थे. साल 1988 में खापलांग अलग हो गए और अपना गुट एनएससीएन-के बना लिया. एनएससीएन (आईएम) के आइजैक चिशी स्वू और थुइंगलेंग मुइवा जैसे नेताओं से मतभेदों के चलते खापलांग ने अलग गुट बनाया था. स्वू का जून 2016 में दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो चुका है.

खपलांग और केंद्र सरकार के बीच 1997 में संघर्ष विराम हुआ, लेकिन 28 मार्च 2015 को यह निरस्त हो गया. इस बीच, नागा पीपल्स मूवमेंट फॉर ह्यूमन राइट्स (एनपीएमएचआर) के महासचिव नीनगुलो क्रोम ने कहा कि खापलांग की अचानक हुई मृत्यु से वह स्तब्ध हैं. उन्होंने कहा कि यह ऐसे समय पर हुआ है जब नागा लोगों को उनके वरिष्ठ नेताओं के अनुभव की बहुत जरूरत है ताकि नागाओं के भविष्य को सही दिशा मिल सके.

(साभार न्यूज 18, तस्वीर फेसबुक से)

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