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डेंगू-चिकनगुनिया और मलेरिया से कैसे मिले निजात?

दिल्ली में इस साल अब तक मलेरिया के लगभग 100 मामले, डेंगू के 60 मामले और चिकनगुनिया के 110 मामले सामने आए हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jul 13, 2017 05:46 PM IST

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डेंगू-चिकनगुनिया और मलेरिया से कैसे मिले निजात?

अरविंद केजरीवाल की सरकार आने के बाद से ही दिल्ली सरकार और एमसीडी के बीच काम के क्रेडिट को लेकर लड़ाई छिड़ गई है. एक तरफ दिल्ली सरकार भिड़ी है तो दूसरी तरफ डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया में भी दिल्ली वालों को बीमार करने की होड़ लगी है.

राजधानी में इस साल डेंगू से ज्यादा मलेरिया का कहर है. पिछले साल चिकनगुनिया के मामले ज्यादा सामने आए थे. 2015 में दिल्ली में डेंगू से ज्यादा मलेरिया और चिकनगुनिया के केस सामने आए थे.

मच्छरों का कहर जारी

पिछले हफ्ते दिल्ली में मलेरिया के लगभग 30 नए मामले सामने आए थे. जबकि, डेंगू के पांच नए मामलों का पता चला था. कुल मिलाकर दिल्ली सरकार और नगर निगमों के लाख दावों के बावजूद मच्छरों में कोई कमी नहीं आई है. एमसीडी और एनडीएमसी के आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक डेंगू-मलेरिया मच्छरों के लगभग 50 हजार लारवा मिले हैं. दिलचस्प है कि दिल्ली का पॉश इलाका माने जाने वाले साउथ दिल्ली में सबसे ज्यादा लारवा मिले हैं.

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नगर निगम ने इस साल समय से पहले ही मच्छरों से होने वाली बीमारियों पर रोक लगाने का काम शुरू कर दिया था. इसके बावजूद डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया के करीब 50 हजार लारवा मिले हैं. लोगों को इस साल भी राहत मिलती नहीं दिख रही है.

इस साल दिल्ली में अब तक मलेरिया के लगभग 100 मामले, डेंगू के 60 मामले और चिकनगुनिया के 110 मामले सामने आए हैं.

जरूरी है बचाव

दिल्ली के तीनों नगर निगम डेंगू-चिकनगुनिया और मलेरिया से बचाव की बातें तो करते हैं लेकिन हकीकत कुछ और है. दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में लोग मच्छरों से परेशान हैं. गुरुग्राम में भी डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया के कई मामले सामने आए हैं.

गुरुग्राम के सिविल हॉस्पिटल में डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों के लिए अलग से 16 बेड का अलग वॉर्ड बनाया गया है. साथ ही 2- 3 फिजिशियन और इनके साथ स्टाफ नर्स तैनाती की गई हैं. ओपीडी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात है. इमरजेंसी वॉर्ड में भी डेंगू और अन्य मौसमी बीमारी से निपटने के लिए विभिन्न अस्पतालों से डॉक्टरों को बुलाया जा रहा है.

सिर्फ वादा या काम भी

गुरुग्राम में प्रशासन की तरफ से भले ही 24 घंटे सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही जा रही हो, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक न कोई हेल्पलाइन नंबर जारी हुआ और न ही कोई प्लानिंग हुई है.

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दिल्ली में भी कमोवेश हाल गुरुग्राम जैसा ही है. एक तरफ जहां दिल्ली सरकार और नगर निगम डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया से रोकथाम के लिए की गई तैयारियों को लेकर अपनी ताल ठोक रही हैं.

वहीं, आकड़ें कुछ और ही बता रहे हैं. इस साल आठ जुलाई तक डेंगू के सबसे अधिक 60 मामले दर्ज हुए हैं जो कि पिछले पांच सालों की तुलना में सबसे अधिक हैं. दिल्ली में सफाई का काम नगर निगम के पास है इसलिए जिम्मेदारी भी निगमों की ज्यादा बनती है. दिल्ली के तीनों नगर निगमों के महापौर डेंगू के बढ़ते मामलों का जायजा लेने के लिए अस्पतालों का दौरा कर रही हैं.

कौन लेगा जिम्मेदारी

फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए दक्षिणी दिल्ली के मेयर कमलजीत सेहरावत कहती हैं, ‘साउथ दिल्ली में हमलोग इस मामले को लेकर अलग-अलग लेवल पर काम कर रहे हैं. एमसीडी की कई टीमें घर-घर जाकर जांच कर रही हैं. हमने एमसीडी कर्मचारियों को रविवार को भी काम पर लगा दिया है.'

सेहरावत ने कहा, 'कई लोग दरवाजा नहीं खोलते हैं. इसके लिए हमने अपने लोगों के लिए ड्रेस कोड और आईकार्ड मुहैया कराए हैं. ताकि लोगों को उनकी एंट्री पर कोई शक नहीं हो.’

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कमलजीत आगे कहती हैं, ‘हमने अपने 200 कर्मचारियों को मच्छरों के लारवा नष्ट करने में लगाया है. सभी 200 कर्मचारियों को टैबलेट दिया गया है ताकि ऑनलाइन शिकायत आने पर तुरंत निपटारा किया जाए. साथ ही एक ऑटो भी चलाया जा रहा है जिसमें लोगों को मच्छरों के प्रजनन के बारे में बताया जा रहा है. इसके लिए हमलोग 10 मिनट का एक वीडियो भी दिखा रहे हैं. कई घरों की छतों पर, बगीचों में पानी जमा हो जाता है, जिसमें भी डेंगू के मच्छर ज्यादा पनपते हैं. उसके लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं.’

क्यों बढ़ रहा है मच्छरों का प्रकोप?

दिल्ली में कई कारणों से मच्छरों का लारवा बढ़ रहा है. मच्छरों से बचाव के लिए एमसीडी लगातार दवाओं का छिड़काव कर रहा है. तमाम कोशिशों के बावजूद मच्छरों पर लगाम नहीं लगाया गया है. एमसीडी की कोशिशों को नकारते हुए कैग ने 2016 में एमसीडी के इस प्रयास को साल 2016 में कैग रिपोर्ट ने खारिज कर दिया था.

रिपोर्ट में कहा गया था कि एमसीडी में मच्छरों की निगरानी बेहतर तरीके से नहीं की गई. नगर निगम ने 42.85 करोड़ रुपए मच्छर रोधी ऐसे उपायों पर खर्च किए गए, जिसे राष्ट्रीय मच्छर जनित बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत स्वीकृत हीं नहीं किया गया था.

दिल्ली में पिछले कुछ सालों से डेंगू और चिकनगुनिया के कारण लगातार मौतें हो रही हैं. हर साल ठोस पहल की बात की जाती है पर आने वाले साल में फिर से वही कहानी दुहराती रहती है.

इस बार के एमसीडी चुनाव में डेंगू और चिकनगुनिया भी बड़ा मुद्दा बना था. 2017 के दिल्ली नगर निगम चुनाव में जनप्रतिनिधियों ने डेंगू और चिकनगुनिया से निजात दिलाने के लिए एक बड़े-बड़े दावे किए थे, जो लगता नहीं इस साल भी पूरे हो पाएंगे.

मच्छर काटने से लोग बीमार होते रहे हैं और मौतें भी होती रहती हैं. नेताओं के बयान भी आते रहते हैं और सीजन खत्म होते ही बयान गायब भी हो जाते हैं. यही सिलसिला लगातार पिछले कुछ सालों से चलता चला आ रहा है जो दिल्ली में एक बार फिर से अगले कुछ दिनों में देखने और सुनने को मिलेगा.

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