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देश के भविष्य के लिए वैदिक शिक्षा जरूरी: प्रकाश जावडेकर

मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर और उनके सहयोगी मंत्री सत्यपाल सिंह ने शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है.

FP Staff Updated On: Apr 28, 2018 10:11 PM IST

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देश के भविष्य के लिए वैदिक शिक्षा जरूरी: प्रकाश जावडेकर

मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर और उनके सहयोगी मंत्री सत्यपाल सिंह ने शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है. जावडेकर ने शनिवार को कहा कि आधुनिक शिक्षा कई मायनों में फेल हुई है और आने वाली पीढ़ियों के लिए वैदिक शिक्षा ही बेहतर है. उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा ने समाज को बिगाड़ा है और वैदिक शिक्षा से युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाई जा सकती है.

जावडेकर ने कहा कि उनका मंत्रालय इस दिशा में विचार कर रहा है कि कैसे वर्तमान सिलेबस से बोझिल विषयों को हटाकर बच्चों को वैल्यू एजुकेशन दी जा सकती है. वहीं दूसरी तरफ सिंह कहते हैं कि आधुनिक शिक्षा क्राइम रेट को कम करने में असफल हुई है.

जावडेकर ने नई शिक्षा पॉलिसी बनाने की तरफ भी इशारा किया और कहा कि तीन महीने में इसका ड्राफ्ट तैयार होने की संभावना है. उन्होंने कहा, “हम नई शिक्षा पॉलिसी पर काम कर रहे हैं और इसके लिए सुझाव मंगाए गए हैं. एक महीने में ड्राफ्ट तैयार हो जाएगा और तीन महीने में हर कोई पॉलिसी को देख सकेगा.”

वहीं शिक्षा राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा, 'आधुनिक शिक्षा बढ़ते अपराधों और समाज में बढ़ती अनिश्चितता को एड्रेस करने में असफल हुई है. भारत में हर बच्चे को शुरुआती पांच साल के लिए गुरुकुल भेजा जाना चाहिए. केवल वैदिक शिक्षा से ही हमारे बच्चों का विकास अच्छे से हो सकता है, उनमें मानसिक अनुशासन आ सकता है और उनमें देशभक्ति की भावना जगाई जा सकती है.'

दोनों मंत्रियों ने उज्जैन में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विराट गुरुकुल सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में यह बात कही है. इस कार्यक्रम में भारत और नेपाल के 900 से ज्यादा गुरुकुल हिस्सा ले रहे हैं. इस कार्यक्रम का मकसद इस संभावना पर विचार करना है कि कैसे मुख्यधारा में गुरुकुल शिक्षा को शामिल किया जा सकता है.

इस कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए. जावडेकर ने इस मौके पर कहा भारतीयों के लिए RSS ही एकमात्र प्रेरणा का स्त्रोत है. उन्होंने कहा, 'हमारी जिंदगी की सिर्फ एक प्रेरणा है और वह RSS है.'

जावडेकर ने आगे कहा कि सरकार कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए 'भारत बोध' पर एक विषय शुरू करने की योजना बना रही है. उन्होंने कहा कि इस विषय का मकसद छात्रों को ये बताना होगा कि प्राचीन भारत ने कैसे एस्ट्रोनॉमी, विज्ञान और एरोनॉटिक्स आदि में योगदान दिया है. उन्होंने कहा, "यह एक मजेदार विषय होगा जिसे छात्र पढ़ना चाहेंगे.'

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