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मेघालय: मजदूरों को अभी तक नहीं निकाल पाई रेस्क्यू टीम, परिजनों ने कहा- शव ही निकाल दो

इस हादसे में जिंदा बचे असम के चिरांग जिले के साहिब अली ने कहा कि फंसे खनिकों को जीवित बाहर निकालना संभव नहीं है

Updated On: Dec 30, 2018 03:23 PM IST

FP Staff

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मेघालय: मजदूरों को अभी तक नहीं निकाल पाई रेस्क्यू टीम, परिजनों ने कहा- शव ही निकाल दो

मेघालय के कोयला खदानों में फंसे 15 मजदूरों को अभी तक बाहर नहीं निकाला जा सका है. मजदूरों को बचाने के लिए चलाए गए बचाव अभियान में भी दिक्कत आ रही है. यहां पर 13 दिसंबर से 15 मजदूर फंसे हुए हैं.

दरअसल 13 दिसंबर को पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस खदान में पास की लितेन नदी का पानी घुस गया था, जिसकी वजह से खदान में काफी पानी भर गया और मजदूर खदान में ही फंस गए. इस हादसे में जीवित बचे एक आदमी ने शनिवार को कहा कि फंसे हुए मजदूरों के जिंदा बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं है. फंसे हुए सात मजदूरों का परिवार पहले ही उनके जिंदा बाहर निकलने की उम्मीद छोड़ चुका है और अंतिम संस्कार के लिए सरकार से उनके शव को बाहर निकालने का आग्रह किया है.

वहीं वेस्ट गारो हिल्स जिले के मगुरमारी गांव के शोहर अली के बेटे, भाई और दामाद खदान में फंसे हुए हैं. शोहर अली ने कहा, 'वे चाहते हैं कि खदान में फंसे उनके परिवार का शव मिल जाए ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके. उन्होंने कहा कि तीनों को 2000 रुपये की रोजाना मजदूरों का लालच दिया गया था.

पानी के स्तर का पता लगाने के लिए नीचे उतरी थी बचाव टीम

इससे पहले शनिवार को नौसेना और एनडीआरएफ के गोताखोरों की टीम मेघालय में कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों को निकालने के लिए खदान के भीतर उतरी जहां उन्होंने पानी के स्तर का पता लगाया.

एनडीआरएफ के सहयाक कमांडेंट संतोष कुमार सिंह ने बताया कि इस तंग खदान में पानी का स्तर 77 से 80 फुट तक ऊंचा होने का अनुमान है. सिंह ने कहा, 'नौसेना के गोताखोर और मैं खदान के भीतर गए और शुरुआती तैयारी की गई. मुझे उम्मीद है कि सभी बचाव एजेंसियां रविवार सवेरा होने के साथ ही अभियान शुरू कर देंगे.'

जिला प्रशासन ने बताया कि मानव श्रम और मशीनों से जुड़े तकनीकी कारणों के चलते अभियान को बढ़ाया नहीं जा सका. गोताखोरी के विशेष उपकरणों से लैस नौसेना की 15 सदस्यों की टीम शनिवार को सुदूर गांव लुमथारी में आपदा स्थल पर पहुंचे.

खदान में कैसे फंसे मजदूर? 

इस हादसे में जिंदा बचे असम के चिरांग जिले के साहिब अली ने कहा कि फंसे खनिकों को जीवित बाहर निकालना संभव नहीं है. न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक 13 दिसंबर की रात को याद करते हुए अली ने कहा, 'सभी लोगों ने सुबह करीब 5 बजे काम शुरू किया. सुबह करीब 7 बजे तक खदान पानी से भर गई. मैं 5-6 फीट अंदर था और कोयले से भरा रेड़ा बाहर ला रहा था. मैंने खदान के अंदर एक अजीब सी हवा महसूस की जो असामान्य थी. इसके साथ ही तेजी से पानी के बहने की आवाज आने लगी.

साहिब अली ने कहा, 'खदान में पूरा पानी भरा हुआ है. वहां फंसे किसी भी आदमी के जिंदा बचने की उम्मीद नहीं है. क्योंकि कोई आदमी कितने समय तक पानी में सांस ले सकता है.'

(भाषा से इनपुट)

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