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गुजरात में ईवीएम पर हल्ला बोल! तो क्या हिमाचल में चुनाव बैलेट से हुए?

कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका तब मिला है जबकि एग्जिट पोल के अनुमान उसकी हार का ऐलान कर रहे हैं.

Updated On: Dec 15, 2017 09:16 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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गुजरात में ईवीएम पर हल्ला बोल! तो क्या हिमाचल में चुनाव बैलेट से हुए?

न खुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम. एग्जिट पोल के अनुमानों के बाद सुप्रीम कोर्ट से बैरंग वापस लौटना कांग्रेस की कुछ यही कहानी बयां कर रहा है. एग्जिट पोल के अनुमानों के बाद कांग्रेस को दूसरा झटका सुप्रीम कोर्ट से मिला. कांग्रेस ने गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया. चुनाव आयोग की शिकायत लेकर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई. कांग्रेस ने गुजरात चुनाव में वीवीपैट की 25 प्रतिशत पर्चियों के वोटों के मिलान के लिए याचिका दाखिल की थी.

कांग्रेस चाहती थी कि सर्वोच्च अदालत गुजरात चुनाव की मतगणना में दखल दे और चुनाव आयोग को इस बारे में निर्देश दे. कांग्रेस की तरफ से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने अपना पक्ष रखा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की याचिका को खारिज कर दिया. कांग्रेस के लिए ये बड़ा झटका है, खासतौर से तब जबकि एग्जिट पोल के अनुमान उसकी हार का ऐलान कर रहे हैं.

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सवाल उठता है कि चुनाव हारने के बाद ही क्यों तमाम राजनीतिक दल ईवीएम को गुनहगार बताते हुए कटघरे में खड़ा कर देते हैं? जबकि चुनाव जीतने के बाद ईवीएम से कोई शिकायत नहीं होती? पंजाब विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस की ईवीएम और चुनाव आयोग के खिलाफ सक्रियता नहीं दिखाई दी थी जबकि उस वक्त कांग्रेस की वर्तमान भूमिका निभाते हुए आम आदमी पार्टी ने ईवीएम पर सवाल उठाया था.

खास बात ये है कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर एग्जिट पोल के अनुमानों पर कांग्रेस चुप है. जबकि हिमाचल प्रदेश में ईवीएम की खराबी की खबरें कई जगहों से आने के बावजूद रिकॉर्डतोड़ वोटिंग हुई थी. ऐसा लगता है कि मतगणना से पहले ही शायद कांग्रेस भीतर से अपनी हार कुबूल कर चुकी है तभी हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को ‘ईवीएम दोष’ नहीं दिखाई दे रहा है. लेकिन गुजरात में अपनी साख बचाने के लिए अब ईवीएम को सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा है.

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इसकी बड़ी वजह ये भी है कि गुजरात चुनाव के बीच में ही राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं. कांग्रेस नहीं चाहती कि अगर अनुमानों के मुताबिक नतीजे भी आ गए तो राहुल की ताजपोशी के रंग में भंग न पड़े. इसलिए कांग्रेस पहले से ही ईवीएम और चुनाव आयोग को निशाना बना कर संभावित हार की वजह निकालने में जुटी दिखती है. लेकिन ये कदम सिवाए किरकिरी के कुछ और नहीं साबित हुआ. सुप्रीम कोर्ट का कांग्रेस की याचिका को देश के दिग्गज वकीलों की दलीलों के बावजूद खारिज करना साफ संदेश देता है.

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गुजरात विधानसभा चुनाव में पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने बेलगाम बयानबाजी कर पार्टी के प्रचार पर पानी फेरा तो अब कांग्रेस का सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका दाखिल कर बैरंग वापस लौटना फजीहत से कम नहीं माना जा सकता है.

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दरअसल चुनाव के बाद ईवीएम पर गड़बड़ी के आरोप लगाने की रस्म अदायगी सी चल पड़ी है. यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अपनी हार के लिए ईवीएम को ही जिम्मेदार ठहराया था तो मायावती के सुर में सुर मिला कर तत्कालीन सत्ताधारी समाजवादी पार्टी ने  ईवीएम पर ही हार का ठीकरा फोड़ा था.

यूपी में भी ‘काम बोलता है’ और ‘यूपी को ये साथ पसंद है’ जैसे नारे चुनाव प्रचार में भले ही गूंजे लेकिन नतीजों से खामोश हो गए थे. यही सूरत-ए-हाल गुजरात विधानसभा चुनाव में भी दिखा जहां ‘विकास पागल है’ जैसे नारे गूंजे लेकिन अब एग्जिट पोल ने कांग्रेस की बेचैनी इस हद तक बढ़ाई कि कांग्रेस को चुनाव आयोग में ‘मिलावट’ दिखाई दे रही है.

गुजरात चुनाव में पहले और दूसरे फेज में कई जगहों पर ईवीएम में खराबी की खबर आई थी लेकिन कांग्रेस इसी खराबी को छेड़छाड़ और हैकिंग से जोड़ रही है जबकि चुनाव आयोग ऐसे आरोपों को खारिज करता है.

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देश के मजबूत लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए ही ईवीएम का इस्तेमाल शुरू किया गया था क्योंकि बैलेट पेपर की धांधली से चुनावी नतीजों को प्रभवित होते पूरे देश ने देखा है. जिसके बाद ईवीएम में ज्यादा पारदर्शिता रखने के लिए ही वीवीपैट का इस्तेमाल शुरू हुआ.

साल 2013 में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम के साथ वीवीपैट के इस्तेमाल का आदेश दिया था. लेकिन अब कांग्रेस को उसी वीवीपैट से भी शिकायत है और वो वापस बैलेट पेपर पर चुनाव कराने की मांग कर रही है.

New Delhi: AAP MLA from Greater Kailash Saurabh Bharadwaj demonstrates how an EVM can be manipulated at the special Delhi Assembly session convened by Chief Minister Arvind Kejriwal, on Tuesday. PTI Photo (PTI5_9_2017_000275B)

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की थी. दिल्ली सरकार ने तो बाकायदा विधानसभा में ही ईवीएम का पोस्टमार्टम तक कर डाला था. विपक्षी दलों के गंभीर आरोपों के चलते चुनाव आयोग ने ईवीएम हैकिंग चैलेंज रखा था. खास बात ये है कि ईवीएम के खिलाफ शोर मचाने वाली पार्टियां ही उस चैलेंज के मौके पर मौजूद नहीं थी. ये दो तरफा राजनीति ही देश की सियासत की विडंबना है.

पहले ईवीएम को अग्निपरीक्षा देनी पड़ी तो अब कांग्रेस चुनाव आयोग से भी अपनी निष्पक्षता की अग्निपरीक्षा मांग रही है क्योंकि नतीजों का ठीकरा फोड़ने के लिए आत्ममंथन से बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ही साबित होती आई है.

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