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'गृहलक्ष्मी' की 'ब्रेस्टफीडिंग' के खिलाफ दायर याचिका केरल हाईकोर्ट से खारिज

कोर्ट ने कहा, भारतीय कला ने हमेशा मनुष्य के शरीर को खूबसूरती से दर्शाया है. चाहे वो कामसूत्रा हो, राजा रवि वर्मा की पेंटिंग या अजंता की मूर्तियां हों

Updated On: Jun 21, 2018 05:37 PM IST

FP Staff

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'गृहलक्ष्मी' की 'ब्रेस्टफीडिंग' के खिलाफ दायर याचिका केरल हाईकोर्ट से खारिज
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'गृहलक्ष्मी' पत्रिका के खिलाफ दायर एक याचिका को केरल हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. मामला मार्च, 2018 का है जिसमें पत्रिका के मलयालम एडिशन ने अपनी कवर स्टोरी ब्रेस्टफीडिंग पर की थी. कवर पेज पर मलयालम की मशहूर अभिनेत्री गिलू जोज़फ को ब्रेस्टफीडिंग कराते दिखाया गया था. उस तस्वीर के साथ पत्रिका ने हेडलाइन दी थी- 'माताएं केरल को कह दो ना घूरे, हमारा ब्रेस्टफीड कराना जरूरी है.'

मैगजीन छपने के एक हफ्ते बाद ही सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया. इस तस्वीर को कामुकता बढ़ाने वाला और धार्मिक-सांप्रदायिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कहा जाने लगा. यहां तक की केरल की कोल्लम सीजेएम कोर्ट में मुकदमा भी दर्ज हो गया .मामले में याचिका दायर करने वाले वकील विनोद मैथ्यू विल्सन का कहना था कि ये तस्वीर कामुकता वाली है और महिला की गरिमा को नीचा दिखाती है.

तस्वीर का विरोध करने वाले कई लोगों की आपत्ति इस बात पर भी है कि तस्वीर में जोसेफ ने मंगलसूत्र और सिंदूर धारण किया है, जबकि वो एक ईसाई हैं. मैगजीन के खिलाफ पोक्सो के साथ ही जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के सेक्शन 45 और महिला अश्लील प्रतिनिधित्व अधिनियम,1986 के तहत मामला दर्ज किया गया लेकिन अब तीन महीने बाद केरल हाई कोर्ट ने इन सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.

चीफ जस्टिस एंटोनी डोमिनिक और जस्टिस डामा सेशाद्री नायडू की बेंच ने कहा कि भारतीय कला ने हमेशा मनुष्य के शरीर को खूबसूरती से दर्शाया है. चाहे वो कामसूत्र हो, राजा रवि वर्मा की पेंटिंग या अजंता की मूर्तियां हों. जजों के बेंच ने यह भी कहा कि पूर्व में भारतीय अधिक समझदार थे और सुंदरता की ही तरह अश्लीलता देखने वाले के नजर में थी. हमें उस कवर पर कुछ भी ऐसा नहीं दिखा जो महिलाओं या पुरुषों के लिए आक्रामक हो.

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