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1959 में चीनी सैनिकों की गोलीबारी में शहीदों दी जाएगी श्रद्धांजलि

वर्ष 1959 में शरद तक तिब्बत से लगी 2500 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय पुलिसकर्मियों पर थी

Updated On: Oct 20, 2017 09:41 PM IST

Bhasha

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1959 में चीनी सैनिकों की गोलीबारी में शहीदों दी जाएगी श्रद्धांजलि

1959 में चीनी सैनिकों की गोलीबारी में शहीद हुए पुलिसकर्मियों को एक विशेष कार्यक्रम में श्रद्धांजलि दिया जाएगा.  इसके साथ ही देश की एकता और अखंडता की रक्षा में अपना बलिदान देने वाले 34,400 अन्य जवानों को भी शनिवार को नई दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम में श्रद्धांजलि दिया जाएगा. गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में राष्ट्र 10 पुलिसकर्मियों के साथ ही 34,408 अन्य पुलिसकर्मियों को भी श्रद्धांजलि देगा.

मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि हर साल 21 अक्तूबर को ‘पुलिस स्मृति दिवस’ उन 10 पुलिसकर्मियों की याद में मनाया जाता है जिन्‍होंने 1959 में चीन के साथ लगी भारतीय सीमा की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था.

वर्ष 1959 में तिब्बत से लगी 2500 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय पुलिसकर्मियों पर थी.

कोई कवर नहीं होने के कारण मारे गए थे पुलिसकर्मी 

बयान में कहा गया है कि 20 अक्तूबर 1959 को उत्तर पूर्वी लद्दाख में हॉट स्प्रिंग्स से तीन गश्ती दल एक भारतीय अभियान की तैयारियों के सिलसिले में रवाना हुआ था.

दो दलों के सदस्य हॉट स्प्रिंग्स वापस आ गए. लेकिन तीसरे दल के सदस्य वापस नहीं लौटे. उस दल में दो पुलिस कांस्टेबल और एक पोर्टर भी थे.

लापता लोगों की तलाश में अगले दिन शेष बलों को एकत्र किया गया. उप केंद्रीय खुफिया अधिकारी (डीसीआईओ) रैंक के अधिकारी करम सिंह के नेतृत्व में करीब 20 पुलिसकर्मियों का एक दल घोड़े पर आगे बढ़ा जबकि अन्य लोग पैदल ही तीन हिस्सों में उनके पीछे चले.

बयान के अनुसार दोपहर में, एक पहाड़ी पर तैनात चीनी सैनिकों ने भारतीय दल पर गोलीबारी की और हथगोले फेंके.

कोई कवर नहीं होने के कारण अधिकतर जवान घायल हो गए. 10 बहादुर पुलिसकर्मी शहीद हो गए वहीं सात अन्य घायल हो गए.

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