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छत्तीसगढ़ः जानिए कौन हैं पीएम मोदी से बात करनेवाली महिला किसान चंद्रमणि

कांकेर जिला मुख्यालय से 17 किमी दूर कन्हारपुरी गांव की रहनेवाली महिला किसान चंद्रमणि कौशिक एक महिला समूह के साथ जुड़ी हुई हैं

Anand Dutta Updated On: Jun 20, 2018 07:04 PM IST

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छत्तीसगढ़ः जानिए कौन हैं पीएम मोदी से बात करनेवाली महिला किसान चंद्रमणि

बुधवार को पीएम मोदी ने देशभर के किसानों संग बात की. इस कड़ी में सबसे पहले वह छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले की एक महिला किसान से रू-ब-रू हुए. वह इतनी बेबाकी से बात कर रही थीं कि मुस्कुराते हुए पीएम मोदी ने पूछा कि वह कितनी पढ़ी-लिखी हैं? इसपर उस महिला ने कहा सर, आठवी पास हूं. पीएम इस महिला किसान के आत्मविश्वास, बीच-बीच में अंग्रेजी शब्द का इस्तेमाल से दंग रह गए. आइए जानते हैं कौन हैं यह महिला...

कांकेर जिला मुख्यालय से 17 किमी दूर कन्हारपुरी गांव की रहनेवाली महिला किसान चंद्रमणि कौशिक एक महिला समूह के साथ जुड़ी हुई हैं. वह मिलकर सीताफल (शरीफा) की खेती अपने दो एकड़ की जमीन में कर रही हैं. फ़र्स्टपोस्ट से बात करते हुए चंद्रमणि ने बताया कि पहले वह इन दो एकड़ जमीन में धान की खेती करती थी. जिससे उन्हें 15-20 हजार रुपए का फायदा हो पा रहा था. पति डोमार सिंह कौशिक भी इस काम में साथ दे रहे थे. इस इलाके में बड़ी संख्या में किसान शरीफा उपजाते थे, लेकिन स्थानीय बाजारों में बेचने के अलावा उससे और कोई लाभ नहीं था. इसके बाद उन्होंने उस दो एकड़ में शरीफा ही उगाने का फैसला किया.

'जय प्रगति महिला सीताफल उत्पादक एवं मूल्य संवर्धक' नाम से एक महिला समूह की स्थापना की. साल 2016 में इस समूह को कृषि विभाग की 'आत्मा परियोजना' के अंतर्गत ने प्रशिक्षण देना शुरू किया. इन्हें सीधे दिल्ली सहित देश के अन्य बड़े बाजारों से जोड़ा गया, जहां इनकी फसल महंगे दामों में बिकने लगी. इसके साथ-साथ उसके पल्प (गूदा) को अलग से बेचने लगीं, जो छिलका बच जाता था, उससे अब जैविक खाद बनाने लगी हैं. 'आत्मा' की तरफ से उन्हें आइसक्रीम बनाने का भी प्रशिक्षण दिया गया. सरकार ने इसके साथ ही उनके समहू को चार डीप फ्रिजर, पल्प निकालने की मशीन, आइसक्रीम बनाने की मशीन मुफ्त में उपलब्ध कराया. आलम ये है कि अब इस महिला समूह को सालाना दो लाख से अधिक का फायदा हो रहा है.

तीन बच्चों की मां आठवीं पास चंद्रमणि ने बताया कि छिलके से बने जैविक खाद का इस्तेमाल पिछले साल प्याज की खेती में इस्तेमाल किया गया. परिणाम यह हुआ कि उसका आकार पहले से बहुत बढ़ गया, जिससे उन्हें फायदा हुआ. इस बार उस खाद को धान की खेती में इस्तेमाल किया गया है. इसे समूह के किसानों को ही मुहैया कराया जा रहा है. साथ ही अगर बाहर का कोई लेना चाहे तो उसे दस रुपए प्रति किलो बेचा जा रहा है.

झारखंडः गंदूरा उरांव साल में कमाते हैं सात से आठ लाख रुपए

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गंदूरा उरांव अपनी किसानी की वजह से आज पूरे झारखंड में पहचाने जाने लगे हैं. रांची से लगभग 40 किमी दूर मांडर प्रखंड के गुरुगुड़ गांव में इस वक्त टमाटर की फसल लहलहा रही है. धान के बीज तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. गंदूरा उरांव बताते हैं कि पिछले तीन सालों से वह हर साल 7-8 लाख रुपए सलाना कमा रहे हैं. यह मूलधन के अलावा की कमाई है.

उनके मुताबिक खेती तो वह साल 2012 से कर रहे हैं. लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ पिछले दो सालों में सबसे अधिक उठाया है. कुल आठ एकड़ में खेती करने के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी पर पंपसेट लिया, हल टैक्ट्रर के लिए 35,000 रुपए मिले, ड्रिप एरिगेशन के लिए सरकार ने 90 प्रतिशत अनुदान दिया. हाल ही में 50 प्रतिशत अनुदान पर दो गाय उन्होंने खरीदी हैं.

उन्होंने बताया कि सबसे अधिक फायदा ड्रिप एरिगेशन (टपक सिंचाई) की तकनीक की वजह से हुआ है. इस वक्त बीज उत्पादन से तीन किसान समूहों के 40 से अधिक किसान जुड़ गए हैं, वहीं 10 किसान फूल की खेती से. और तो और सब्जी की खेती से लगभग पूरा गांव ही जुड़ चुका है. हाल ही में सरकार ने उनके काम को देखते हुए लगभग 25 एकड़ में ड्रिप एरिगेशन के लिए मदद करने जा रही है. हालांकि वो ये बात साफ स्वीकारते हैं कि अभी तक पूरी तरह जैविक खाद का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. लेकिन धीरे-धीरे वह इसकी तरफ मुड़ रहे हैं. सब्जियों के अलावा फूल, बीज आदि का उत्पादन करते हैं.

बिहारः जैविक खेती अपनाते ही बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

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बिहार के नालंदा जिले का चीन के साथ कनेक्शन सदियों पुराना है. यह किसी न किसी बहाने आज भी एक दूसरे से जुड़ जाता है. अब देखिये बिहार के किसान ने चीन के किसान को मात देकर विश्व रिकॉर्ड बनाया. वह भी धान की खेती में. नालंदा जिले के दरवेशपुर गांव के किसान सुमंत कुमार एक हेक्टेयर खेत में कुल 22.4 टन धान का उत्पादन कर दुनियाभर के किसानों के बीच चर्चा का विषय बन चुके हैं.

इससे पहले चीन के फादर ऑफ राइस और कृषि वैज्ञानिक युआन लोंगपिंग ने एक हेक्टेयर में 19.4 टन धान की पैदावार की थी. सुमंत ने बताया कि उन्होंने रासायनिक खाद का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया. इसके साथ ही श्रीविधि तकनीक से खेती की. इसी गांव के अन्य किसानों ने भी इसी तकनीक को अपनाकर रिकॉर्ड पैदावार करने में सफलता हासिल की है.

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