S M L

ANALYSIS: रिश्तों को राजनीति से ऊपर रखते हैं RSS प्रमुख मोहन भागवत

संघ के एक पूर्व पदाधिकारी का कहना है कि संघ के हर एक सरसंघचालक के काम करने का तरीका कई तरह से खास रहा है

Updated On: Jun 08, 2018 05:31 PM IST

FP Staff

0
ANALYSIS: रिश्तों को राजनीति से ऊपर रखते हैं RSS प्रमुख मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक वरिष्ठ विभाग प्रचारक ने आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के बारे में कहा कि वो रिश्तों को राजनीति से ऊपर ले जाने में माहिर हैं. उन्होंने कहा कि मेगा स्टार अमिताभ बच्चन हो या रतन टाटा या फिर कोई बड़ा लेखक या पत्रकार डॉ. मोहन भागवत के व्यक्तिगत रूप से सबसे काफी अच्छे रिश्ते हैं. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन महत्वपूर्ण व्यक्ति किस पार्टी या विचारधारा है? जो भी उन्हें बुलाता है वो उनके यहां जाते हैं और अपने यहां खुद भी बुलाते हैं.

अपनी बात को मज़बूती से रखते हुए उन्होंने इसके पक्ष में कई तर्क भी दिए. आरएसएस के वरिष्ठ विभाग प्रचारक ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का आरएसएस हेडक्वार्टर में आना और स्वयंसेवकों को संबोधित करना ही इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.

संघ के एक दूसरे पदाधिकारी का कहना है कि इस पूरी घटना के पीछे डॉ. भागवत का व्यवहार काम करता है. डॉ. भागवत ने हाल ही में इस बात पर ज़ोर दिया था कि संघ सबको साथ में लेकर चलने में विश्वास रखता है. पुणे के एक कार्यक्रम में तो उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस मुक्त भारत एक राजनीतिक नारा है. यह संघ की भाषा नहीं है. संघ कभी भी किसी को छोड़ने की भाषा का इस्तेमाल नहीं करता. अगर इन बातों पर ध्यान दें तो पता चलेगा कि प्रणब मुखर्जी का वहां जाना कोई अनहोनी नहीं है.

राजनीतिक तौर पर देखें तो डॉ. भागवत और मुखर्जी की यह मुलाकात तब भी खूब सुर्खियों में आई थी, जब राष्ट्रपति चुनाव से पहले डॉ. भागवत दोपहर के भोजन के लिए राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे. तब इस बात की अटकलें लगनी शुरू हो गई थीं कि प्रणब दा को दूसरा कार्यकाल मिल सकता है. हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हुआ, लेकिन इससे ये तो साबित हो गया कि बुनियादी तौर पर दोनों के रिश्ते बेहतर हैं.

संघ के एक पूर्व पदाधिकारी का कहना है कि संघ के हर एक सरसंघचालक के काम करने का तरीका कई तरह से खास रहा है. हेडगेवारजी ने संघ को विस्तार दिया. गुरुजी गोलवलकर ने संघ को आध्यात्मिक महत्व से जोड़ा, ताकि समाज निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका को बढ़ाया जा सके. देवरस जब सरसंघचालक बनें तब उन्होंने संघ के राजनीतिक विस्तार पर काम किया.

अब डॉ. भागवत उसे आगे बढ़ा रहे हैं. 2002 में पूर्व संघ चालक केसी सुदर्शन द्वारा स्थापित किए गए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच को भी वे विस्तार दे रहे हैं. संघ प्रचारक इंद्रेश कुमार की अगुवाई में यह मंच अयोध्या में राम मंदिर के लिए कार सेवा करने के लिए भी तैयार है.

संघ के अंदरूनी हलकों का कहना है कि यह पहली बार हुआ है, जब संघ की अखिल भारतीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अधिकतम पदाधिकारी हैं. उनकी उम्र 50 साल है. यानी बड़ी संख्या में युवाओं को फ्रंटलाइन लीडरशिप देने का काम चल रहा है. इतना ही नहीं, 91 साल बाद संघ के गणवेश यानी कपड़ों में बदलाव करना और हर प्रचारक को टैबलेट, आईपैड को यूज़ करने की काबिलियत होने की बात कहना उनके काम करने के तरीके को दिखाता है.

संघ पदाधिकारी का कहना है कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि प्रणब मुखर्जी ने नागपुर पहुंच कर पं. नेहरू का ज़िक्र किया या राष्ट्रवाद पर अपने क्या विचार प्रस्तुत किए? मुद्दा यह है कि उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को भारत मां का महान सपूत बताया.

(साभार: न्यूज़18)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi