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#LetAvniLive: 'अवनी' के आदमखोर होने के मिले सबूत , फिर भी बचाने की मुहिम जारी

अफसोस की बात यह है कि बाघिन शिविर के नजदीकी सड़क पर चलती हुई सरती गांव की ओर बढ़ गई है. गांव से लगभग 200 मीटर की दूरी पर उसके पैरों के निशान पाए गए हैं

Updated On: Oct 18, 2018 02:00 PM IST

FP Staff

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#LetAvniLive: 'अवनी' के आदमखोर होने के मिले सबूत , फिर भी बचाने की मुहिम जारी
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बॉम्बे हाईकोर्ट के नागपुर बेंच ने जैसे ही जंगल विभाग के अधिकारियों से यह सवाल किया कि पंधारकवडा की आदमखोर बाघिन अवनी ने बीते 28 अगस्त से कोई शिकार क्यों नहीं किया, उसके दूसरे ही दिन गांव के एक किसान ने उसे शिकार करते हुए देखा. सरती गांव स्थित जंगल विभाग के करीब घूमती हुई बाघिन की फुटेज बीते मंगलवार को कैमरे में कैद हुई है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर अनुसार बीते बुधवार सुबह 10 बजे विठ्ठल ठाकरे नाम के किसान ने बाघिन अवनी को उसकी गाय का शिकार करते देखा था. इसके तुरंत बाद वह वन विभाग के कैंप पहुंचा और इसकी सूचना अधिकारियों को दी. अधिकारियों में से एक वेटनरी डॉक्टर रवि खोबरागडे, शूटर शफत अली खान और उनकी टीम विठ्ठल के साथ मौके पर पहुंची तो बाघिन बड़ी ही क्रूरता से उनपर हमला करने को तैयार खड़ी थी. ऐसे में उसे ट्रैंक्यूलाइज कर पाना मुश्किल था.

डर की बात यह है कि बाघिन शिविर के नजदीकी सड़क पर चलती हुई सरती गांव की ओर बढ़ गई है. गांव से लगभग 200 मीटर की दूरी पर उसके पैरों के निशान पाए गए हैं. इसका मतलब है कि अधिकारियों द्वारा रणनीतिक रूप से गश्त कम करने और उस पर कम नजर रखने के बाद बाघिन अपने आक्रामक रूप में वापस आ सकती है.

फिर से खूंखार हो सकती है आदमखोर बाघिन

ऐसे में एक बार फिर परिस्थितियों में अनिश्चिता बन सकती है क्योंकि गांव के किसान रात में ही अपने खेतों में पानी डालने जाते हैं. बीते सोमवार को अंजी गांव के पास एक ट्रैकिंग टीम ने अवनी के बच्चों में से एक को देखा थे.

हाईकोर्ट भी उस आदेश के बारे में जानना चाहता है जिसमें बाघिन और उसके बच्चों को पकड़ने या गोली मारने की छूट को गुरुवार तक रोक दिया गया था और सवाल पूछा गया था कि आखिर आदमखोर बाघिन इन दिनों शिकार क्यों नहीं कर रही?

महाराष्ट्र का यवतमाल जिला पिछले कुछ समय से बाघिन के खौफ में जी रहा है. पिछले कुछ समय में यह बाघिन 13 लोगों का शिकार कर चुकी है. इसकी तलाश के लिए लगभग अब तक 200 से अधिक रेंजर्स को तैनात किया जा चुका है हालांकि फिर भी कोई सफलता हासिल नहीं हुई है. बाघिन अवनी ने इंसान का पहला शिकार जून 2016 में किया, जिसके बाद अगस्त 2018 तक 13 लोगों को उसने मारा.

इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने वन विभाग को बाघिन को पकड़ कर ट्रैंक्यूलाइज करने के अलावा किसी खास परिस्थिती में गोली मारने तक की इजाजत दी थी. इस फैसले के बाद देशभर में सेव अवनी  की मुहिम शुरू हो गई. कई एक्टिविस्टों ने हाईकोर्ट के पैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. जिसे सुप्रीम कोर्टने खारिज कर दिया. इसके बावजूद अभी भी बेंगलुरू में सेव अवनी, #LetAvniLive मुहिम जारी है.

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