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किसानों को कम ब्याज दर पर 7,000 करोड़ रुपए कर्ज उपलब्ध कराएगी ममता सरकार

अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों पर नजर रखते हुए पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने किसानों को सस्ती ब्याज दर पर कृषि ऋण आवंटित करने का फैसला किया है

Updated On: Nov 16, 2018 10:01 PM IST

Bhasha

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किसानों को कम ब्याज दर पर 7,000 करोड़ रुपए कर्ज उपलब्ध कराएगी ममता सरकार

अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों पर नजर रखते हुए पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने किसानों को सस्ती ब्याज दर पर कृषि ऋण आवंटित करने का फैसला किया है.

पश्चिम बंगाल के सहकारिता मंत्री अरूप रॉय ने शुक्रवार को कहा कि ममता बनर्जी सरकार ने दो प्रतिशत की निम्न ब्याज दर पर 7,000 करोड़ रुपए का ऋण बांटने का फैसला किया है. कृषि ऋण पर ब्याज दर को मौजूदा चार प्रतिशत से कम किया गया है.

अरुप रॉय ने पीटीआई-भाषा को बताया कि अगले साल मार्च से पहले यह ऋण सहकारी बैंकों और सोसायटियों के जरिए वितरित किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को मिली शिकायतों के बाद कदम उठाया गया. शिकायतों में कहा गया कि किसानों को या तो कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है या वाणिज्यिक बैंकों से ऋण नहीं मिल रहा है.

राज्य सरकार इस सस्ती कृषि ऋण के कारण आने वाले वित्तीय बोझ को संभालने में मदद करेगी

उन्होंने कहा, 'कृषि ऋण की मात्रा पिछले साल के 5,200 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 7,000 करोड़ रुपए की गई है, जो 34 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है. ब्याज दर भी चार प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत कर दी गई है.' राज्य सहकारिता विभाग के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा कि कई प्रयासों के बावजूद, राज्य सरकार 710 ग्राम पंचायत क्षेत्रों में बैंक शाखाएं स्थापित नहीं कर पाई और इसलिए सहकारी समितियों को बैंक के रूप में कार्य करने की अनुमति देने का फैसला किया गया.

इस आईएएस अधिकारी ने कहा, 'और इसी के कारण, हमने 2,661 सहकारी समितियों को सहकारी बैंकों की शाखाओं के रूप में कार्य करने की अनुमति देने का निर्णय लिया है. इससे बैंकिंग तंत्र के दायरे में अधिक किसानों को लाने में मदद मिलेगी.' उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस सस्ती कृषि ऋण के कारण आने वाले वित्तीय बोझ को संभालने में मदद करेगी.

विपक्षी वाम मोर्चा ने सितंबर में बीरभूम जिले में एक मार्च का आयोजन किया था जिसमें किसानों के लिए कृषि ऋण माफी और बैंकों से आसान ब्याज दर वाले ऋण की मांग की गई थी.

अधिकारी ने कहा कि राज्य ने सहकारी बैंकों और सोसायटियों के माध्यम से स्व-सहायता समूहों के लिए 1,200 करोड़ रुपए के ऋण को बांटने का भी फैसला किया है, और कहा कि पिछले साल यह राशि 1000 करोड़ रुपए थी.

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