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#MeToo: मानहानि केस में एमजे अकबर ने दर्ज कराया बयान, 12 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

अकबर ने प्रिया पर धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का केस किया था. 17 अक्टूबर को अकबर ने बतौर जूनियर विदेश मंत्री अपना पद छोड़ दिया था

Updated On: Oct 31, 2018 02:11 PM IST

FP Staff

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#MeToo: मानहानि केस में एमजे अकबर ने दर्ज कराया बयान, 12 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
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पत्रकार से नेता बने एमजे अकबर द्वारा पत्रकार प्रिया रमानी पर किए गए मानहानि केस की सुनवाई 12 नवंबर को होगी. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सुनवाई के लिए इस तारीख को मुकर्रर किया है. गवाह अपने बयान को अगली सुनवाई में दर्ज करा सकेंगे.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को अकबर ने इस मामले में कोर्ट में बयान दर्ज कराया. उन्होंने कहा, 'मैंने प्रिया रमानी के खिलाफ उनके द्वारा किए गए ट्वीट्स के लिए मानहानि का केस किया है. दौरे से लौटने के बाद पहली बार यह मेरे ध्यान में आया.' इस दौरान उन्होंने कोर्ट में खुद की लिखी कई किताबें पेश की. उन्होंने अपनी शिक्षा, पत्रकारिता और राजनीतिक जीवन के बारे में बताया.

अकबर ने कहा, 'रमानी द्वारा 10 और 13 अक्टूबर को किए गए ट्वीट के खिलाफ मैंने मानहानि का केस किया है. इन ट्वीट्स को मीडिया में भी कवरेज मिली. लेकिन उनके द्वारा जो आर्टिकल लिखा गया था, उसमें मेरा नाम नहीं है. जब उनसे पूछा गया तो भी उन्होंने कहा कि मैंने कुछ नहीं किया था.'

अकबर ने प्रिया पर धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का केस किया था. 17 अक्टूबर को अकबर ने बतौर जूनियर विदेश मंत्री अपना पद छोड़ दिया था. उनके खिलाफ 15 महिलाओं ने यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे.

प्रिया रमानी का नाम उस वक्त चर्चा में आया जब उन्होंने 8 अक्टूबर को ट्विटर पर अकबर के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार की बात लिखी. हालांकि अकबर ने इन आरोपों का खंडन किया और मीटू कैंपेन को एक वायरल फीवर बताया.

19 अक्टूबर को, पटियाला हाउस कोर्ट ने आईपीसी की धारा 500 (मानहानि की सजा) के तहत अकबर की शिकायत संज्ञान में ली. लेकिन सुनवाई में अकबर मौजूद नहीं थे और उनकी जगह सीनियर एडवोकेट गीता लूथरा और एडवोकेट संदीप कपूर प्रतिनिधित्व कर रहे थे.

सुनवाई के वक्त गीता लूथरा ने कोर्ट में कहा, 'रमानी के ट्वीट की वजह से अकबर की छवि धूमिल हुई है. इन ट्वीट को परिवार, दोस्तों और असोसिएट्स ने पढ़ा है. अकबर के पास कई नंबरों से फोन आए जिसमें लोग इन आरोपों के बारे में जानना चाहते थे. इन सब बातों ने अकबर की छवि को नुकसान पहुंचाया.'

इस बीच, बीस महिला पत्रकारों ने अदालत से उनके साक्ष्य पर विचार करने और गवाहों के रूप में बुलाए जाने का आग्रह किया है.अकबर मोदी सरकार के पहले ऐसे मंत्री हैं जिन्हें यौन शोषण मामले की वजह से पद छोड़ना पड़ा. इस्तीफा देने से पहले अकबर ने कहा था कि वह झूठे आरोपों से लड़ेंगे.'

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