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भारतीय डिजिटल इकोनॉमी एक खरब डालर की है: रविशंकर प्रसाद

प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी 'डिजिटल इंडिया' अभियान के तहत होने वाली डिजिटल क्रांति विशेष रूप से गरीबों और वंचितों के लिए है

Updated On: Sep 24, 2017 10:42 PM IST

Bhasha

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भारतीय डिजिटल इकोनॉमी एक खरब डालर की है: रविशंकर प्रसाद

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत औद्योगिक और उद्यमिता क्रांति (इंडस्ट्रियल और इंट्रप्रन्योरशिप रिवॉल्यूशन) का लाभ नहीं उठा सका है. लेकिन अब हम डिजिटल क्रांति से वंचित नहीं रहना चाहते.

प्रसाद ने रविवार को एक समारोह में कहा कि विदेशी नियंत्रण की वजह से जहां हमारा देश औद्योगिक क्रांति के लाभ नहीं उठा सका. लाइसेंस परमिट कोटा राज की वजह से भी देश 60 से 90 के दशक में दुनिया में हुई उद्यमिता क्रांति के फायदों से भी वंचित रह गया. लेकिन हम डिजिटल क्रांति से वंचित नहीं रहना चाहते.

उन्होंने 'भारत में उभरती डिजिटल दुनिया' विषय पर कैपिटल फाउंडेशन सोसाइटी के सालाना व्याख्यान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी 'डिजिटल इंडिया' अभियान के तहत होने वाली डिजिटल क्रांति विशेष रूप से गरीबों और वंचितों के लिए है. इसका उद्देश्य इस वर्ग को मजबूत बनाना है.

प्रसाद ने कहा, 'हम तकनीक को आंदोलन बनाना चाहते हैं जो किफायती, समावेशी और विकासपरक होनी चाहिए. हम डिजिटल इको स्पेस बनाना चाहते हैं जिससे डिजिटल समावेश हो.' उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि देश की डिजिटल इकोनॉमी एक खरब डॉलर की होने जा रही है. 80 देशों के 200 शहरों में भारतीय आईटी कंपनियां हैं. इनमें 30 लाख से ज्यादा भारतीय सीधे तौर पर और एक करोड़ 30 लाख परोक्ष रूप से जुडे़ हैं. इनमें से एक तिहाई महिला उद्यमी हैं.

प्रसाद ने डिजिटल गवर्नेंस को अच्छा शासन बताते हुए कहा कि आधार एक डिजिटल पहचान है, भौतिक पहचान नहीं.

उन्होंने कहा कि सरकार पैन और मोबाइल नंबर की तरह ही मोटर ड्राइविंग लाइसेंस को भी आधार से जोड़ने की परियोजना पर काम कर रही है. इस दिशा में उसे अंतिम रूप दे रही है. इससे कोई फर्जी तरीके से दूसरा लाइसेंस नहीं बनवा सकेगा.

प्रसाद ने कहा कि देश में 30 करोड़ गरीबों के जनधन खाते खोलकर उन्हें आधार और मोबाइल फोन से जोड़ा गया. जिसके बाद से गरीबों को राशन, गैस की सब्सिडी और मनरेगा की मजदूरी सीधे उनके खाते में दी जाने लगी. इसकी वजह से दो साल में कमीशनखोरी रोककर 58 हजार करोड़ रुपए का सरकारी धन बचाया गया.

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