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कर्नाटक सरकार ने अंधविश्वास विरोधी बिल को दी मंजूरी, जानिए खास बातें

कर्नाटक सरकार की कैबिनेट ने बुधवार को अंधविश्वास विरोधी बिल को मंजूरी दे दी

Updated On: Sep 28, 2017 05:02 PM IST

FP Staff

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कर्नाटक सरकार ने अंधविश्वास विरोधी बिल को दी मंजूरी, जानिए खास बातें

कर्नाटक सरकार की कैबिनेट ने बुधवार को अंधविश्वास विरोधी बिल को मंजूरी दे दी है. अमानवीय प्रथाओं और काला जादू की रोकथाम और उन्मूलन विधेयक 2017 (अंधविश्वास विरोधी बिल) पर काफी वक्त से बहस चल रही थी. कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि इस बिल को अगले विधानसभा सत्र में मंजूरी के लिए रखा जाएगा.

इस बिल में कुछ गंभीर मामलों में मौत की सजा का भी प्रावधान है. स्थानीय स्तर पर बढ़ रहे ऐसे रीति-रिवाजों को बिल की लिस्ट में रखा गया है, जिन पर पूरी तरह बैन लग सकता है.

जानिए, अंधविश्वास विरोधी बिल में क्या है खास

- कर्नाटक में सिद्दुभुक्टी, माता, ओखली जैसे कई रिवाज आपराधिक माने गए हैं, जिससे इंसान की जान को खतरा होता है. बिल के मुताबिक, अगर ऐसी किसी दकियानूसी प्रथा से इंसान की जान चली जाती है, तो दोषियों को मौत की सजा दी जा सकती है.

- बिल में अंधविश्वास को फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ एक्शन लेने का भी प्रावधान है. अगर गांव का ओझा ग्रामीणों को झाड़-फूंक के जाल में फंसाएगा, तो उसके अलावा उस व्यक्ति के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, जो उसका प्रचार-प्रसार कर रहा है. - इसके लिए सरकार प्रचार के सभी माध्यमों पर भी नजर रखेगी.ये बिल आम लोगों के हक में होगा और शरारती तत्वों को मिटा पाने में मदद करेगा.

-  इस बिल में नर बलि पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव किया गया है. कर्नाटक के कुछ गांवों में अंधविश्वास के चलते नर बलि की प्रथा भी प्रचलित है.

-अंधविश्वास विरोधी बिल में नर बलि के साथ-साथ पशु की गर्दन पर वार कर उनकी बलि पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है.

-इस बिल में 'बाईबिगा प्रथा' के नाम पर लोहे की रॉड को मुंह के आर-पार करते हुए करतब करना, 'बनामाथी प्रथा' के नाम पर पथराव करना, तंत्र-मंत्र से प्रेत या आत्मा को बुलाने की मान्यता पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है.

-अंधविश्वास विरोधी बिल में धर्म के नाम पर महिलाओं और बच्चियों को देवदासी बनाने, तंत्र-मंत्र के जरिए भूत या चुड़ैल भगाने जैसी मान्यताओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.

-झाड़-फूंक के जरिये गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग का पता लगाने और उसे बदलने के ओझाओं के दावों के मामलों पर भी सजा का प्रावधान इस बिल में किया गया है.

-इस बिल में धर्म के नाम पर महिलाओं और लड़कियों के यौन शोषण को रोकने और खत्म करने का प्रावधान किया गया है.

-इस बिल में वास्तुदोष और इससे जुड़ी मान्यताओं पर भी कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं.

बड़े स्तर पर फैला है अंधविश्वास कर्नाटक के गांवों में लोग आज भी बीमारियां ठीक करने के लिए बच्चों को कांटों पर सुला देते हैं या गर्भवती महिला को किसी तरह की शारीरिक या मानसिक यातना देते हैं. इसके बदले में गांव के हकीम या ओझा मोटी रकम वसूला करते हैं.

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि इस बिल के आने से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलेगी. ऐसा कानून महाराष्ट्र में बहुत पहले से है और अब कर्नाटक में इसे मजबूती से लागू करने के लिए राज्य सरकार गंभीर है.

(साभार न्यूज18)

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