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घाटी में मानसिक दबाव और बेरोजगारी नौजवानों को ड्रग्स की ओर खींच रही है

कश्मीर के कॉलेजों में हुए एक सर्वे में दावा किया गया है कि 20 से 30 साल के नौजवानों में ड्रग्स लेने का चस्का बढ़ रहा है

Updated On: Sep 02, 2018 06:51 PM IST

FP Staff

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घाटी में मानसिक दबाव और बेरोजगारी नौजवानों को ड्रग्स की ओर खींच रही है

एक साथ कई तरह के ड्रग्स लेने वालों को 'पॉली एब्यूजर्स' कहते हैं. एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि घाटी में नशे के शिकार नौजवानों में 90% 'पॉली एब्यूजर्स' हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस कश्मीर घाटी में जगह-जगह ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर चला रही है, ताकि जिन नौजवानों को नशे की लत लग चुकी है, वो यहां आकर ड्रग्स से आजादी पा सकें. आंकड़े बताते हैं कि श्रीनगर के नशा मुक्ति केंद्र में साल दर साल नशा छुड़ाने के लिए आने वाले मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है.

कश्मीर के कॉलेजों में हुए एक सर्वे में दावा किया गया है कि 20 से 30 साल के नौजवानों में ड्रग्स लेने का चस्का बढ़ रहा है. शुरुआत सिर्फ सिगरेट पीने से होती है, लेकिन धीरे-धीरे वो जहर के गुलाम बनने लगते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक मानसिक दबाव और बेरोजगारी नौजवानों को ड्रग्स की ओर खींच रही है.

ड्रग तस्कर नौजवानों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी अपना शिकार बना रहे

आज कश्मीर को बम, बंदूक से ज्यादा खतरा सफेद बारूद से है. क्योंकि इसके निशाने पर घाटी के वो मासूम हैं जिन्हें सही-गलत की समझ तक नहीं है. ड्रग तस्कर नौजवानों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी अपना शिकार बना रहे हैं. तस्करों के झांसे में आकर बच्चे ड्रग्स खुद भी ले रहे हैं और उसे दूसरों को बेच भी रहे हैं.

जम्मू -कश्मीर के एसपीजी एस. पी. पानी का इस बाबत कहना है कि ड्रग एक बड़ी समस्या है, इस्तेमाल करने वालों के लिए और समाज के लिए समस्या, समाज को गंदा कर रहे हैं, दूसरों को लत लगाते हैं.

पुलिस काफी संगठित तरीके से काम कर रही है. बारामूला के एसएसपी इम्तियाज हुसैन का कहना है कि हमारी बच्चियां ब्राउन शुगर और हेरोइन की एडिक्ट हो रही हैं, पहले एडिक्शन कोकीन वगैरह की थी, लेकिन ये जो ऩई चीज है, ये बहुत खतरनाक है, इस पर जागरुकता लाने की जरूरत है.

न्यूज 18 की रिपोर्ट से पता चला है कि 8 से 9 साल के बच्चे भी पैसों की खातिर ड्रग्स के कारोबार में शामिल हो रहे हैं. एक बार ड्रग्स की लत लग जाने के बाद वो पैसों की खातिर संगीन जुर्म भी करने से नहीं कतरा रहे . हालात ये है कि स्कूल-कॉलेज में जाकर नौजवानों को ड्रग्स के खतरों से आगाह किया जा रहा है. इसके बावजूद ये सिलसिला थम नहीं रहा.

कश्मीर में मेंटल हेल्थ काउंसर के तौर पर काम कर रही  इरम वानी का कहना है कि हमारे यहां नशे की आदत छुड़ाने वाले पहले भी लोग आते थे. लेकिन अब इसमें तादाद कम उम्र के लोगों की भी है.

कश्मीर में ड्रग आ कहां से रहा है ?

सवाल उठता है कि आखिर कश्मीर घाटी में नौजवानों तक ड्रग्स पहुंच कैसे रही है. सरकार और प्रशासन अब तक इस पर काबू क्यों नहीं पा सकी है. कश्मीर के कई इलाकों में अफीम और गांजे की खेती होती है. अनंतनाग,कुलगाम,पुलवामा और शोपियां में बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से अफीम उगाई जा रही है. इन खेतों पर अक्सर पुलिस का छापा पड़ता है और इन जहरीले पौधों को उखाड़ फेंका जाता है. लेकिन कुछ वक्त बाद फिर से पौधे उगा लिए जाते हैं. लेकिन खतरा सिर्फ इतना ही नहीं है.

कश्मीर में अब सिंथेटिक ड्रग्स की बड़ी खेप पहुंचने लगी है. और जानकारों के मुताबिक. कश्मीर घाटी से 'नैचुरल ड्रग्स' को बाहर भेजा जा रहा है. फिर अफीम और गांजे के साथ केमिकल मिलाकर उन्हें और नशीला बनाया जा रहा है, इसके बाद उस सिंथेटिक ड्रग्स को वापस घाटी में ऊंची कीमत पर बेचा जा रहा है.

जम्मू- कश्मीर पुलिस के आकड़ो के मुताबिक, अब तक हजारों किलो अफीम, गांजा, ब्राउन शुगर, कोकीन और दूसरी नशीली दवाइयां पकड़ी जा चुकी हैं. इस साल अब तक 200 ड्रग तस्कर गिरफ्तार हो चुके हैं. 2018 में ड्रग्स से जुड़े 88 केस दर्ज किए गए हैं.

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