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..जब 1 घायल निहत्थे जवान ने हथियारबंद नक्सलियों के छक्के छुड़ाए

गोमजी मत्तामी के इस साहसिक कारनामे के लिए पुलिस विभाग ने उनकी प्रशंसा की है. अगले वर्ष इसके लिए उन्हें बहादुरी सम्मान से नवाजा जा सकता है

Updated On: Mar 06, 2018 05:25 PM IST

FP Staff

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..जब 1 घायल निहत्थे जवान ने हथियारबंद नक्सलियों के छक्के छुड़ाए

महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले में एक निहत्थे कमांडो ने जबरदस्त बहादुरी दिखाते हुए नक्सलियों को भागने पर मजबूर कर दिया. सी-60 कमांडो गोमजी मत्तामी यहां के एटापल्ली तालुका के जांबिया गट्टा में चार हथियारबंद नक्सलियों से अकेले भिड़ गए. 33 साल के गोमजी ने अपने सीने में लगे गहरे घाव की परवाह न करते हुए नक्सलियों से लोहा लिया.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार गोमजी के इस साहसिक कारनामे के लिए पुलिस विभाग ने उनकी प्रशंसा की है. माना जा रहा है कि अगले वर्ष इसके लिए उन्हें बहादुरी सम्मान (गैलेंट्री अवॉर्ड) से नवाजा जा सकता है.

गोमजी ने 4 नक्सलियों से निहत्थे लड़कर उनसे अपने छीने गए ए के 47 राइफल और गोलियों से भरे मैगजीन को वापस लिया. खून से लथपथ गोमजी ने भीड़ भरे बाजार में नक्सलियों का पीछा किया और उन्हें भागने पर मजबूर किया.

यह चारों नक्सली उस टीम के सदस्य थे जिन्होंने गोमजी को अकेला देखकर उन्हें घेर लिया था. इन नक्सलियों का मकसद गोमजी से उनके हथियार और कारतूस छीनना था. गोमजी साप्ताहिक बाजार से अपनी पुलिस पोस्ट पर वापस लौट रहे थे. उनकी बाकी की टीम आगे निकल गई थी और वह अपने दोस्त से बात करने के लिए बाजार में ही ठहर गए थे.

नक्सलियों ने बंदूक का मुंह करते हुए ट्रिगर दबा दिया मगर गोली नहीं चली

उन्होंने बताया कि अचानक उन्हें पकड़कर जमीन पर गिरा दिया गया और चार नक्सलियों ने उन्हें घेर लिया. उनमें से एक ने मेरी तरफ बंदूक का मुंह करते हुए ट्रिगर दबा दिया मगर गोली नहीं चली. यह सबकुछ इतनी जल्दी हुआ कि मुझे कुछ सोचने-समझने का समय नहीं मिला.

गोमजी ने कहा कि मैंने एक हाथ से अपने हथियार को जोर से पकड़े रखा और दूसरे से खुद को उनके कब्जे से छुड़ाने की कोशिश की. मैं जानता था कि उनका इरादा मुझे गोली मारकर मेरे हथियार को लूटना था. मैंने बंदूक पकड़े हुए नक्सली को जोर की लात मारी जिससे उसके हाथों से बंदूक नीचे गिर गई. इसके बाद एक नक्सली ने मुझ पर चाकू से हमला बोल दिया और मेरे सीने में चाकू घोंप दी. दर्द और कराह की वजह से मेरी पकड़ मेरे हथियार पर ढीली हो गई और वो उसे लूटकर ले जाने लगे.

बहादुर कमांडो ने कहा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और उठ खड़ा हुआ. मैंने चारों नक्सलियों का पीछा किया और जिसने मेरा हथियार छीना था उसपर झपड़ गया. मैंने उससे अपना ए के 47 और कारतूस वापस छीन लिया.

इसके बाद मैंने नक्सलियों पर गोलियां भी चलाईं लेकिन वहां बहुत भीड़ थी इस वजह से वो सब निकल भागने में कामयाब रहे.

घायल कमांडो गोमजी मत्तामी का अस्पताल में इलाज चल रहा है जहां अब उसकी हालत खतरे से बाहर है.

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