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कैसे होगी शादी जब लगातार बंद हो रहे हों बैंक्वेट हॉल

एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए शादी कराना किसी पहाड़ तोड़ने के बराबर हो चला है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jan 19, 2018 05:22 PM IST

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कैसे होगी शादी जब लगातार बंद हो रहे हों बैंक्वेट हॉल

देश में पिछले साल ठीक इसी वक्त कई शादियां धड़ाधड़ रद्द हो रहीं थीं या फिर शादियों की डेट को आगे बढ़ाया जा रहा था. एक साल पहले शादियों के रद्द होने या डेट आगे बढ़ाने का कराण था देश में नोटबंदी का लागू होना. ठीक एक साल बाद अब एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए शादी कराना किसी पहाड़ तोड़ने के बराबर हो चला है. लेकिन इस बार शादियों के रद्द होने या आगे बढ़ने का कारण नोटबंदी नहीं बल्कि दिल्ली-एनसीआर में चल रही सीलिंग की कार्रवाई है.

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली-एनसीआर में सीलिंग की कार्रवाई को लेकर कोहराम मचा हुआ है. सीलिंग की कार्रवाई से बैंक्वेट हॉल भी अछूते नहीं रहे. दिल्ली नगर निगम हो या फिर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, सभी शहर में अवैध रूप से चलने वाले बैंक्वेट हॉल पर कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं.

पिछले कुछ दिनों में दिल्ली नगर निगम ने कई बैंक्वेट हॉल सील किए हैं और ये कार्रवाई अभी भी जारी है. कुछ दिन पहले ही पूर्वी नगर निगम ने शाहदरा के छह बैंक्वेट हॉल सील किए हैं. साथ ही कई बैंक्वेट हॉल को नोटिस भी जारी किया है. ये नजारा कमोबेश दिल्ली के सभी नगर निगमों में चल रहा है. बैंक्वेट हॉल को सील किए जाने पर नगर निगम के अधिकारियों द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि इन बैंक्वेट हॉल्स में अग्निशमन के उपाय ठीक ढंग से नहीं किए गए हैं. साथ ही बंद किए गए बैंक्वेट हॉल में अच्छा खाना भी परोसा नहीं जाता था.

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कुछ दूसरे कारण भी सामने आ रहे हैं. अभी हाल ही में गाजियाबाद के सेक्टर-6 में स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आग लगने के बाद अफरा-तफरी मच गई थी. मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया कि इस बैंक्वेट हॉल के स्टोर रूम में रखा एक सिलेंडर ब्लास्ट हो गया था. बैंक्वेट हॉल में मौजूद लगभग 15 कर्मचारियों की जान किसी तरह बच पाई थी. आग लगने का कारण बैंक्वेट हॉल में शॉर्ट सर्किट को बताया गया था.

कहा जा रहा है कि इस घटना के बाद से ही गाजियाबाद नगर निगम ने बैंक्वेट हॉल पर लगाम कसनी की शुरुआत की है. पिछले कुछ दिनों में कई बैंक्वेट हॉल को सील कर दिए गए हैं.

गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन इलाके में बैंक्वेट हॉल्स पर नगर निगम की कार्रवाई के बाद कई शादी समारोहों पर अब तलवार लटकने लगी है. बैंक्वेट हॉल टूटने के बाद कई परिवार वाले, जिन्होंने कुछ महीने पहले ही अपने बच्चों की शादी के लिए हॉल बुक करवाया था, उनपर अब मुसीबतों का पहाड़ सा टूट पड़ा है. परिवार वालों की चिंता सताने लगी है कि आखिर अब वह अपनी बेटी की शादी कहां करेंगे?

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गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने जिन बैंक्विट हॉल को तोड़ा है, उन्हें पहले से ही करीब 100 शादियों की बुकिंग मिल चुकी थी. लोगों ने एडवांस बुकिंग के लिए अच्छी खासी रकम दी है. लोग परेशान हैं और अब ऐन मौके पर शादियों के लिए दूसरे बैंक्वेट हॉल की तलाश में परेशान हैं. कहा ये भी जा रहा है कि बैंक्वेट हॉल को कई कारणों से तोड़ा जा रहा है. कई बैंक्वेट हॉल के मालिकों ने राजनीतिक प्रभुत्व का इस्तेमाल कर ग्रीनरी एरिया को भी कब्जे में ले लिया और उसका इस्तेमाल व्यावसायिक तौर पर कर रहे थे.

गोल्डन गार्डन वैशाली सेक्टर-9 के सुपरवाइजर एसके तिवारी ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में कहा है कि हमारे यहां जनवरी में 9 शादियों की बुकिंग थी. जीडीए ने बिना किसी सूचना के हमारा बैंक्वेट हॉल तोड़ दिया. वहीं गोल्डन गार्डन के करीब गुलमोहर गार्डन पर भी जीडीए की गाज गिरी है. यहां करीब 22 शादियां होनी थी. लेकिन जीडीए ने इसे भी तोड़ दिया है. लेकिन इसी इलाके में मौजूद अन्य दो बैंक्वेट हॉल्स पर जीडीए ने कोई कार्रवाई नहीं की है. जीडीए पर पैसे लेकर मामला रफा-दफा करने के भी आरोप लग रहे हैं.

जीडीए ने पिछले सप्ताह ही इंदिरापुरम स्थित ग्रीन बेल्ट से तीन बैंक्वेट हॉल तोड़ दिए थे. इन बैंक्वेट हॉल्स पर आरोप है कि इन्होंने ग्रीन बेल्ट एरिया को भी अपने कब्जे में ले रखा है. बैंक्वेट हॉल मालिकों ने ग्रीनरी एरिया के नियमों का उल्लंघन किया है. मालिकों ने 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सों को अपने कब्जे में ले रखा था. जबकि नियम यह है कि ग्रीनरी एरिया के 10 प्रतिशत हिस्से में ही कंस्ट्रक्शन काम होना चाहिए.

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बैंक्वेट हॉल को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं. कुछ लोगों ने बैंक्वेट हॉल मालिकों के खिलाफ एनजीटी में भी केस फाइल कर रखा है. अब एनजीटी ने वैसे सभी बैंक्वेट हॉल को तोड़ने का आदेश दिया है, जिन्होंने ग्रीनरी एरिया को कवर रखा है.

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि जिन बैंक्वेट हॉल्स को तोड़ा गया है, वहां पर होने वाली शादी समारोह पर तलवार लटक गई है. शादी के कार्ड छप गए हैं. दूर-दराज के रिश्तेदारों को शादी का कार्ड भी पहुंच गया है. अब सवाल यह है कि जिनके बच्चों की शादी इन बैंक्वेट हॉल्स में होनी हैं, उन माता-पिताओं के पास क्या विकल्प बचा है. एक बार फिर से शादी का कार्ड दोबारा से छपवाओ, शादी का वेन्यू दोबारा से ढूंढो और इसके अलावा न जाने ऐसे हजार तिकड़म करो, जो उन्होंने बैंक्वेट हॉल बुक कराते वक्त पहले सोचे भी नहीं होंगे.

इसलिए आप जब भी शादी के लिए बैंक्वेट हॉल बुक कराने जाएं, तो पता कर लें कि उसके पास अग्निशमन विभाग का सर्टिफिकेट, दिल्ली पुलिस का क्लिएरेंस सर्टिफिकेट व और दूसरे जरूरी सर्टिफिकेट्स हैं भी या नहीं. सिर्फ दिल्ली के अंदर ही लगभग 500 ऐसे बैंक्वेट हॉल और धर्मशालाएं हैं, जहां शादियों के सीजन में खूब भीड़ रहती है. लेकिन एक रिपोर्ट में कहा गया है, इनमें से सिर्फ 90 बैंक्वेट हॉल के पास ही अग्निशमन विभाग का सर्टिफिकेट है. बाकी बैंक्वेट हॉल और घर्मशालाएं राजनीतिक सरपस्ती और हुक्मरानों दुआवों से ही चलती हैं. ऐसे किसी बैंक्वेट हॉल में शादी कराना किसी खतरे से कम नहीं है.

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पिछले दिनों गाजियाबाद के वैशाली के बैंक्वेट हॉल में आग लगने से सवाल उठता है कि आखिरकार बैंक्वेट हॉल कितने सेफ हैं. हाल ही में मुंबई के कमला मिल्स में लगी के बाद रेस्टोरेंट और होटलों के कायदे-कानून को लेकर महाराष्ट्र सरकार की काफी आलोचना हुई थी. जिसके बाद से सरकार काफी सचेत हो गई है. जिसके चलते दिल्ली-एनसीआर के बैंक्वेट हॉल, धर्मशालाएं और मैरिज होम को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है.

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