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मंदसौर बलात्कार: आरोपी अगर मुस्लिम के बजाए हिंदू होते तब भी इतना ही शोर होता?

बाबू सलीम ने फ़र्स्टपोस्ट से कहा कि इस इलाके के मुसलमानों की मोटे तौर पर दो मांगें हैं- इरफान को फौरन फांसी दी जाए, और उसे मंदसौर या नीमच में कहीं दफन करने की इजाजत ना दी जाए

Updated On: Jul 02, 2018 10:38 AM IST

Pallavi Rebbapragada Pallavi Rebbapragada

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मंदसौर बलात्कार: आरोपी अगर मुस्लिम के बजाए हिंदू होते तब भी इतना ही शोर होता?

मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर में 26 जून को 7 साल की बच्ची के बलात्कार ने पूरे क्षेत्र को आंदोलित कर उन जातीय समूहों को भी एक साथ ला दिया है, जो आमतौर पर भिन्न विचारधाराओं के माने जाते हैं. स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक, मुख्य रूप से इसका कारण यह है कि मंदसौर में बहुत जल्दी राजनीतिक रूप से आक्रामक आंदोलन शुरू हो जाते हैं, और यहां महिलाओं की सुरक्षा का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है. अपराध की क्रूर प्रकृति ने प्रदर्शनकारियों को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान की.

मंदसौर के एसपी मनोज कुमार सिंह ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि, '26 जून की शाम, जब बच्ची स्कूल की छुट्टी के बाद वापस घर जाने के लिए अपने परिवार वालों का इंतजार कर रही थी, मुख्य आरोपी इरफान ने उसका अपहरण कर लिया. वह उसे लक्ष्मण दरवाजा बस स्टैंड एरिया में ले गया और करीब ही झाड़ियों में बलात्कार किया.'

बताया जाता है कि आरोपी ने बच्ची को लड्डू देकर लुभाया था और फिर उसे घटनास्थल पर ले गया. यूनाइटेड नेशंस के जेंडर एडवाइजर के तौर पर काम कर चुके मनोज कुमार सिंह कहते हैं कि, 'जो कुछ भी हुआ, गलत है. हालांकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि अगर परिजनों को उसे लेने आने में देरी हो रही थी, तो उन्हें इस बारे में स्कूल को बताना चाहिए था.'

सड़को पर उतरे हजारों लोग

वह बताते हैं कि पुलिस ने जैसे ही आरोपी का फोटो जारी किया, उन्हें स्थानीय लोगों की करीब एक हजार कॉल मिलीं, जिसके चलते मुख्य आरोपी फौरन पकड़ लिया गया. सीतामऊ, मल्हारगढ़ और नीमच जैसे स्थानों पर रोजाना होने वाले प्रदर्शनों में हजारों लोग शामिल हो रहे हैं और मंदसौर के निवासी मुकेश कुमार पाटीदार भी इसका हिस्सा रहे हैं.

इस घटना की और इस पर हो रही राजनीति की निंदा करते हुए एक साथ आए विभिन्न मुस्लिम संगठन

इस घटना की और इस पर हो रही राजनीति की निंदा करते हुए एक साथ आए विभिन्न मुस्लिम संगठन

वह बताते हैं कि शुक्रवार और शनिवार को हजारों लोगों ने मंदसौर की सड़कों पर मार्च किया. वह कहते हैं कि, 'अब इस मुद्दे का राजनीतिकरण किया जा रहा है. लेकिन असल समस्या यह है कि सरकार असामाजिक तत्वों, जिसका कारण बेरोजगारी और गरीबी, से निपटने में नाकामयाब रही है. इरफान के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत केस दर्ज किया गया था. उसका दूसरे आरोपी के साथ शराब पीकर बहकने का इतिहास रहा है और उसके खिलाफ अक्सर शिकायतें आती रहती थीं.' पाटीदार कहते हैं कि पुलिस को आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर निगरानी रखनी चाहिए.

एक सात साल का बच्चा जिसने पीड़ित बच्ची को  कांटा गली (मंदसौर में एक पुराना किला लक्ष्मण दरवाजा के करीब सुनसान जगह) से गुजरते हुए सबसे पहले देखा था, उसने बताया कि वह बुरी तरह जख्मी थी और और उसने उससे अपने घर पहुंचाने को कहा था. 27 जून को जब इस घटना की खबर आग की तरह फैली तो मंदसौर में बाजार पूरी तरह बंद हो गया.

मुकेश कुमार पाटीदार विश्व हिंदू परिषद के प्रखंड संयोजक हैं. वह कहते हैं कि रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, दुर्गा वाहिनी, राम सेना और बजरंग दल जैसे हिंदू संगठन राज्य में महिला सुरक्षा के मुद्दे को लेकर एक समस्त हिंदू समाज की इकाई के रूप में एकजुट हो चुके थे. 'हमने फास्ट ट्रैक ट्रायल की मांग की. मुख्यमंत्री ने वादा किया कि ऐसा ही होगा. लेकिन यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है. यह मानवाधिकार का मुद्दा है और हम चाहते हैं कि मध्य प्रदेश में हर लड़की सुरक्षित महसूस करे.'

पीड़ित बच्ची को इंसाफ दिलाने कि लिए हिंदू-मुस्लिम समूह हुए एक

बजरंग सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित गुप्ता ने फ़र्स्टपोस्ट से कहा कि हिंदू संगठनों ने घटना की निंदा की है और गुजरात, बिहार और मध्य प्रदेश में धरना दिया. उनकी मुख्य मांग है कि अगर आरोपी दोषी साबित होता है तो उसे इंडिया गेट के पास फांसी दी जानी चाहिए.' गुप्ता समझाते हैं, 'हम इसलिए प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं क्योंकि आरोपी मुस्लिम हैं. हम तब भी इतना ही शोर मचाते अगर वो हिंदू होते. जब भगवान राम रावण से युद्ध करने के लिए समुद्र पार करने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्होंने श्लोक कहा था, ‘भय बिन प्रीत न होय गोपाला’ जिसका अर्थ है कि प्रेम भी भय के बिना नहीं हो सकता. हम चाहते हैं कि सरकार लोगों के दिमाग में यह बात भर दे कि वो बलात्कार जैसा जुर्म करके भी छूट नहीं सकते हैं.'

इस बीच, मुस्लिम समूहों के साझा मंच संपूर्ण मुस्लिम समाज के सदस्यों ने मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मंदसौर के जिला कलेक्टर को पत्र लिख कर कहा है कि वो आरोपी के राक्षसी कृत्य की कड़ी भर्त्सना करते हैं. संपूर्ण मुस्लिम समाज के सदस्यों ने मुकदमे की फास्ट ट्रैक सुनवाई पर जोर देते हुए कठोर कानून की मांग की है जो असामाजिक तत्वों के दिल में डर पैदा करे ताकि लड़कियों और महिलाएं भयमुक्त होकर घर से बाहर निकल सकें.

नीमच जिले में वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन बाबू सलीम ने फ़र्स्टपोस्ट से कहा कि इस इलाके के मुसलमानों की मोटे तौर पर दो मांगें हैंः इरफान को फौरन फांसी दी जाए, और दूसरा उसे मंदसौर या नीमच में कहीं दफन करने की इजाजत ना दी जाए.

हनीफ शेख ने (वार्ड- 34 से, जहां वारदात हुई, पार्षद हैं)  फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि अंजुमन मुस्लिम वेल्फेयर समिति और मेव वेल्फेयर सोसाइटी के सदस्य 26 जून की घटना के खिलाफ मुसलमानों को एकजुट करने के लिए एक साथ आए थे. हनीफ शेख बताते हैं कि, 'मैं इरफान के परिवार को जानता हूं. वो शरीफ लोग हैं, जो बेटे की आवारागर्दी की करतूतों से लगातार मुश्किलों में घिरते रहे हैं.

इरफान ड्रग्स और शराब का आदी है और कई बार घर से लंबे समय के लिए गायब हो जाता था.' हनीफ कहते हैं कि मंदसौर के लोग उसके खिलाफ एकजुट हैं और यह पक्का करने के लिए कि मामले का राजनीतिकरण ना हो, कुछ भी करेंगे. उनकी टिप्पणी है, 'यह हमारा और हमारे लोगों का मामला है. एक बलात्कारी, सिर्फ बलात्कारी है. न वो हिंदू है, न मुस्लिम.'

अपराधियों के लिए फांसी की सजा की मांग करते हुए अंजुमन-ए-इस्लाम की तरफ से राष्ट्रपति को लिखा गया पत्र

अपराधियों के लिए फांसी की सजा की मांग करते हुए अंजुमन-ए-इस्लाम की तरफ से राष्ट्रपति को लिखा गया पत्र

मेव वेल्फेयर सोसाइटी के अध्यक्ष मोहम्मद असगर ने कहा कि जब मुस्लिम बलात्कार की निंदा करने के लिए आगे आए, तो उन्हें यह भी पता नहीं था कि आरोपी उन्हीं के मजहब का था. लेकिन यह पता चलने के बाद भी, उनकी भावनाएं वही बनी रहीं. वह कहते हैं, 'हमारी प्रतिक्रिया तब भी यही होती अगर आरोपी किसी हिंदू परिवार से होते. यह इंसानियत के खिलाफ अपराध है और हमें धार्मिक मतभेदों से ऊपर उठना चाहिए.'

वकीलों ने लिया आरोपी का केस न लड़ने का फैसला

मध्य प्रदेश क्राइम ब्रांच के एम.एस. सिसोदिया ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि मंदसौर के आरोपी पुलिस हिरासत में हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि मंदसौर काफी हद तक शांतिपूर्ण जगह है, लेकिन अब यह गुस्से और अन्याय का प्रतीक बन गया है.

इस बीच, स्थानीय वकीलों ने आरोपी का मुकदमा लड़ने से इनकार कर दिया है. मंदसौर के एक वकील दशरथ सिंह झाला और मंदसौर जिला बार एसोसिएशन (एमडीबीए) के सदस्य, जिसमें 622 वकील शामिल हैं, ने कहा कि मंदसौर में कोई वकील आरोपी का केस नहीं लड़ेगा, और यह जिला बार का सर्वसम्मत फैसला है.

उन्होंने फ़र्स्टपोस्ट से कहा कि आरोपी 5 जुलाई तक पुलिस हिरासत में हैं, और पुलिस बच्ची की हालत में थोड़ा सुधार होने और बोलने में सक्षम होने के बाद उसके बयान दर्ज करेगी. वकील दशरथ सिंह झाला कहते हैं कि, 'लोग पुलिस से नाराज नहीं हैं, बल्कि यह सोच कर गुस्से में हैं कि मामला कछुए की रफ्तार से आगे बढ़ेगा, और आरोपी इस बीच आराम से रहेंगे.'

उन्होंने कहा कि जनता का गुस्सा इस बात से और बढ़ा है क्योंकि मुख्य आरोपी ने पहले भी एक महिला से छेड़छाड़ की थी और उसके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था. दशरथ सिंह का कहना है कि तब इरफान को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया था.

मंदसौर के एक अन्य वकील महेश पाटीदार ने कहा कि चाहे किसानों की मौत हो या छोटी बच्ची से बलात्कार, मंदसौर के लोग मानव अधिकारों के लिए लड़ने के लिए जातीय और सांप्रदायिक बाधाओं से ऊपर उठ गए हैं. उन्होंने कहा कि पार्टियों के लिए स्थानीय लोगों को लुभाना मुश्किल होगा जब तक कि महिलाएं सुरक्षित न हों जाएं और प्रत्येक समुदाय के लोग आर्थिक रूप से सशक्त हों.

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