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सीएम हों या पीएम, पद छोड़ने के बाद बंगला भी खाली करना होगा

अगर सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट पर मुहर लगा देता है, तो संभव है कि आने वाले दिनों में देश के कई पूर्व शीर्ष नेताओं को अपना सरकारी बंगला खाली करना पड़े

Updated On: Jan 07, 2018 03:14 PM IST

FP Staff

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सीएम हों या पीएम, पद छोड़ने के बाद बंगला भी खाली करना होगा

क्या पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, एचडी देवगौड़ा और मनमोहन सिंह को जल्द ही सरकारी आवास छोड़ना पड़ सकता है?

भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रह्मण्यम ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अपनी रिपोर्ट सौंपी है. अगर सुप्रीम कोर्ट इसपर मुहर लगाता है, तो संभव है कि आने वाले दिनों में देश के कई पूर्व शीर्ष नेताओं को अपना सरकारी बंगला खाली करना पड़े.

दरअसल, उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव सरकार ने एक कानून बनाया था. इस कानून के तहत राज्य के सभी पूर्व सीएम को सरकारी बंगला मिलेगा. एनजीओ 'लोक प्रहरी' ने इस फैसले के खिलाफ पीआईएल दायर किया था.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच ने 23 अगस्त 2017 को पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम को इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था. जस्टिस गोगोई और जस्टिस आर. भानुमति की बेंच 16 जनवरी को इस मामले पर सुनवाई करेगी.

बेंच ने क्या कहा था?

बेंच ने इस मामले की पिछली सुनवाई में कहा था, 'इस पीआईएल में जो सवाल उठाए गए हैं, वो जनता के हित से जुड़े हैं. इसका असर दूसरे राज्यों और केंद्र पर भी पड़ सकता है. ऐसे में इस मामले की गहराई तक जाने और पीआईएल में जो फैक्ट बताए गए हैं, उनकी जांच की जरूरत है.' बेंच ने एमीकस क्यूरी सुब्रह्मण्यम को इस मामले पर अपनी रिपोर्ट देने को कहा था.

Gopal Subhramaniam Submission by Saad Bin Omer on Scribd (साभार लाइव लॉ.इन)

इसके पहले पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम के निधन के बाद कृष्णा मेनन मार्ग पर बंगला नंबर 6 को बाबू जगजीवन राम नेशनल फाउंडेशन बना दिया गया. दिल्ली में ऐसे कई स्मारक हैं, जिनके नाम पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के नाम पर रखे गए हैं.

पद छोड़ने के बाद ना मिले सुविधाएं

एमीकस क्यूरी के मुताबिक, 'पद (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आदि) छोड़ने के बाद ऐसे शीर्ष नेताओं को सरकारी ऑफिस की तरह सरकारी आवास भी खाली कर देना चाहिए. क्योंकि, पद से मुक्त होने के बाद वे आम भारतीय नागरिक हो जाते हैं. ऐसे में उन्हें अन्य आम नागरिकों से ज्यादा सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए.'

 

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