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क्या इस बार भी अमरनाथ यात्रा पर है आतंकी हमले का साया?

इस साल अमरनाथ यात्रा 28 जून से शुरू हो कर 26 अगस्त को समाप्त होगी

Updated On: Apr 10, 2018 08:19 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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क्या इस बार भी अमरनाथ यात्रा पर है आतंकी हमले का साया?

पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग मुठभेड़ में जिंदा पकड़े गए आतंकी के खुलासे के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां चौकस और सतर्क हो गई हैं. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन इस साल अमरनाथ यात्रा के दौरान बड़े हमले को अंजाम दे सकते हैं. इस खुलासे के सामने आने के बाद से ही भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब और चौकन्ना और चौकस हो गई हैं.

सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी वीएसके कौमुदी के मुताबिक आंतकी इस बार भी अमरनाथ यात्रा में खलल डालने की कोशिश कर सकते हैं. लेकिन, इसके बावजूद सीआरपीएफ और भारतीय सेना हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

आपको बता दें कि इस साल अमरनाथ यात्रा 28 जून से शुरू हो कर 26 अगस्त को समाप्त होगी. पिछले साल भी अमरनाथ यात्रियों पर हमला हो चुका है लिहाजा इस बार भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही एहतियात बरत रही है. पिछले साल गुजरात के अमरनाथ यात्रियों से भरी एक बस पर आतंकी हमले में आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी.

सरकार ने अमरनाथ यात्रा को लेकर कई दिशानिर्देश जारी किए हैं. खासकर यात्रियों और ट्रांसपोर्ट्स को लेकर. अमरनाथ यात्रा को लेकर टूर एंड ट्रेवल्स ऑपरेटर्स और खासकर ड्राइवर को सख्त हिदायत देने की बात कही जा रही है. ड्राइवर को नई गाइडलाइंस के मुताबिक अपने रूट पर ही गाड़ी चलाने की हिदायत दी गई है.

दूसरी तरफ यात्रा की परमिट प्राप्त करने के लिए ऑपरेटर्स को पहले ही अपनी रूट प्लान देना होगा. एक बार यात्रा शुरू हो जाने के बाद यात्री या ड्राइवर वहीं रात्रि विश्राम कर सकेंगे जहां जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा निर्धारित किया गया होगा. सूर्य अस्त होने के बाद कोई भी श्रद्धालु यात्रा नहीं कर सकेंगे. सरकार के इस नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है.

दूसरी तरफ यात्रियों की सुविधा को लेकर भी अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने कई उपाए किए हैं. बोर्ड ने यात्रा मार्ग पर शिविरों में वाहनों की पार्किंग, खाने-पीने और अन्य सुविधाओं को लेकर अभी से ही काम करना शुरू कर दिया है. यात्रा मार्ग से बर्फ हटाने का काम भी किया जा रहा है.

Amarnath_yatra

प्रतीकात्मक तस्वीर

दूसरी तरफ यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमरनाथ यात्रियों के लिए इस साल पंजीकरण फॉर्म में भी कुछ बदलाव किए गए हैं. जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि आरटीओ तभी परमिट जारी करेगा जब अमरनाथ श्राइन बोर्ड का रजिस्ट्रेशन फॉर्म एडवांस में जमा करेंगे.

इस रजिस्ट्रेशन फॉर्म में यात्रियों की बस डिटेल, परमिट नंबर, यात्रियों के नाम और उनके रिश्तेदारों के नंबर पता के साथ देना होगा. सरकार द्वारा नए सर्कुलर में ड्राइवर का नाम और एक निश्चित उम्र सीमा निर्धारित की गई है. ड्राइवर की उम्र 50 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. साथ ही आठ साल से ज्यादा कोई भी बस अमरनाथ यात्रा पर नहीं जा सकती है.

साथ ही बस का ड्राइवर जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति और परिस्थितियों से परिचित होना चाहिए. अगर जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक परिस्थिति से ड्राइवर परिचित नहीं है तो आटीओ पास जारी नहीं करेगी. बस के ड्राइवर और कंडक्टर को भी ट्रेनिंग और फर्स्ट-एड जैसी परिस्थितियों में खुद को और यात्रियों को कैसे सुरक्षित रखा जाता है यह सीखना अनिवार्य है. किसी भी आपात स्थिति में ड्राइवर को संयम और समझधारी से निकल आने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी.

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ सालों से हालात में कोई सुधार नहीं हुए हैं. इसके बावजूद अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. अब तक लगभग 90 हजार श्रद्धालुओं ने यात्रा को लेकर पंजीकरण करवा लिया है. इसमें अधिकांश श्रद्धालु उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड से हैं. अमरनाथ यात्रा को लेकर देश के दूसरे राज्यों से भी लगातार पंजीकरण कराए जा रहे हैं.

अमूमन देखा जाता है कि हर साल अमरनाथ यात्रा पर जाने वालों के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप लगाए जाते हैं. इस साल भी यात्रियों की ट्रेनिंग के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले यात्रियों की ट्रेनिंग इस साल 15 मई से शुरू होने वाली है. जम्मू-कश्मीर में आतंकी वारदातों में लगातार तेजी ने अमरनाथ यात्रा को लेकर सरकार की नींद उड़ा दी है. पिछले महीने ही अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था. राज्य सरकार ने इस साल अमनाथ यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा बलों की 85 अतिरिक्त कंपनियों को भेजने का प्रस्ताव भेजा है. पिछले साल अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा में 80 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई थीं.

जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ महीनों से सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच लगातार मुठभेड़ चल रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार अमरनाथ यात्रा काफी मुश्किल भरा हो सकता है. जम्मू के बेस कैंप खासकर चंदनवाड़ी और पहलगाम बेस कैंप में बीएसएफ, सीआरपीएफ. आईएआरपी के साथ लोकल पुलिस तैनात किए जाएंगे. जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर भी जवानों की तैनाती में कई गुना इजाफा किया जाएगा.

गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस बार जम्मू बेस कैंप में 35 कंपनियां और कश्मीर संभाग में 45 कंपनियों की तैनाती की जाएगी. इस बार अनंतनाग के आस-पास जिलों में सबसे अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी. सेना के इन कंपनियों के अलावा भी सेना की कई टुकड़ियां सैन्य शिविरों और श्रद्धालु शिविरों की सुरक्षा प्रदान करेंगे. खासकर श्रद्धालुओं के काफिले के साथ सीआरपीएफ के वाहन भी साथ चलेंगे.

अमरनाथ यात्रा को लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस, आर्म्ड पुलिस, सेना और अर्ध सैनिक बलों को अतिरिक्त कंपनियों को सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है. मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह में इन अतिरिक्त कंपनियों का बेस कैंपों में आना शुरू हो जाएगा.

भारतीय सेना के द्वारा पिछले कुछ महीनों से घाटी में आतंकियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. इसके बावजूद आतंकी कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. इसी को लेकर केंद्र सरकार अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा को लेकर इस साल कोई ढील नहीं देना चाहती है.

वैसे कुछ जानकारों का मानना है कि अमरनाथ यात्रा की सफलता और असफलता पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर काफी कुछ निर्भर करने वाला है. पाकिस्तान की राजनीति और आतंकी संगठनों को करीब से समझने वाले पत्रकार संजीव पांडेय फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए आतंकी संगठनों में बौखलाहट है. पिछले कुछ दिनों में भारतीय सुरक्षा बलों के द्वारा कई आतंकियों को मार गिराया गया है. इस कार्रवाई और पूर्व के अनुभवों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बॉर्डर पार से अमरनाथ यात्रा को लेकर विशेष प्लानिंग की जा रही होगी. खासकर लश्कर जिसका लोकल पेनिट्रेशन बहुत ज्यादा है. पिछले साल भी अमरनाथ यात्रियों पर हमले में लश्कर के चार-पांच लोकल लड़कों को पकड़ा गया था. हो सकता है कुछ लोकल लड़कों को लश्कर फिर से तैयार कर रहा हो.’

Jammu: A paramilitary security personnel keeping vigil as a convoy of Amaranth pilgrims leave for Kashmir on the outskirts of Jammu on Tuesday. The security has been beefed up along the Jammu-Srinagar national highway in the wake of the yesterday's militant attack on pilgrims. PTI Photo(PTI7_11_2017_000018B)

प्रतीकात्मक तस्वीर

संजीव पांडेय आगे कहते हैं, ‘लश्कर का जो मेन मुखिया है हाफिज सईद वह पाकिस्तान में चुनाव लड़ना चाहता है. पाकिस्तान में हाफिज सईद को रोकने की कोशिश भी की जा रही है. लेकिन वहां की सेना चाहती है कि हाफिज सईद की पार्टी चुनाव लड़े. ऐसे में अगर उसको पाकिस्तान में चुनाव लड़ने से रोका गया तो बौखलाहट में कश्मीर के अंदर जरूर अपना ताकत दिखाएगा. लेकिन, अगर वह पाकिस्तान में चुनाव लड़ने में कामयाब हो गया तो अपने आपको अच्छा साबित करने के लिए और विश्व को बताने के लिए शायद ही अमरनाथ यात्रा में कोई खलल डाले.'

कुछ दिन पहले ही अनंतनाग और शोपियां में सेना के साथ मुठभेड़ में 13 आतंकी मारे गए थे. एक साथ 13 आतंकियों के मारे जाने के बाद आतंकी संगठनों में काफी बौखलाहट है. अधिकांश आतंकी इस कार्रवाई के बाद या तो जंगल में छिप गए हैं या फिर रिहायशी इलाकों में शरण ले रखी है. ऐसे में माना जा रहा है कि जून-जुलाई महीने में अमरनाथ यात्रा के दौरान कुछ आतंकी गतिविधि फिर से देखने को मिले. इसके बावजूद भारतीय सेना लगातार चौकस और सजगता से मुंह तोड़ जवाब देने में सक्षम है.

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