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सत्ता हिला देने वाले इन मामलों में कोई दोषी नहीं मिला

टूजी पहला मामला नहीं है जब देश को हिला देने वाले केस में सब बरी हो गए हों

FP Staff Updated On: Dec 23, 2017 02:10 PM IST

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सत्ता हिला देने वाले इन मामलों में कोई दोषी नहीं मिला

देश की राजनीति को बदल देने वाले टूजी घोटाले में अदालत से सभी 17 आरोपी बरी हो गए. जिस टूजी के असर में देश को एक बिलकुल नई पार्टी और मुख्यमंत्री मिला. जिसकी बात करने वाले लोग तमाम सत्ता प्रतिष्ठानों पर काबिज़ हो गए. वो दरअसल घोटाला था ही नहीं. इसी तरह आदर्श सोसायटी मामले में भी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक च्वहाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाज़त सीबीआई को नहीं मिली.

वैसे देश में ये पहला मौका नहीं है जब किसी बहुत हाईप्रोफाइल मामले में एक भी अपराधी पकड़ा न गया हो. किसी अभिनेता के फुटपाथ पर गाड़ी चढ़ा देने जैसे मामलों को छोड़ भी दें तो तमाम ऐसे अपराध और घोटाले हैं जिनपर शोर तो काफी मचा मगर नतीजा कुछ नहीं निकला.

भोपाल गैस कांड

1984 का भोपाल गैस हादसा भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी में से एक है. भोपाल के पीछे लापरवाहियां बड़ी वजह हैं. मामले में यूनियन कार्बाइड के सीईओ वॉरेन ऐंडरसन को तुरंत ही बेल मिल गई. इसके बाद कोई ठोस कार्यवाई नहीं हुई. 2014 में एंडरसन की मौत हो गई. भोपाल में पीढ़ियां बदल गईं मगर कोई नतीजा नहीं निकला.

हाशिमपुरा

22 मई1987 में हुआ मेरठ का हाशिमपुरा हत्याकांड आजाद भारत का हिरासत में हुआ सबसे बड़ा फर्जी इनकाउंटर है. जब पीएसी के जवानो ने 42 से ज्यादा लोगों को गोली से उड़ा दिया था. 21 मार्च 2015 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी 16 आरोपियों को बरी कर दिया. उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील तो की मगर 30 साल गुज़रने के बाद भी हाशिमपुरा जिंदा लाशों की बस्ती बना हुआ है.

लक्ष्मणपुर बाथे

जातीय संघर्ष के दौर में रणवीर सेना ने 1997 में 58 लोगों की हत्या कर दी थी. इसे भारत के सबसे नशृंस हत्याकांड में से एक माना जाता है. गर्भवती महिलाओं और बच्चों को भी नहीं छोड़ा गया. इस मामले में पटना की एक विशेष अदालत ने  2010 में 16 दोषियों को फांसी और 10 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी. लेकिन पटना हाइकोर्ट ने 2013 के फैसले में सभी दोषियों को बरी कर दिया.

बोफोर्स घोटाला

बोफोर्स मामला राशि के लिहाज से बड़ा नहीं था, मगर सेना से जुड़ा होने के चलते महत्वपूर्ण था. इसमें पूर्वप्रधानमंत्री राजीव तक आरोपी बने. 1990 के इस केस में किसी को सजा नहीं मिली, न कोई वसूली हुई.

हर्षद मेहता केस

एक शेयर ब्रोकर ने बैंकों के पैसे उनकी जानकारी के बिना शेयर मार्केट में लगा दिए. मार्केट नीचे गया तो पैसे डूब गए. हर्षद मेहता को सजा तो हुई मगर गया हूआ पैसा वसूल नहीं हो सका. सरकार ने करदाताओं के पैसे से घाटे की भरपाई की.

जैन हवाला डायरी

कश्मीर में आतंकियों तक पैसा पहुंचाने के मामले में सीबीआई ने हवाला कारोबारियों पर छापे मारे. इस मामले में मीडिया के पास हवाला आरोपी जैन बंधुओं की डायरी हाथ आ गई. अखबार जनसत्ता और पत्रिका ‘मेन स्ट्रीम’ में समाजवादी नेता मधु लिमये के हवाले से एस.के. जैन की डायरी में दर्ज सभी नाम छपे गए. इसमें तीन कैबिनेट मंत्री, सात मंत्रियों, कांग्रेस के कई बड़े नेताओं, दो राज्यपालों और नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी का नाम भी शामिल था.

55 नेता, 15 बड़े सरकारी अफसर और एस.के. जैन के 22 सहयोगियों को मिलाकर कुल 92 नामों की लिस्ट थी. इस खुलासे में लालकृष्ण आडवाणी पर 60 लाख रुपए, बलराम जाखड़ पर 83 लाख, विद्याचरण शुक्ल पर 80 लाख, कमलनाथ पर 22 लाख, माधवराव सिंधिया पर 1 करोड़, राजीव गांधी पर 2 करोड़, शरद यादव पर 5 लाख, प्रणव मुखर्जी पर 10 लाख, एआर अंतुले पर 10 लाख, चिमन भाई पटेल पर 2 करोड़, एनडी तिवारी पर 25 लाख, राजेश पायलट पर 10 लाख और मदन लाल खुराना पर 3 लाख रुपए लेने का आरोप था. 1989 से 1991 के बीच कुल 64 करोड़ रुपए बांटे जाने का ब्योरा दर्ज था. मगर अदालती सुनवाई में इस डायरी को सबूत मानने से ही इनकार कर दिया गया.

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