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भारत में हाई ब्लडप्रेशर से होती हैं लाखों मौतें, फिर भी इलाज क्यों नहीं कराते लोग?

हाई ब्लडप्रेशर को अक्सर एक मूक हत्यारा कहा जाता है क्योंकि यह बिना लक्षणों के आता है

FP Staff Updated On: Jun 07, 2018 01:53 PM IST

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भारत में हाई ब्लडप्रेशर से होती हैं लाखों मौतें, फिर भी इलाज क्यों नहीं कराते लोग?

2017 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, हाइपरटेंशन या हाई ब्लडप्रेशर, 10 में से तीन भारतीयों पर असर डाल रहा है. यही नहीं, देश में होने वाले सभी मौतों में से 17.5 फीसदी मौत हाई ब्लडप्रेशर की वजह से ही होती हैं.

2016 में, मृत्यु और अक्षमता के लिए हाई ब्लडप्रेशर चौथा सबसे बड़ी कारण था. ये भारत में 1.6 मिलियन से अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार था. यह आंकड़ा मॉरीशस की आबादी से ज्यादा और भूटान की आबादी के दोगुने से भी ज्यादा है. यह आंकड़े वॉशिंगटन स्थित ‘इन्स्टिटूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड एवोल्युशन’ द्वारा तुलना किए गए ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डीजिज’ डेटा के हैं.

कुपोषण, वायु प्रदूषण, खाने में फलों, सब्जियों और अनाज की कमी और नमक और तेल-घी की अधिक मात्रा भारत में मौत और विकलांगता के तीन सबसे बड़े कारण हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि हाई ब्लड प्रेशर का इलाज करना आसान है, लेकिन ज्यादातर भारतीय समस्या से अनजान हैं और कुछ ही लोगों में इसे नियंत्रण में रख पाते हैं.

हाई ब्लडप्रेशर को अक्सर एक मूक हत्यारा कहा जाता है क्योंकि यह बिना लक्षणों के आता है. लगातार हाई ब्लडप्रेशर दिमाग, दिल और गुर्दे जैसे प्रमुख अंगों को प्रभावित करता है. यह समय से पहले मौत का एक प्रमुख कारण है. 2013 में दुनिया भर में इससे 9.4 मिलियन मौतें हुई हैं. 2016 में, दिल की बीमारी के कारण सभी मौतों में से 53.8 फीसदी के लिए हाई ब्लडप्रेशर जिम्मेदार था. वहीं स्ट्रोक से हुई मौतों में से 55.7 फीसदी और पुरानी गुर्दे की बीमारी के कारण मृत्यु में से 54.3 फीसदी मौतों के लिए भी हाई बल्डप्रेशर ही जिम्मेदार है.

‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव का कहना है, 'हाइपरटेंशन या हाई ब्लडप्रेशर भारत में समय से पहले मौत के प्रमुख कारणों में से एक है. यह सभी स्ट्रोक के 29 फीसदी और भारत में 24 फीसदी दिल के दौरे के लिए सीधे जिम्मेदार है.'

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केवल 10 फीसदी ग्रामीण, 20 फीसदी शहरी भारतीयों का बीपी नियंत्रण में

हृदय रोग, डायबिटीज , पुरानी कोई सांस की बीमारी, कैंसर जैसी अन्य बीमारियां भारत में 60 फीसदी मौतों का कारण बनती हैं, उनमें से 55 फीसदी की मौत समय से पहले होती है.

एनजीओ विश्व आर्थिक मंच के मुताबिक, इन बीमारियों के कारण 2012 और 2030 के बीच भारत को 4.5 ट्रिलियन डॉलर (311 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हो सकता है. 1 अप्रैल, 2018 तक यह नुकसान 2.8 ट्रिलियन डॉलर (187 लाख करोड़ रुपए) के भारत के 2018 के सकल घरेलू उत्पाद का डेढ़ गुना है. शहर में 33 फीसदी प्रसार और ग्रामीण भारत में 25 फीसदी प्रसार के साथ यह अनुमान है कि 29.8 फीसदी भारतीयों में हाई ब्लडप्रेशर है.

इनमें से 25 फीसदी ग्रामीण और 42 फीसदी शहरी भारतीय अपने हाई ब्लडप्रेशर के बार में जानते हैं. इसके के लिए 25 फीसदी ग्रामीण और 38 फीसदी शहरी भारतीयों का इलाज किया जा रहा है.

‘पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ (पीएचएफआई) के उपाध्यक्ष और सेंटर फॉर क्रॉनिक डीजिज कंट्रोल के कार्यकारी निदेशक, दोरायराज प्रभाकरन ने एक कार्यक्रम में कहा, 'ग्रामीण इलाकों में, कुछ अध्ययनों से पता चला है कि उनमें से 10 फीसदी हाई ब्लडप्रेशर से पीड़ित होने के बारे में जानते हैं और उनमें से केवल 7 फीसदी इसे नियंत्रित करने में सक्षम हैं.'

उन्होंने आठ देशों का उदाहरण दिया, जो भारत से निचले स्तर पर थे. भारत में केवल 24 फीसदी ही हाई ब्लडप्रेशर से अवगत थे, उनमें से 20 फीसदी का इलाज किया गया था और केवल 6-10 फीसदी  नियंत्रण में था.

क्यों कुछ ही लोग उच्च बीपी को नियंत्रित कर पाते हैं

उच्च रक्तचाप का इलाज सामान्य सस्ती दवाओं के साथ किया जा सकता है, फिर भी अनुपालन एक समस्या है. वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग के निदेशक और हाइपरटेंशन जर्नल के संपादक, सी वेंकटटा एस राम कहते हैं, 'अक्सर रोगी यह सोच कर कि वे ठीक हो गए हैं, हाई ब्लडप्रेशर की दवाओं को रोकने का फैसला कर लेते हैं, जो खतरनाक हो सकते हैं.' विशेषज्ञों ने हाई बल्डप्रेशर  को रोकने और नियंत्रित करने में जीवन शैली में संशोधन के महत्व पर जोर दिया है.

नमक को कम करना, शराब और तंबाकू से बचना, शरीर के वजन को नियंत्रित करना, नियमित व्यायाम करना, अधिक फल और सब्जियां खाना- आहार और जीवनशैली में परिवर्तन हाई ब्लडप्रेशर को कम कर सकता है. प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे कि जाम, केचप और चिवडा जैसे नमकीन स्नैक्स से बचने की सिफारिश की गई है.

भार्गव ने अचार, पापड़ और चटनी, जो अक्सर भारतीय भोजन में इस्तेमाल होते हैं, उनसे दूर रहने की सलाह देते हैं. एक औसत भारतीय प्रतिदिन 10.98 ग्राम नमक खपत करता है.

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18 साल से ऊपर के भारतीयों की जांच की जरूरत है 

चूंकि हाई ब्लडप्रेशर लक्षण नहीं पैदा करता है, इसलिए सभी वयस्कों के लिए आवधिक स्क्रीनिंग इसे पहचानने का एकमात्र तरीका है. प्रभाकरन ने कहा कि लक्ष्य 18 साल से ऊपर के करीब 1 मिलियन भारतीयों को स्क्रीन करना है, जिनकी अभी तक जांच नहीं की गई है. सरकार गैर-संक्रमणीय बीमारियों (एनसीडी) की राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण मिशन जैसी योजनाओं के साथ नवीनीकृत ध्यान के माध्यम से समुदायों की जांच कर रही है.

स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के उप सहायक महानिदेशक मनस प्रतिम रॉय कहते हैं, 'पहले से ही 2500 एनसीडी क्लीनिक हैं, जिन्होंने अब तक 2.25 करोड़ (22.5 मिलियन) लोगों की जांच की है और 12 फीसदी हाई ब्लडप्रेशर से पीड़ित हैं.'

(स्वागता यदवार की इंडिया स्पेंड के लिए रिपोर्ट)

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