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ऑल इंडिया रेडियो में सामने आए कई #MeToo केस, मेनका गांधी ने की जांच की मांग

ऑल इंडिया रेडियो के देश भर में कई स्टेशनों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने यौन दुर्व्यवहार की शिकायत की है

Updated On: Nov 15, 2018 10:24 AM IST

FP Staff

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ऑल इंडिया रेडियो में सामने आए कई #MeToo केस, मेनका गांधी ने की जांच की मांग

पिछले कुछ वक्त में ऑल इंडिया रेडियो में यौन शोषण के कई मामले सामने आए हैं. महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इस मामले की जांच की मांग की है. ऑल इंडिया रेडियो के देश भर में कई स्टेशनों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने यौन दुर्व्यवहार की शिकायत की है. पिछले हफ्ते ऑल इंडिया रेडियो कैजुअल अनाउंसर एंड कम्पेरेस यूनियन (AICACU) ने मेनका गांधी को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसके बाद उन्होंने ये मांग की.

मी टू कैंपेन में कई यौन शोषण के मामले सामने आने के बाद ऑल इंडिया रेडियो के कई स्टेशनों से भी कई ऐसी शिकायतें सामने आई हैं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, ये मामले अधिकतर कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों के साथ ही हुए हैं. इनमें से कुछ महिलाएं यहां दो दशकों से काम कर रही थीं लेकिन शिकायत करने के बाद से अब उन्हें काम नहीं दिया जा रहा है.

सभी आरोपी ऑल इंडिया के परमानेंट कर्मचारी है. आरोप लगने के बाद कुछ को आरोपमुक्त कर दिया गया तो कुछ को ट्रांसफर कर दिया गया है.

शिकायत करने पर चली जाती है नौकरी

AICACU ने गांधी को लिखे अपने लेटर में बताया था कि कैजुअल (असाइनमेंट मिलने पर काम करने वाले कर्मचारी) अनाउंसर या रेडियो जॉकी खुद पर हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाते क्योंकि उन पर हमेशा नौकरी जाने का डर बना रहता है. जिस भी कर्मचारी ने यौन शोषण जैसी शिकायत की उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है और उसका साथ देने वालों को भी ऐसी ही स्थितियों का सामना करना पड़ता है.

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एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कई महिला कर्मचारियों के साथ हुई घटनाओं का जिक्र किया गया है. ये मामले एआईआर के मध्य प्रदेश के शाहडोल, सागर, उत्तर प्रदेश के ओबरा, हरियाणा के कुरुक्षेत्र और हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के स्टेशनों से सामने आए हैं.

इन महिलाओं ने बताया है कि कैसे उनके सीनियर अधिकारी उनसे सेक्सुअली अडवांस होते हैं और उनकी चुप्पी का फायदा उठाते हैं. उनसे जानबूझकर अश्लील शब्दों और भाव-भंगिमाओं का इस्तेमाल करते हैं.

आंतरिक समिति नहीं करती कोई कार्रवाई

कई महिला कर्मचारियों ने बताया कि उनके स्टेशन हेड उनको गलत तरीके से छूते तक हैं. उनकी शिकायत करने पर आंतरिक शिकायत कमिटी को अपनी जांच में कुछ नहीं मिलता और वो आरोपियों को आरोपमुक्त कर देती है. कई कर्मचारियों ने बताया कि जबसे उन्होंने शिकायत की है, तबसे उन्हें कोई असाइनमेंट नहीं मिल रहा. उन्हें एआईआर ने डेढ़-दो सालों से कोई काम नहीं दिया है.

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धर्मशाला के एआईआर स्टेशन में काम करने वाली 45 साल की ज्योति पथनिया ने अपने साथ हुई ऐसी ही एक घटना बताई, 'मैं डबिंग रूम में थी तभी अचानक सारी लाइट बुझ गईं. मेरे बॉस सुरेश कुमार ने अपनी कुर्सी मेरे पास खींच ली और मुझे पकड़कर किस कर लिया. मैं जड़वत हो गई. जब लाइटें जल गईं तो मैंने सदमें में अपनी रिकॉर्डिंग पूरी की और वो वहां से चले गए. जब वहां अगली शिफ्ट में काम करने वाली साथी कर्मचारी आई तो मैं रोने लगी.'

AICACU की महासचिव शबनम खानम ने बताया कि लगातार इन मामलों की शिकायत प्रसार भारती और सूचना प्रसारण मंत्रालय में करने के बाद भी महिलाओं का यौन शोषण और शिकायत पर उनकी नौकरी जाने का सिलसिला थमा नहीं है.

इन शिकायतों पर प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पाति ने कहा कि वो बिना मामला विशेष देखे और उसके तथ्यों को जाने बगैर इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकते.

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