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हज कोटा: तीन तलाक बिल से नाराज मुसलमानों को खुश करने में लगी सरकार

सऊदी हुकुमत ने भारत के हज यात्रियों का कोटा बढ़ा दिया है. इस साल से भारत के हज यात्रियों की संख्या 1,75,025 हो जाएगी

Syed Mojiz Imam Updated On: Jan 12, 2018 12:34 PM IST

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हज कोटा: तीन तलाक बिल से नाराज मुसलमानों को खुश करने में लगी सरकार

सऊदी हुकुमत ने भारत के हज यात्रियों का कोटा बढ़ा दिया है. इस साल से भारत के हज यात्रियों की संख्या 1,75,025 हो जाएगी. भारत के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के सऊदी सरकार के साथ समझौते के बाद ये कोटा बढ़ाया गया है. नकवी की तरफ से कहा गया है कि ये एक एतिहासिक फैसला है आजादी के बाद कभी इस तरह का कोटा नहीं बढ़ाया गया है.

मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अरब देशों में बढ़ रही है. इसलिए भारत का कोटा बढ़ाया गया है. हालांकि सवाल ये उठ रहा है कि ट्रिपल तलाक के मामले में घिरी सरकार कहीं हज के जरिए मुसलमानों को खुश करने के लिए कवायद तो नहीं कर रही है. क्योंकि मोदी सरकार ट्रिपल तलाक के मामले में ज्यादातर मुस्लिम तंजीमों के निशाने पर है. जाहिर है कि सरकार का हज कोटा बढ़ाने का कदम मुस्लिमों के लिए राहत दिलानें वाला हो सकता है.

जमात-ए-इस्लामी-हिंद के सचिव सलीम इंजीनियर कहते है कि ‘हज का कोटा बढ़ने से ज्यादा मुस्लिम लोग हज पर जा सकेंगें. क्योंकि हज का मौका साल में एक बार आता है तो जितने ज्यादा लोग हज पर जाए अच्छा है. हालांकि मुस्लिम संगठन इस बात से सहमत नहीं हैं कि सरकार उनको खुश करना चाहती है.

हज कोटे की सच्चाई

सऊदी अरब ने हज कोटा आबादी के हिसाब से दे रखा है. एक हजार की आबादी पर एक व्यक्ति हज पर जा सकता है. इससे पहले 2017 में ही मौजूदा कोटे में तकरीबन 35,000 सीट का इजाफा किया गया था. इस साल केवल पांच हजार और जोड़े गए. बढी हुई सीटों को अगर जोड़ दें तो मोदी सरकार में हज के कोटे में 40,000 की बढ़ोत्तरी हुई है. सरकार इसलिए अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन ये तस्वीर सही नहीं है.

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कांग्रेस के नेता और दिल्ली हज कमेटी के पूर्व चेयरमैन अनीस दुर्रानी का कहना है कि ‘मोदी सरकार से पहले भी कोटे बढ़ते रहे हैं. अटल बिहारी वाजपेयी के वक्त भी बढ़ा था और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में भी बढ़ा था. जहां तक 35,000 सीट बढ़ाने की बात है इसके पीछे की वजह है कि जब मक्का में विस्तारीकरण हो रहा था. तो सभी देशों का कोटा 20 फीसदी कम कर दिया गया था. फिर 2017 में सभी देशों के कोटे को बहाल कर दिया गया है. 'अनीस दुर्रानी के मुताबिक सिर्फ 5,000 का ही कोटा 2017-2018 में बढ़ाया गया है.

Muslims pray at the Grand mosque ahead of the annual Haj pilgrimage in Mecca, Saudi Arabia, in this August 26, 2017 mobile phone image. REUTERS/Suhaib Salem - RC124A8152F0

क्या है महिलाओं के अकेले जाने की कहानी

इस साल हज यात्रा के लिए तकरीबन 3 लाख 55 हजार लोगों ने आवेदन किया है. जिसमें 1300 महिलाओं ने भी बिना किसी गार्जियन के हज पर जाने का आवेदन दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 दिसंबर की मन की बात में भी ये जिक्र किया था कि 45 साल से ज्यादा उम्र की मुस्लिम महिलाएं एक समूह बनाकर हज की यात्रा पर जा सकती हैं. मुस्लिम संगठनों को इस पर भी ऐतराज है कि ये सऊदी सरकार का फैसला है. पहले भी इस तरह का प्रावधान था कि ग्रुप में महिलाएं जा सकती थी. हालांकि सरकार ने प्रावधान किया है कि जो महिलांए अकेले जाने का आवेदन कर रही हैं. उनका आवेदन सरकार सीधे मंजूर कर रही है. बाकी आवेदन के मंजूर होने के लिए लॉटरी सिस्टम की व्यवस्था है. जिसका नाम लॉटरी में आता है वही हज यात्रा के लिए पात्र है.

हज में सब्सिडी का इतिहास

दरअसल सरकार के खुश होने की वजह है कि हज में हवाई यात्रा की सब्सिडी सरकार उठाती है. सरकार की तरफ से कोटा बढ़ाने के पीछे का तर्क यही दिया जा रहा कि अगर सरकार ना चाहती तो कैसे कोटा बढ़ सकता था. सुप्रीम कोर्ट की दो जजो की बेंच जस्टिस अल्तमस कबीर और रंजना देसाई ने 2012 में कहा था कि सरकार 2022 तक सब्सिडी को खत्म कर दे. केंद्र सरकार ने अफज़ल अमानुल्लाह की अगुवाई में एक कमेंटी भी बनाई थी जिसने अक्टूबर में अपनी रिपोर्ट सौप दी है. सरकार धीरे-धीरे सब्सिडी की रकम घटा रही है, लेकिन अभी भी सब्सिडी को लेकर सरकार की तरफ से कोई तस्वीर साफ नहीं की गई है.

हरियाणा के गुरुग्राम में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. (पीटीआई)

2017 में सब्सिडी की रकम तकरीबन 200 करोड़ थी जबकि 2016 में ये रकम 408 करोड़ थी. हज में हवाई यात्रा पर सब्सिडी देने की शुरुआत 1954 में हुई, लेकिन हज एक्ट के बाद ये पाबंदी हो गई है कि हज पर जाने के लिए एयर इंडिया या सऊदी एयरलाइंस से ही जाना होगा. कई मुस्लिम संगठन भी मांग करते रहे है कि हवाई यात्रा पर सब्सिडी खत्म कर दी जाए.

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मजलिसे मशावरत कमेटी के सदर नावेद हामिद कहते है कि सरकार को ‘ये पांबदी भी हटा लेनी चाहिए कि हज के लिए सिर्फ एयर इंडिया या सऊदी एयरलाइंस को ही प्रयोग में लाया जाए. बल्कि हज कमेंटी को ये अधिकार मिल जाए कि टेंडर के जरिए वो एयरलाइंस का चुनाव करें. ‘मुस्लिम संगठनों का तर्क है कि पौने दो लाख हाजी को ले जाने के लिए की कोई भी प्राइवेट कैरियर कहीं कम पैसे में ये सेवा दे सकती है.

मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि हज पर सरकार जो सब्सिडी का दावा करती है उसका असली फायदा एयर इंडिया को मिल रहा है. क्योंकि हज के दौरान रिटर्न टिकट की कीमत 63,000 से लेकर 1,50,000 तक पहुंच जाती है. जबकि आम दिनों में जेद्दा तक की यात्रा के लिए 30,000 तक का टिकट लगता है.

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