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ये बच्चे मोबाइल से खेलते तो हैं लेकिन टेक्स्ट मैसेज तक नहीं पढ़ पाते

हम डिजिटलाइज तो हो रहे हैं. लेकिन देश में शिक्षा के स्तर की बात करें तो उसमें कुछ खास सुधर नजर नहीं आता

Subhesh Sharma Updated On: Jan 16, 2018 11:01 PM IST

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ये बच्चे मोबाइल से खेलते तो हैं लेकिन टेक्स्ट मैसेज तक नहीं पढ़ पाते

न्यू इंडिया के इस दौर में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक, सभी की जेब में आपको मोबाइल मिल जाएगा. आज हम में से ज्यादातर का अधिकतर समय फोन देखने में ही निकलता है. ऐसा ही हाल देश के बच्चों का भी है. आज तीन साल के बच्चे को भी खिलौने से चुप करा पाना मुश्किल हो चुका है. लेकिन एक बार उसके हाथ में फोन थमा के देखिए. मजाल है... एक बूंद भी आंसू गिर जाए. बच्चों का टेक्नॉलजी से जुड़ना अच्छी बात है.

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लेकिन सोचने वाली बात ये है कि अगर आप पढ़ोगे-लिखोगे ही नहीं, तो फोन और टेक्नॉलजी भी आपके किस काम की? क्योंकि फोन पर कम्यूनिकेट करने या फिर कुछ पढ़ने के लिए आपको भी पढ़ना आना जरूरी है.

क्या कहते हैं आंकड़े

आज हमारे देश का हाल ये है कि 14 से 18 साल के बच्चों में 10 में से सात से ज्यादा बच्चों को फोन पर अपनी ही भाषा में बेसिक टेक्स्ट पढ़ना नहीं आता है. इनमें से 14 साल के स्कूल और कॉलेज न जाने वाले पांच फीसदी और 18 साल की उम्र में भी स्कूल न जाने वाले 30 फीसदी बच्चे हैं.

हालांकि जो बच्चे 14 साल के हैं और स्कूल जाते हैं. उनके और स्कूल न जाने वाले बच्चों के बीच में भी कोई ज्यादा फर्क नहीं है. लेकिन 18 साल की उम्र में स्कूल जाने वाले और न जाने वाले बच्चों के बीच इस संबंध में गैप बढ़ जाता है.

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ये चौंकाने वाले आंकड़े कहीं और नहीं बल्कि एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (ASER) 2017 में सामने आएं हैं. एएसईआर का सर्वे 14-18 साल के बच्चों पर फोकस है. इनमें से ज्यादातर बच्चे आठवीं पास करने वाले हैं. 2009 में राइट टू एजुकेशन एक्ट (RTE) लागू किया गया.

आज आरटीई एक्ट के तहत शिक्षा हर एक 6 से 14 साल की उम्र के बच्चे का मूल अधिकार है. लेकिन एएसईआर के आंकड़ों को देखें, तो राइट टू एजुकेशन के होने के बाद भी आज बच्चे पूरी तरह से पढ़ने-लिखने में असमर्थ हैं.

ये सर्वे देश के 24 राज्यों के 28 जिलों में कराया गया. इसमें चार चीजों को ध्यान में रखा गया... पहली वो करते क्या हैं, दूसरी उनकी योग्यता क्या है, तीसरी उनकी जागरूकता और चौथी उनकी एस्पीरेशन.

आज हमारा देश डिजिटल इंडिया पर इतना फोकस कर रहा है. लेकिन फिर भी 59 फीसदी युवकों ने आजतक कंप्यूटर पर काम नहीं किया है और 64 फीसदी ने अभी तक इंटरनेट यूज नहीं किया है.

लड़का हो या लड़की हाल दोनों के हैं बेहाल

आज गांव हो या शहर, कोई भी जगह कहने को इंटरनेट की पहुंच से दूर नहीं है. लेकिन इस सर्वे में जो आंकड़े सामने आएं हैं, वो हमारी आंखें खोलने वाले हैं. सर्वे के मुताबिक, लड़का हो या लड़की हाल दोनों के ही बेहाल हैं. जहां 49 फीसदी लड़कों ने कभी इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं किया है, तो वहीं लड़कियों में ये प्रतिशत 76 के करीब है.

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ये आंकड़े दर्शाते हैं कि हम किस विकास की ओर बढ़ रहे हैं. हम डिजिटलाइज तो हो रहे हैं. लेकिन देश में शिक्षा के स्तर की बात करें तो उसमें कुछ खास सुधर नजर नहीं आता. इस बात में कोई शक नहीं है कि 'पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया.'

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