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मेनका चाहें तो बाघिन की हत्या की जांच का आदेश दे सकती हैं: महाराष्ट्र वन मंत्री

वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि मेनका के पास इस मुद्दे को लेकर 'सूचना की कमी है' और अगर वह चाहती हैं तो वह इस मामले में उच्च स्तरीय जांच का आदेश दे सकती हैं

Updated On: Nov 05, 2018 04:50 PM IST

Bhasha

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मेनका चाहें तो बाघिन की हत्या की जांच का आदेश दे सकती हैं: महाराष्ट्र वन मंत्री

महाराष्ट्र के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने बाघिन ‘अवनि’ की हत्या को लेकर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा की गई राज्य सरकार की आलोचना पर सोमवार को कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि मेनका के पास इस मुद्दे को लेकर 'सूचना की कमी है' और अगर वह चाहती हैं तो वह इस मामले में उच्च स्तरीय जांच का आदेश दे सकती हैं.

मुनगंटीवार का बयान केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री की आलोचना पर आया है. रविवार को गांधी ने आधिकारिक तौर पर टी1 के नाम से जानी जाने वाली बाघिन की 'वीभत्स हत्या' को लेकर महाराष्ट्र सरकार की निंदा की थी और इसे 'अपराध का सीधा-सीधा मामला' करार दिया था.

इस बाघिन के बारे में माना जाता था कि पिछले दो सालों में उसने 13 लोगों की जान ली थी. अवनि के दो शावक हैं जो दस महीने के हैं. यवतमाल जिले के बोराटी जंगल में शार्प शूटर असगर अली ने एक अभियान के तहत शुक्रवार की रात इस बाघिन को मार गिराया.

अवनि की मौत पर मेनका ने कई ट्वीट किए थे और कई पक्षों के विरोध के बावजूद उसे मारने का आदेश देने पर महाराष्ट्र सरकार की कड़ी निंदा की थी. उन्होंने कहा था कि वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के सामने यह मामला बड़ी प्रखरता से उठाएंगी.

जानकारी की कमी के वजह से मेनका ने की आलोचना

मुनगंटीवार ने कहा कि गांधी की आलोचना इस मुद्दे पर 'उनकी जानकारी की कमी की वजह से उपजी है' और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक मंत्री के तौर पर न तो उनके पास और न ही उनके विभाग के किसी भी सचिव के पास इस तरह की हत्या का आदेश देने का अधिकार होता है.

उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के तहत लिए जाते हैं. मुनगंटीवार ने कहा. उन्हें (गांधी को) जानवरों से प्रेम है. हालांकि वह महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं. मुझे उन महिलाओं के बारे में सोचना था जिन्हें बाघिन ने अपना शिकार बनाया था.

राज्य के वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि अगर गांधी सही समझें तो वे एनटीएस के दिशा-निर्देशों में बदलाव का सुझाव दे सकती हैं. मुनगंटीवार और गांधी दोनों ही भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं.

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