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मणिपुर: गिरफ्तारी के बाद पत्रकार ने कहा- आखिरी सांस तक न्याय के लिए लड़ूंगा

कैदी वैन से नीचे उतरने से पहले ही वांगखेम ने बीजेपी सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरु कर दी और मणिपुर सरकार के 'तानाशाही शासन' को उखाड़ फेंकने का आग्रह किया

Updated On: Dec 22, 2018 09:04 PM IST

FP Staff

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मणिपुर: गिरफ्तारी के बाद पत्रकार ने कहा- आखिरी सांस तक न्याय के लिए लड़ूंगा

नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत अपनी नजरबंदी की निंदा करते हुए पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम ने शनिवार को कहा कि वह अपनी आखिरी सांस तक न्याय के लिए लड़ेंगे. वांगखेम को जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (JNIMS) अस्पताल में नियमित चिकित्सा जांच के लिए लाया गया था. यहीं पर उन्होंने पत्रकारों से बात की.

वांगखेम ने कहा, 'एनएसए के तहत मेरी नजरबंदी मनमाना है. मेरे ऊपर लगाए गए आरोप निराधार हैं, वे मुझे सरकार के खिलाफ आवाज उठाने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. मैं न्याय पाने के लिए हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपनी आखिरी सांस तक लड़ूंगा.'

एनडीटीवी के अनुसार वांगखेम ने इंफाल में राज्य सरकार द्वारा झांसी की रानी की जयंती मनाने के लिए बीजेपी के नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार की आलोचना करते हुए एक वीडियो अपलोड किया था. इसके बाद 20 नवंबर को उन्हें इंफाल पश्चिम पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था.

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उन्होंने कथित तौर पर मणिपुर की बीजेपी सरकार और आरएसएस के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था और मणिपुर के मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों की 'कठपुतली' कहा था.

26 नवंबर को हालांकि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इम्फाल वेस्ट ने किशोरचंद्र के वीडियो को केवल अभिव्यक्ति करार देते हुए उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था.

27 नवंबर को उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया:

लेकिन बाद में 27 नवंबर को उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया और 14 दिसंबर को राज्य सरकार ने एनएसए सलाहकार बोर्ड की मंजूरी के बाद किशोर को एनएसए के तहत एक साल के लिए हिरासत में रखने का आदेश जारी किया.

कैदी वैन से नीचे उतरने से पहले ही वांगखेम ने बीजेपी सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरु कर दी और मणिपुर सरकार के 'तानाशाही शासन' को देखते हुए उन्होंने लोगों से एकजुट होने और ऐसी सरकार को उखाड़ फेंकने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा, 'अगर हम सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते हैं, तो, यह दर्शाता है कि देश में कोई लोकतंत्र नहीं है. मुझे सरकार के खिलाफ बोलने के लिए एनएसए के तहत गिरफ्तार करना हिटलर के समय में उचित था.'

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