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मोदी के मास्टरस्ट्रोक ने बदली गुजरात में चुनावी तस्वीर, आखिरी मौके पर दिखाया मैजिक!

हाथ आए मौके को मोदी भुनाना जानते हैं और कांग्रेस गंवाना, इस बार भी यही हुआ और मोदी अपनी स्टाइल में ऐन मौके पर मास्टरस्ट्रोक लगा गए

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Dec 14, 2017 07:24 PM IST

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मोदी के मास्टरस्ट्रोक ने बदली गुजरात में चुनावी तस्वीर, आखिरी मौके पर दिखाया मैजिक!

चुनावी घमासान में शोर की अपनी महत्ता है. गुजरात विधानसभा चुनाव में विकास के नारों से उठा शोर बढ़ते बढ़ते जुबानी जंग में बदल गया. उसी शोर में एक धीमी आवाज ‘कांग्रेस आ रही है’ कि भी उठी. पहले चरण की चुनावी सरगर्मियों ने कांग्रेस में जोश भरने का काम किया. कुछ ऐसा माहौल बनने लगा कि बीजेपी के लिए पटेल-दलित-ओबीसी-आदिवासी-मुस्लिम मुश्किलें पैदा करने लगे हैं. लेकिन दूसरे चरण के मतदान में बीजेपी का मोर्चा जिस तरह से पीएम मोदी ने अलग अंदाज में संभाला उसके बाद कांग्रेस की बेचैनी बढ़ती दिख रही है. कांग्रेस का चुनाव आयोग के दफ्तर का घेराव करना उसकी हताशा को ही दर्शाता है. इससे पहले मणिशंकर अय्यर की पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी भी कांग्रेस की कमजोरी ही तस्दीक कर रही थी.

साबरमती रिवरफ्रंट पर सी-प्लेन से पहुंचे पीएम मोदी. (पीटीआई)

लेकिन दूसरे चरण के मतदान से पहले जिस तरह से पीएम मोदी ने एक तीर से कई शिकार किए वो कांग्रेस को भविष्य के लिए सीखने चाहिए. पीएम मोदी को मां अंबाजी का दर्शन करना था. राहुल गांधी सबसे पहले ही बनासकांठा में अंबाजी के दर्शन कर सुर्खियां बटोर चुके थे. लेकिन मोदी ने अंबाजी की यात्रा में नयापन डाल दिया. उन्होंने सी-प्लेन के जरिए अंबाजी की यात्रा की. गुजरात के लोगों के लिए ये अनोखी यात्रा थी. मोदी को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी. मोदी टीवी-मीडिया में अपने अंदाज की वजह से छाए रहे और उनका प्रचार भी घर-घर हो गया. इसके बाद कांग्रेस ने मोदी पर कई आरोप लगाए. जहां एक तरफ उनकी यात्रा को हवा-हवाई कहा तो मुद्दों को भटकाने का भी आरोप लगाया.

Ahmedabad: Prime Minister Narendra Modi shows his finger marked with indelible ink, as he leaves after casting his vote during the second phase of state Assembly elections, at Ranip in Ahmedabad on Thursday. PTI Photo by Santosh Hirlekar (PTI12_14_2017_000035B)

लेकिन मोदी अपनी स्टाइल में माता के दर्शन कर चुके थे और गुजरात की जनता में विकास का संदेश भी देने में कामयाब रहे. दूसरे चरण के मतदान के दिन ही पीएम मोदी INS कलवरी का उद्घाटन करते हैं. INS कलवरी को 'मेक इन इंडिया' का उत्तम उदाहरण बताते हैं. यहां भी मोदी साफ कर गए कि उनके दौर में शुरु हुआ मेक इन इंडिया अब देश के रक्षा संसाधनों के निर्माण में भी भूमिका निभा रहा है. INS कलवरी के उद्घाटन के बाद मोदी सीधे अहमदाबाद पहुंचते हैं और साबरमति के राणिप में अपना वोट डालते हैं. लेकिन वोट से पहले ही वो ट्वीटर के जरिए बता चुके होते हैं कि 'वो आ रहे हैं'. पोलिंग बूथ में सामान्य नागरिकों की तरह कतार में खड़े होते हैं. उसके बाद वोट डालते हैं और फिर किसी रोड शो की तरह अपना काफिला लेकर बढ़ जाते हैं. मोदी की एक झलक पाने के लिए लोग दौड़ रहे होते हैं और चारों तरफ मोदी-मोदी के नारे लग रहे होते हैं. मोदी को वोट डालते पूरा देश देखता है. खासतौर से गुजरात में एक बार फिर घर-घर मोदी दिखाई दे रहे होते हैं. थोड़ी सी ही देर में मोदी वो सबकुछ कर जाते हैं जो क्रिकेट मैच के आखिरी ओवर में चौके-छक्के मारने के बराबर होता है. उसके बाद कांग्रेस की तरफ से आरोपों की बौछार शुरू हो जाती है. यहां तक कि चुनाव आयोग के दफ्तर का भी घेराव करती है. लेकिन मोदी दो दिन में दो अलग अलग वजहों से गुजरात की जनता में अलग अलग तरीके से प्रचार पूरा कर जाते हैं.

नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो: पीटीआई)

पीएम मोदी का ये अंदाज बीते दो चुनावों की याद दिलाता है. लोकसभा चुनाव के वक्त भी वोट डालने के बाद मोदी की सेल्फी पर विवाद हुआ था. लेकिन सेल्फी का संदेश देने में मोदी कामयाब हो चुके थे. इसी तरह यूपी विधानसभा चुनाव में जब शुरुआती चरणों में अलग अलग तरह की अफवाहें जोर पकड़ रही थीं उस वक्त बनारस में 4 दिनों तक रह कर मोदी ने चुनावी माहौल ही बदल कर रख दिया था. इस बार भी गुजरात चुनाव में आखिरी चरण के मतदान से पहले और मतदान के वक्त मोदी अपनी राजनीति से कांग्रेस को झटका दे कर चले गए.

दूसरे और आखिरी चरण का मतदान 93 सीटों पर हुआ. इन सीटों के बारे में कहा जाता है कि ये गुजरात में सरकार बनाने में हमेशा निर्णायक साबित हुई हैं. यहां की वोटिंग काफी मायने रखती है. वोटिंग को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि गुजरात में 22 साल बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर से शुरुआत हुई लेकिन बाद में बीजेपी ने सारी ताकत झोंक कर बढ़त बनाने का काम किया है. हालांकि माना जा रहा है कि दो दशक की सत्ता विरोधी लहर और हार्दिक-जिग्नेश-अल्पेश की तिकड़ी का कांग्रेस ने फायदा उठाने की भरपूर कोशिश की है लेकिन सरकार बनाने का मौका फिर भी नहीं मिल सकेगा. पटेलों के दबदबे वाले दक्षिण गुजरात, सौराष्ट्र और कच्छ में दोनों ही पार्टियां अपना अपना दावा कर रही हैं. सौराष्ट्र में बीजेपी के लिए दिक्कत की बात ये रही कि पटेल आरक्षण आंदोलन से भड़की हिंसा पर काबू पाने की कार्रवाई में यहां 12 पटेलों की जान जा चुकी थी. जिसके बाद यहां के पटेल समुदाय ने बीजेपी को सबक सिखाने की एलान किया था. लेकिन कहा जाता है कि यहां भी ऐन मौके पर बीजेपी ने पटेलों के बड़े तबके की नाराजगी दूर कर पारंपरिक वोटबैंक को हाथ से जाने नहीं दिया. अब एक्जिट पोल भी बीजेपी की सरकार बनने का इशारा कर रहे हैं. ऐसे में अगर एग्जिट पोल की भविष्यवाणी सही साबित होती है तो इस बार भी बाकी राज्यों के चुनावों की तरह जीत के असली नायक मोदी ही होंगे. ऐसे में न तो कांग्रेस के पास मोदी से जीत पाने का कोई विकल्प है और न ही गुजरात की जनता के पास मोदी का कोई विकल्प.

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