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छत्तीसगढ़ चुनाव: नक्सलियों के दबदबे वाले इलाके में तेज हुआ संघर्ष

यह पहला मौका है जब नक्सलियों की सीधी कार्रवाई में किसी पत्रकार की मृत्यु हुई है

Updated On: Nov 01, 2018 10:12 PM IST

Team 101Reporters

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छत्तीसगढ़ चुनाव: नक्सलियों के दबदबे वाले इलाके में तेज हुआ संघर्ष

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों की धमक बढ़ने के बाद सूबे में नक्सलियों और राजव्यवस्था के बीच संघर्ष तेज हो गया है. संघर्ष में विशेष तेजी बस्तर संभाग में नक्सलियों के दबदबे वाले दंतेवाड़ा, बीजापुर तथा सुकमा में आई है.

मंगलवार को दंतेवाड़ा जिले में अरनपुल पुलिस थाने के नीलवाया जंगल में नक्सलियों ने एक पुलिस दल पर घात लगाकर हमला किया. दूरदर्शन के तीन पत्रकार इस पुलिस दल के साथ थे. गोलीबारी में दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू, सब-इंसपेक्टर रुद्रप्रताप सिंह और असिस्टेंट कांस्टेबल मंगलराम शहीद हो गए. पूर्व से ही नियोजित जान पड़ने वाले इस हमले में दूरदर्शन के एक रिपोर्टर और दो अन्य कांस्टेबल घायल हुए हैं.

हमले में लगभग 100 सशस्त्र नक्सलियों ने भाग लिया. हमलावरों ने पुलिस दल पर ग्रेनेड फेंका लेकिन ग्रेनेड फटे नहीं. सहायता के लिए सुरक्षा बलों के आने के बाद नक्सलियों को अपना कदम पीछे खींचना पड़ा. जिस सड़क पर पुलिस दल पर हमला हुआ उसपर निर्माण-कार्य चल रहा था. सो, सड़क सिर्फ दोपहिया वाहनों के ही चलने लायक बन पाई है. पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिंहा का कहना है कि एक एके-47 रायफल और एक वाकी-टाकी मौका-ए-वारदात से गायब है.

यह पहला मौका है जब नक्सलियों की सीधी कार्रवाई में पत्रकार की मौत हुई है

नक्सलियों की सीधी कार्रवाई में पत्रकार के मारे जाने की यह पहली घटना है. इससे पहले बस्तर के इलाके में चलन कुछ अलग ही रहा है. खनन तथा निर्वनीकरण की गतिविधियों की मुखालफत करते हुए आदिवासियों के हितों की तरफदारी में रिपोर्टिंग करने के कारण पत्रकार हमेशा पुलिस और प्रशासन का कोपभाजन बनते थे. खनन और निर्वनीकरण का मुद्दा नक्सलियों के प्रचार-तंत्र से मेल खाता है.

एंटी नक्सल ऑपरेशन के विशेष पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने घटना के बाद एक प्रेस-सम्मेलन में कहा कि सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच 50 मिनट तक मुठभेड़ चली और इस मुठभेड़ का रिश्ता सूबे में होने जा रहे चुनावों से नहीं है. उन्होंने बताया कि हमला सुनियोजित था, नक्सलियों ने एक चेतावनी जारी की थी कि अरनपुर इलाके में सड़क ना बनाई जाए.

बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों की बढ़ी हुई तैनाती और उनके लगातार जारी अभियानों के कारण माओवादियों को घने जंगलों में भागने पर मजबूर होना पड़ा है लेकिन अरनपुर के इलाके में नक्सलियों की गतिविधियां अपने चरम पर हैं. अरनपुर दंतेवाड़ा से तकरीबन 60 किलोमीटर और जगरगोंडा से 14 किलोमीटर दूर है. जगरगोंडा से अरनपुर तक आने के लिए सुकमा तथा द्रोणपाल होकर कुल 172 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है क्योंकि दो गावों के बीच के पूरे इलाके में नक्सलियों ने बारुदी सुरंग बिछा रखी है.

नक्सल प्रभावित इलाकों में पैठ बनाते लोकतंत्र से चिढ़े हुए हैं माओवादी

इस चुनाव में नीलवाया गांव में बीते दो दशकों में पहली बार मतदान केंद्र स्थापित होने जा रहा है. इस गांव के लोगों ने आखिरी बार 1998 में वोट डाला था. बीते वक्त में जिन गांवों में एक भी वोट नहीं पड़ा और जिन गांवों में आदिवासियों को वोट डालने के लिए लगातार प्रेरित और जागरुक करने के प्रयास चल रहे हैं उनको लेकर हाल-फिलहाल पत्रकारों ने स्टोरिज की हैं. दंतेवाड़ा में दूरदर्शन की टोली के पहुंचने से पहले इस इलाके से तणिमा बिस्वास ने मिरर नाऊ के लिए रिपोर्टिंग की थी. उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग में उन गांवों का जिक्र किया था जहां पहली बार मतदान केंद्र बनाए जा रहे हैं.

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि नक्सलियों ने नीलवाया को लेकर पत्रकारों में जारी रुझान को भांप लिया होगा क्योंकि जागरुकता बढ़ाने और नक्सल प्रभावित इलाकों में पैठ बनाते लोकतंत्र के चलन को मीडिया में तवज्जो देने की कोशिशें हो रही थीं जबकि इसके उलट माओवादी पर्चे बांटकर और संदेशों को पेंट से लिखकर अपील कर रहे थे कि चुनावों का बहिष्कार किया जाए.

दूरदर्शन के तीन पत्रकार चालीस पुलिसकर्मियों के एक दल के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर सबसे आगे चल रहे थे. दूरदर्शन के कैमरामैन साहू सब-इंस्पेक्टर रुद्रप्रताप के साथ एक मोटरसाइकिल पर सबसे आगे थे. पुलिस का कहना है कि पहली गोली उन्हीं को लगी.

फेसबुक पोस्ट लगाने के चंद घंटे के भीतर गोलियों का शिकार हो गए अच्युतानंद

फेसबुक पर दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू की जो अंतिम पोस्ट मौजूद है उसमें उन्होंने तस्वीरों और वीडियो का एक कोलॉज लगाया है. इसमें उन्होंने अपनी ‘इलेक्शन यात्रा’ के दौरान बस्तर संभाग की खूबसूरती को दिखाने की कोशिश की है. पोस्ट लगाने के चंद घंटे के भीतर ही वे गोलियों के शिकार हो गए. उस वक्त वे अरनपुर के इलाके में चल रहे विकास-कार्यों को शूट कर रहे थे. साहू के फेसबुक पोस्ट पर मंगलवार के दोपहर से शोक-संदेशों का तांता लगा है.

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में कांकेड़, नरायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, दंतेवाड़ा,बस्तर और सुकमा नाम के सात प्रशासनिक जिले हैं. यह संभाग पत्रकारों के लिए खास परेशानी का सबब साबित हुआ है. कई पत्रकारों को माओवादियों के पक्ष की स्टोरी करने के कारण सूबे के अधिकारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी है और उन्हें खुद भी ‘नक्सल’ कहकर पुकारा गया है. इस इलाके में काम करने से जुड़े जोखिम के कारण कई लोगों को प्रदेश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है. लेकिन यह पहला मौका है जब किसी पत्रकार को माओवादियों ने अपने सीधे हमले में शिकार बनाया.

डिप्लोमेट के लिए दक्षिण-एशियाई मामलों पर लिखने वाले पुलित्जर फेलो सिद्धार्थ रॉय के साथ रिपोर्टिंग के एक असाइमेंट के लिए नरायणपुर की यात्रा कर रहे पत्रकार कमल शुक्ल और एक कैमरामैन को सीआरपीएफ ने इस माह की शुरुआत में कुरुसनार के अपने कैम्प में रोक लिया था. पत्रकारों का यह दल आदिवासी इलाके में कोकराझार पुलिस सीमा से घुसा था. सिद्धार्थ रॉय के मुताबिक उन्हें और उनके साथियों को एक रात जंगल में बितानी पड़ी क्योंकि कनेक्टिविटी अच्छी नहीं थी और उस दिन आदिवासियों के त्योहारी उत्सव चल रहे थे. पत्रकारों के इस दल से पूरे आठ घंटे तक पूछताछ हुई. सुरक्षा बलों ने उनके टेप कॉपी करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया.

शंकर सुकमा, ऋषि भटनागर तथा हितेश शर्मा से हासिल सहयोगी जानकारी के आधार पर लिखी गई रिपोर्ट.

( इस रिपोर्ट के लेखक-गण जमीनी स्तर के संवाददाताओं के अखिल भारतीय नेटवर्क 101Reporters.com के सदस्य हैं)

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