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मोहनजोदड़ो की 'डांसिग गर्ल' कोई और नहीं 'पार्वती' हैं!

भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद की मैगजीन ‘इतिहास’ के नए संस्करण में यह दावा किया गया है.

Updated On: Dec 26, 2016 11:29 AM IST

FP Staff

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मोहनजोदड़ो की 'डांसिग गर्ल' कोई और नहीं 'पार्वती' हैं!

मोहनजोदड़ो की पहचान बनी मूर्ति ‘डांसिग गर्ल’ देवी पार्वती हैं. सिंधु घाटी सभ्यता में भगवान शिव की पूजा होने का यह एक और सबूत है. भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद की मैगजीन ‘इतिहास’ के नए संस्करण में यह दावा किया गया है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ‘इतिहास’ पत्रिका में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर ठाकुर प्रसाद वर्मा का एक शोध छपा है. शोध का शीर्षक है ‘वैदिक सभ्यता के पुरातत्व’. इस शोध में सिंधु घाटी सभ्यता के वैदिक पहचान के पक्ष को मजबूत किया गया है.

दक्षिणपंथी इतिहासकारों का यह दावा रहा है कि सिंधु घाटी में भगवान शिव की पूजा होती थी. 2500 साल ईसा पूर्व की ‘डांसिग गर्ल’ मूर्ति को देवी पार्वती की मूर्ति बताने वाले वर्मा के शोध से दक्षिणपंथियों के इस दावे को बल मिलता है.

शोध में बताया गया है कि मोहनजोदड़ो के अवशेषों में मिली कलाकृतियां इस बात की पुष्टि करतीं हैं कि वहां भागवान शिव की अराधना होती थी. वर्मा के मुताबिक यहां मिली ‘सील 420’  में एक सींग वाली आकृति योग करती हुई नजर आती है. वह और कोई नहीं बल्कि भगवान शिव हैं. इस आकृति के आसपास तमाम जानवर भी नजर आ रहे है.

पुरातनशास्त्री जॉन मार्शल ने 1931 इसके भगवान शिव होने की बात कही थी. लेकिन इसके बाद से ही इतिहासकारों ने इसे नकार दिया. उनका दावा था कि यह किसी महिला की आकृति है.

MohenjoDaro

सिंधु घाटी सभ्यता के लोग भगवान शिव की पूजा करते थे. इस दावे के पक्ष में वर्मा कहते हैं कि मोहनजोदड़ो के राजा की शॉल पर तीन पत्तियों का निशान भी इस बात की पुष्टि करता है. आज के दौर में भगवान शिव की पूजा के लिए इस्तेमाल किया जाने वाले बेल पत्र से इसकी तुलना की गई है.

‘जहां शिव होंगे, वहां शक्ति भी होगी’ इस तर्क के साथ शोधकर्ता वर्मा ‘डांसिंग गर्ल’ को पार्वती बताते हैं. हड़प्पा सभ्यता में मिली किसी भी मूर्ति को आज तक किसी ने पार्वती नहीं बताया.

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