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एक 'जालिम' बाघ की ये ममता भरी कहानी आपका दिल जीत लेगी

रणथंभौर में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने बड़े-बड़े वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स तक को हैरत में डाल दिया

Subhesh Sharma Updated On: Jun 11, 2017 01:23 PM IST

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एक 'जालिम' बाघ की ये ममता भरी कहानी आपका दिल जीत लेगी

आपने मां की ममता की ढेरों कहानियां सुनी होंगी. एक मां ही होती है जो अपने बच्चों को पाल-पोस कर बड़ा करती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है. जंगली जानवरों में भी मां ही अपने बच्चों को बड़ा करती है, उन्हें शिकार करना और खुद को शिकारियों से बचाए रखने के गुर भी सिखाती है. लेकिन भारत के रणथंभौर नेशनल पार्क में एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने बड़े-बड़े वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स तक को हैरत में डाल दिया.

नेचर से विपरीत काम किया

आपको बता दें कि मेल टाइगर का काम दूसरे टाइगर्स से इलाके की रक्षा करना और अपने वंश को आगे बढ़ाना होता है. वो दूसरे टाइगर्स के बच्चों को देखते ही मार डालते हैं और यहां तक की अपने बच्चों के नजदीक जाना भी कम ही पसंद करते हैं. लेकिन रणथंभौर के खूंखार टाइगर टी-25 ने अपने नेचर से बिलकुल अलग हटकर काम किया और अपनी दो नन्हे बच्चों को खुद पाल-पोसकर बड़ा किया.

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टी-25 के इस बिहेवियर ने पूरी दुनिया का ध्यान उसकी ओर खींचा और पहली बार मेल टाइगर का विनम्र रूप सामने आया. इस घटना ने सालों से टाइगर्स पर रिसर्च कर रहे एक्सर्ट्स की रिसर्च को एक बड़ी चुनौती देते हुए उनके सामने फिर से एक बार ये सवाल खड़ा कर दिया कि क्या हम वाकई बाघ के नेचर के बारे में कुछ जानते हैं ?

मां की मौत के बाद बच्चे

ये नन्ही बाघिनें उस वक्त करीब चार महीने की थी जब उनकी मां टी-5 की इन्फेक्शन के कारण मौत हो गई थी. इसके बाद से ये दोनों बाघिने बिन मां की रह गईं और पार्क के कर्मचारियों के रहमोकरम पर किसी तरह जिंदा थी. बिना मां के जंगल में एक दिन भी काट पाना इन बच्चों के लिए बड़ा ही मुश्किल था.

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मां की मौत के बाद कई दिनों तक बच्चों का नामोनिशान तक नहीं मिला. उनकी खोज में सीसीटीवी कैमरा लगाए गए, लेकिन बच्चों का कहीं भी कोई सुराग नहीं मिला. अधिकारी मान ही बैठे थे कि बच्चे अब नहीं बचे होंगें, तभी एक दिन सीसीटीवी पर एक चौंकाने वाला फुटेज सामने आया, जिसमें बच्चे अपने पिता टी-25 के साथ आराम से घूम फिर रहे हैं.

रणथंभौर के अधिकारियों ने की थी पूरी कोशिश

ऐसे समय में जब टाइगर दुनिया से विलुप्त होने के कगार पर आ खड़े हुए हैं, रणथंभौर के अधिकारी टाइगर के इन बच्चों को खोना नहीं चाहते थे. इसके चलते अधिकारियों ने नेशनल कनजरवेशन ऑथोरिटी से बच्चों को कम आबादी वाले सरिस्का टाइगर रिजर्व शिफ्ट करने की परमिशन भी मांगी थी. लेकिन जब तक मंजूरी मिली तब तक शावक 10 महीने के हो चुके थे और टी-25 यानी 'जालिम' की कड़ी निगरानी में थे.

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जालिम से नहीं थी रहम की उम्मीद

जालिम अपने आक्रामक रवैया के लिए काफी लोकप्रिय था और अक्सर उसे गाड़ियों का पीछा करते और लोगों पर अटैक करते देखा जा चुका था. जिसके चलते ऐसे किसी टाइगर से रहम की कोई उम्मीद के बारे में सोचना भी गलत था. लेकिन जालिम ने अपने बच्चों की देख-रेख कुछ ऐसे ढंग से की जिसे देख सभी दंग रह गए. डेली मेल पर छपी एक खबर के मुताबिक, डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर याई के साहू ने कहा था कि किसी मेल टाइगर द्वारा बच्चों का इतने लंबे समय तक पालना, वाइल्ड लाइफ के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया है.

'जालिम' ने अपने बच्चों को जंगल में जिंदा रहने के सभी गुर सिखाए

साहू बताते हैं कि जालिम ने शावकों को शिकार करना, इलाके की मार्किंग करना, खुद को सुरक्षित रखने जैसे जंगल में जिंदा रहने के सभी गुर सिखाए. एक बार जालिम ने अपनी पुरानी साथी सुंदरी (बाघिन) से अपने एक बच्चे की रक्षा भी की थी. जालिम को गुस्से में देख सुंदरी ने सरेंडर कर दिया था और उसके बाद से कभी भी उसके बच्चों की तरफ आंख उठा के नहीं देखा था.

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करीब 30 किताबें लिख चुके और भारत के टाइगर्स के नाम अपना जीवन कर चुके मशहूर भारतीय प्रकृतिवादी, संरक्षणवादी और लेखक वाल्मीकि थापर भी जालिम के बहुत बड़े फैन थे. उनकी किताब 'लिविंग विद टाइगर्स' में जालिम को खास जगह दी गई थी. जालिम के लिए उनके दिल में एक विशेष लगाव था और किसी मेल टाइगर को बच्चों को पाल पोस कर बड़ा करते देखना उनके लिए भी एक दुर्लभ घटना थी.

(फोटो साभार- रहेजा प्रोडक्शंस)

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