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नोटबंदी: काले धन को सफेद करने का जुगाड़ तंत्र

जिनके पास ब्लैक मनी है, वे लोग व्हाइट करने के चक्कर में परेशान हैं.

Updated On: Nov 21, 2016 08:49 AM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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नोटबंदी: काले धन को सफेद करने का जुगाड़ तंत्र

8 नवंबर, रात 8 बजे के बाद से ही गूगल पर यह सबसे ज्यादा सर्च किया जा रहा है कि कालेधन को सफेद धन में कैसे बदलें?

यह सर्च गुजरात और हरियाणा में सबसे ज्यादा किया गया. वित्त मंत्रालय के एक आंकड़े के अनुसार देश में इस समय पुराने 500 और हजार के नोटों का प्रतिशत 80 प्रतिशत है.

जिनके पास ब्लैक मनी है, वे लोग व्हाइट करने के चक्कर में परेशान हैं. लोग कई तरह के बहकावे में भी आ रहे हैं. देश के शहर, कस्बों और बाजारों में कालेधन को सफेद करने वाले लोग कुकुरमुत्ते की तरह उग गए हैं.

हम आपको बता रहे हैं कि कुछ लोग कैसे उन लोगों को बहका रहे हैं जिनके पास करोड़ो रुपए पड़े हैं. काले कारोबार के दुनिया में कुछ लोग इस समय नोट बदलने के कई तरीकों पर काम कर रहे हैं. हम पड़ताल करेंगे उन तरीकों का, जो वाकई कालेधन को सफेद करने में मददगार है?

नोट के बदले नोट

इस तरीके पर लोग सबसे ज्यादा विश्वास कर रहे हैं. कोई भी आदमी इस समय रिस्क लेने को तैयार नहीं है. जो जल्दी और छटपटाहट में हैं, उनको पैसे की कीमत ज्यादा देनी पड़ रही है. मसलन 500 और हजार के नोटों को सफेद में बदलना चाहते हैं तो एक दिन में अधिकतम आपको 1 करोड़ रुपए सफेद करने का लालच दिया जा रहा है.

बिचौलिए के अनुसार आपके पास कुछ पैसा सौ के नोट में आएंगे, कुछ नए वाले 500 के नोट में भी आपके पास होंगे और कुछ पैसे नए 2 हजार के नोट में भी मिलेंगे. कुछ लोग ज्यादा सावधानी बरतते हुए यूरो और डॉलर में भी ले रहे हैं. इस पैसे को बदलने के लिए लोगों को 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक पैसे देना पड़ रहा है.

यानि आपको अगर 20 करोड़ रुपए सफेद करना है तो आपको इसके लिए 7 दिन का वक्त लग सकता है.

नोट के बदले 'स्वेट शेयर'

ये दर पहले वाले दर से सस्ता है. इसका मार्केट में रेट चल रहा है 15 से 25 प्रतिशत. इसके लिए आपको अपने पैसे को किसी कंपनी या रियल स्टेट की कंपनी में लगाना पड़ेगा.

कुछ पैसा आपको आरटीजीएस के जरिए मिलेगा. बाकी बचे पैसे पर 20 प्रतिशत काटने के बाद बिल्डर या कंपनी के मालिक आपको 3 से 4 महीने में देंगे. इसके लिए ऑनर आपको गारंटी के तौर पर लीज एग्रीमेंट कर, फ्लैट या जमीन आपको जमानत के तौर पर दे सकते हैं.

बाद में कंपनी आपको फिर से आरटीएस के जरिए, केस के जरिए या कुछ पैसा प्रोफिट का हिस्सा दिखा कर मिलेंगे.

नोट के बदले बिजनेस में निवेश

सरकार के सोना खरीदने पर सख्ती के बाद लोग दूसरे बाजार को चुन रहे हैं. जैसे इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, नमक, खाद, परिवहन, सब्जी और थोक बाजार उनमें से एक है. इसके लिए भी दर 20 से 30 प्रतिशत फिक्स किया गया है.

कुछ कम पैसे वाले लोग अभी भी सोना के मौजूदा रेट से दोगुना रेट देकर सोना खरीद रहे हैं. इस तरीके में पैसे को एक शहर से दूसरे शहर और एक राज्य से दूसरे राज्य में लागाया जाता है.

मंदिर में दान के रूप में

इस तरह की खबर आ रही है कि लोग अपने ब्लैक मनी को मंदिरों में दान कर रहे हैं. सरकार ने पहले ही घोषणा कर दिया है कि मंदिर में जो दान दिए जाएंगे उन पैसों का कोई हिसाब नहीं लिया जाएगा.

देश भर के मंदिरों के पुजारियों को 20 प्रतिशत के कमीशन पर सफेद करने का ऑफर दिया जा रहा है.

सहकारी बैंक में एफडी के रूप में

सहकारी बैंक के संस्थानों में हजारों लोग सदस्य होते हैं. उन लोगों के नाम पर ब्लैक मनी को व्हाइट मनी में बदलने की ये भी तरीका लोगों ने निकाल लिया है. जिसमें कुछ निश्चित अवधि के लिए लोगों के नाम पर पैसे जमा कराए जाएंगे और बाद में कुछ प्रतिशत देने के बाद उनको पैसे वापस कर दिए जाएंगे.

इन लोगों के खाते में अगर 2.5 लाख रुपए भी अधिकतम जमा कराए जाते हैं तो सरकार इनसे पूछताछ नहीं करेगी.

लोगों को उधार या कर्ज के रूप में

इस तरह की खबरें मिल रही है कि जिनके पास ब्लैक मनी हैं, वे लोग गरीब लोगों को उधार या कर्ज के रूप में 2.5-2.5 लाख रुपए दे रहे हैं.

एक निश्चित अवधि के बाद इन पैसों को गरीब लोग बिना ब्याज दिए वापस करेंगे. इसके लिए गारंटी के तौर पर जमीन के कागज या मकान के कागज लिए जा रहे हैं.

जन धन खातों का इस्तेमाल

जन धन खाता धारक अपने एकाउंट में साल में पचास हजार रुपए तक पैसा जमा कर सकते हैं. देश के बड़े हिस्सों में गरीब लोगों ने भी खाता खुलवाया था. बैंकों के कर्मचारियों के मिलीभगत से ब्लैकमनी वाले इन खाताधारकों को लोभ देकर ब्लैक को व्हाइट में कर रहे हैं.

 एडवांस सैलरी के रूप में

बड़ी-बड़ी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को सैलरी के रूप में कैश देने का ऑफर दे रही है. कर्मचारियों को बुला-बुला कर एडवांस सैलरी दी जा रही है. क्योंकि, पुराने नोटों को जमा कराने की आखिरी तारीख 30 दिसंबर तक की है और कर्मचारी अपने खाता में जमा कर आसानी से  व्हाइट में बदल सकते हैं.

टिकट खरीद कर

कालेधन के रूप में मौजूद छोटी-छोटी रकमों को सफेद करने के लिए लोग रेलवे और हवाई टिकट ले रहे हैं. सरकार के सख्ती के बाद इस तरीके में थोड़ा कमी आई है.

सरकार ने जबसे ये घोषणा की है कि टिकट कैंसिल के पैसे सीधे एकाउंट में ट्रांसफर किए जाएंगे, लोग इस तरीके को अपनाने में बच रहे हैं.

कुल मिलाकर सरकार के इस फैसले का भी लोग तोड़ निकालने में लगे हैं. सरकार के सख्त रवैये और कड़ी नजर इनके रवैये में बाधक साबित हो रहा है.

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