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#MeToo कैंपेन: BJP के महिला मंत्रियों के बयान बाद क्या सरकार 'अकबर' का फैसला करेगी?

सरकार इस मुद्दे पर सोच-समझ कर कदम उठाना चाहती है, क्योंकि एम.जे अकबर का इस्तीफा अगर होता है तो यह मोदी सरकार के कार्यकाल में आरोपों में घिरे किसी मंत्री का पहला इस्तीफा होगा.

Updated On: Oct 12, 2018 04:10 PM IST

Amitesh Amitesh

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#MeToo कैंपेन: BJP के महिला मंत्रियों के बयान बाद क्या सरकार 'अकबर' का फैसला करेगी?

विदेश राज्य मंत्री एम.जे अकबर रविवार को विदेश दौरे से भारत वापस लौट रहे हैं. पहले कयास लगाए जा रहे थे कि नाइजीरिया दौरे से वो वापस आकर अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देंगे. लेकिन, फिलहाल उनके बीच दौरे से वापस आने की कोई योजना नहीं है. अब अकबर नाइजीरिया के बाद एक्वाटोरियल गुएना के दौरे पर होते हुए रविवार तक भारत वापस आएंगे.

एम.जे अकबर पर लग रहे यौन-उत्पीड़न के आरोपों के बीच उनके भारत आने का इंतजार हो रहा है. इंतजार उनकी तरफ से आने वाली सफाई का है. क्योंकि भारत में उनपर लग रहे यौन-उत्पीड़न के आरोपों को लेकर विपक्ष की तरफ से भी सवाल खड़ा किया जा रहा है.

कांग्रेस का ‘अकबर’ पर वार

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने #MeToo कैंपेन का समर्थन करते हुए कहा कि बदलाव लाने के लिए सच को ऊंची आवाज में बेबाकी से बोलना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि यह समय है कि सभी लोग महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आएं.

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, अब समय आ गया है कि हर व्यक्ति महिलाओं के साथ सम्मान और मर्यादा के साथ पेश आए. मुझे इसकी खुशी है कि जो ऐसा नहीं करते हैं उनके लिए दायरा सिकुड़ रहा है. उन्होंने कहा, बदलाव लाने के लिए सच को ऊंची आवाज में बोलना होगा.

इसके पहले कांग्रेस ने एम.जे अकबर से इस मामले में सफाई देने की मांग की है. कांग्रेस का कहना है कि या तो एम.जे अकबर अपने ऊपर लगे आरोपों पर संतोषजनक सफाई दें या फिर विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दें.

विपक्ष की तरफ से हो रहे हमले और इस कैंपेन के समर्थन में अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उतर जाने के बाद बीजेपी और सरकार पर एम जे अकबर मामले को लेकर दबाव बढ़ गया है.

बीजेपी प्रवक्ताओं ने साधी चुप्पी

आलम यह है कि बीजेपी के प्रवक्ता या कोई दूसरा नेता इस मुद्दे पर बोलने से कतरा रहे हैं. यहां तक कि सरकार में कद्दावर मंत्री और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी जब इस बाबत सवाल पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी जवाब नहीं दिया. सुषमा की चुप्पी चौंकाती है क्योंकि आरोप उनके ही मंत्रालय के राज्य मंत्री पर लगा है. लेकिन, बीजेपी नेता और सरकार में शामिल कुछ महिला मंत्रियों ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है.

बीजेपी की महिला मंत्रियों ने उठाई आवाज !

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मी टू कैंपेन में घिरे विदेश राज्य मंत्री एम.जे अकबर के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस मुद्दे पर वही (एम जे अकबर) सही बता सकते हैं, जिन पर आरोप लगे हैं. ईरानी ने इस मुद्दे पर साफ तौर पर कहा कि जो भी महिला इस तरह की आपबीती सामने ला रही है उसे न तो बदनामी का शिकार बनाया जाना चाहिए और न ही उनका मजाक उड़ाना चाहिए.

इस मुद्दे पर पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी किसी टिप्पणी से इनकार किया था, लेकिन, उन्होंने इतना जरूर कहा कि इस कैंपेन का बहुत फायदा हुआ है और काम करने की जगह पर अब महिलाएं पहले से ज्यादा सुरक्षित हो गई हैं. उमा भारती ने कहा था कि अब गंदे चरित्र के पुरुषों के मन में भी डर बैठ गया है जिससे कामकाजी महिलाओं को फायदा होगा.

इसके पहले केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की तरफ से भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी गई थी. मेनका ने यौन-उत्पीड़न के इस तरह के मामले की जांच की मांग की है. सुषमा की चुप्पी के बावजूद स्मृति ईरानी, उमा भारती और मेनका गांधी की तरफ से इस मुद्दे पर आ रहे बयान और मी टू कैंपेन को लेकर समर्थन से एम जे अकबर पर दबाव और बढ़ गया है.

एम.जे अकबर पर बढ़ा दबाव !

उधर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी इस मुद्दे पर कहा है कि अगर महिलाओं ने इस मुद्दे पर उन्हें लिखकर बताएं या शिकायत करें तो फिर सरकार से उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी.

Dattatreya-Hosabale

आरएसएस के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने भी मी टू कैंपेन के समर्थन में ट्वीट किया है जिसके बाद इस मामले में एम.जे अकबर अकले पड़ते दिख रहे हैं. मुद्दा भी कुछ ऐसा ही है जिस पर अकबर को अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी और सफाई खुद देनी होगी. सरकार ने भी फिलहाल ऐसा ही करने का फैसला किया है.

एम.जे अकबर के विदेश दौरे से वापस लौटने के साथ ही उनसे इस मामले में सफाई ली जाएगी. उनकी तरफ से सफाई देने के बाद ही इस मामले में सरकार कोई कदम उठाएगी. क्योंकि मामला महिलाओं से जुड़ा है और अकबर के पद पर बने रहने से विपक्ष के पास सरकार पर विधानसभा चुनावों के दौरान हमला करने का मौका मिल जाएगा.

फिर भी सरकार इस मुद्दे पर सोच-समझ कर कदम उठाना चाहती है, क्योंकि एम.जे अकबर का इस्तीफा अगर होता है तो यह मोदी सरकार के कार्यकाल में आरोपों में घिरे किसी मंत्री का पहला इस्तीफा होगा.

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