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आरक्षण की मांग को लेकर शांत पड़े मराठा समुदाय को गुस्सा क्यों आया?

मराठा समुदाय को लगने लगा है कि ये अपनी मांग मंगवाने का सही वक्त है. इसलिए उन्होंने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं

Updated On: Jul 25, 2018 11:15 AM IST

FP Staff

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आरक्षण की मांग को लेकर शांत पड़े मराठा समुदाय को गुस्सा क्यों आया?

मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र उबल रहा है. पिछले दो-तीन दिनों में कई जगहों से विरोध प्रदर्शन की खबरें आई हैं. आज इसी को लेकर मुंबई बंद बुलाया गया है. कई जगहों पर बसें रोकी गई हैं, तोड़फोड़ हुई है. दुकानों को बंद करवाया जा रहा है.

दो साल पहले मराठा आरक्षण को लेकर राज्य के मराठा समुदाय ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया था. मराठा समुदाय की मांग थी कि उन्हें महाराष्ट्र की सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाए. महाराष्ट्र में मराठा समुदाय की कुल 33 फीसदी आबादी है. आबादी के आधार पर ये अपने लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं. इस बार मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक हुआ है.

मराठा समुदाय को लगने लगा है कि ये अपनी मांग मंगवाने का सही वक्त है. इसलिए उन्होंने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं. सरकार के पास मराठा आरक्षण की मांग लंबे समय से पेंडिंग है और मराठा समुदाय को लगता है कि अब अगर उनपर अमल नहीं किया गया तो उनकी मांग ठंडे बस्ते में पड़ी रह जाएगी.

मराठा क्रांति मोर्चा की अगुवाई में एक्टिविस्ट अपनी मांगों को लेकर उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं. वेस्टर्न महाराष्ट्र, मराठावाड़ा और कोंकण के इलाकों में जबरदस्त प्रदर्शन हुए हैं. बीड और नासिक जिले के मराठा सड़कों पर उतरे हैं. औरंगाबाद के गोदावरी नदी में एक युवक ने मांग को लेकर जल समाधि ले ली. इस घटना के बाद राज्य के दूसरे जिलों में भी विरोध प्रदर्शन में तेजी आ गई.

मराठा आंदोलन में हो रही है सियासत

विपक्ष ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन को सरकार के खिलाफ मुद्दा बना लिया है. अब वो फडणवीस से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्ष इसे बीजेपी के खिलाफ बड़ा हथियार बनाने की कोशिश में है. हालांकि मराठा समुदाय के नेता इस बात से इनकार करते हैं.

उनका कहना है कि मराठा आंदोलन में तेजी उस वक्त से आई है जब महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने 20 जुलाई को विधानसभा में मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों में 16 फीसदी का आरक्षण दिलवाने की घोषणा की. सीएम ने कहा था कि एक बार मराठा आरक्षण को लेकर संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन पूरा कर लिया गया तो आरक्षण देने में समस्या नहीं आएगी.

मराठा आरक्षण में पेंच कहां फंसा है ?

मराठा समुदाय अपने लिए अलग से आरक्षण की मांग नहीं कर रहा है. मराठा नेता चाहते हैं कि उनके समुदाय को ओबीसी कैटेगरी में शामिल किया जाए. बिना ओबीसी कैटेगरी में शामिल किए अगर उन्हें अलग से आरक्षण दिया जाता है तो फिर ये कोर्ट कचहरी के मुकदमों में फंस जाएगा. अगर ऐसा होता है तो राज्य में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ऊपर चली जाएगी और इसकी वजह से मराठा आरक्षण को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी. संवैधानिक व्यवस्था के तहत ऐसा संभव नहीं है कि किसी भी राज्य में 50 फीसदी से ऊपर आरक्षण दिया जाए.

इसलिए मराठा समुदाय चाहता है कि उन्हें ओबीसी कैटेगरी में शामिल कर लिया जाए. ऐसा होने पर आरक्षण की सीमा का उल्लंघन भी नहीं होगा और मराठा समुदाय को ओबीसी के लिए दिया जा रहा आरक्षण भी मिल जाएगा. मराठा नेताओं का कहना है कि सरकार अगर चाहे तो विधानसभा में फैसला लेकर मराठा समुदाय को ओबीसी कैटेगरी में डाल सकती है. लेकिन सरकार की नीयत से लगता है कि वो ऐसा करना नहीं चाहती.

हालांकि पिछड़ा वर्ग आयोग मराठा समुदाय को ओबीसी कैटेगरी में डालने पर विचार कर रहा है औऱ इस दिशा में काम चल रहा है. लेकिन मराठा समुदाय अब इसके लिए इंतजार करने को तैयार नहीं है. वो चाहती है कि सरकार जल्द से जल्द फैसला लेकर विधानसभा में बिल लाकर मराठा समुदाय को ओबीसी कैटेगरी में डाल दे. इसके लिए कमीशन की रिपोर्ट का इंतजार करने की जरूरत नहीं है. दरअसल मराठा समुदाय का कहना है कि सरकार जानबूझकर देरी कर रही है. ताकि मराठा आरक्षण के मसले को 2019 के लोकसभा चुनाव तक खींचा जाए और लोकसभा के चुनाव में मराठा समुदाय के वोटबैंक का इस्तेमाल किया जाए.

अभी बैकवर्ड कमिशन राज्य में मराठा समुदाय के सामाजिक आर्थिक हैसियत का अध्ययन कर रही है. मराठा नेताओं का कहना है कि इस दिशा में उनकी गति इतनी धीमी है कि आरक्षण मिलने में वर्षों लग जाएंगे. ये लोग चाहते हैं कि सरकार अपने स्तर पर फैसला ले ले.

फडणवीस सरकार से नाराजगी के पीछे मराठा नेता एक और वजह बताते हैं. वो कहते हैं कि मराठा आरक्षण के मसले पर होने वाली बैठकों में सीएम अपने ऐसे मंत्रियों को भेज देते हैं जिन्हें इस मसले की जानकारी ही नहीं होती है. ये लोग चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से ले.

एक दिक्कत ये भी है कि सरकार को ये पता ही नहीं है कि इस मसले पर मराठा समुदाय के किन नेताओं से बात की जाए. दरअसल मराठा आंदोलन कई जगहों पर हो रहा है और इसमें कई छोटे-छोटे मराठा संगठन शामिल हैं. इनके नेता भी बिखरे हैं. मराठा क्रांति मोर्चा के तले कई सारे संगठन इस मांग को उठा रहे हैं. हालांकि संगठन भी बिखऱे हुए हैं. मराठा नेता ही मान रहे हैं कि हर नेता अपने हिसाब से फैसले ले रहा है जिसकी वजह से कंफ्यूजन की स्थिति पैदा हो जाती है.

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