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शिवराज के राज्य में पढ़ाई जाती है खिलजी की शौर्य गाथा

चित्तौड़ पर आक्रमण का मकसद राणा रतनसिंह की अत्यन्त सुंदर स्त्री पद्मिनी को पाना था, चित्तौड़ के राजपूतों ने वीरता के साथ आक्रमणकारियों का सामना किया

Updated On: Jan 25, 2018 06:25 PM IST

FP Staff

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शिवराज के राज्य में पढ़ाई जाती है खिलजी की शौर्य गाथा

पद्मावती फिल्म का नाम बदलकर पद्मावत होने के बावजूद बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की आंच से मध्य प्रदेश भी झुलस रहा है. तमाम विरोध प्रदर्शनों के बीच एक सच्चाई यह भी है कि आज भी मध्य प्रदेश के बच्चे रानी पद्मावती के इतिहास के बजाए अलाउद्दीन खिलजी के साम्राज्य के बारे में ही पढ़ रहे हैं.

पद्मावती को राष्ट्रमाता घोषित करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब राज्य सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किये जाने के बाद बयान दे रहे हैं कि यह कानून व्यवस्था से ज्यादा जनभावना का मुद्दा है. लेकिन हैरानी की बात ये है कि मध्य प्रदेश के स्कूलों मे पढ़ाई जाने वाली सामाजिक विज्ञान की किताबों में 6वीं से 10वीं तक पद्मावती का जिक्र तक नहीं है.

नवंबर 2017 में मामला सामने आने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने सिलेबस में बदलाव का ऐलान किया था, लेकिन सच्चाई यह है कि दो महीने गुजर जाने के बाद भी सरकार की तरफ से अब तक इस बारे में कोई प्रपोजल भी भेजा नहीं गया है.

क्या है किताबों में..!

स्कूली किताबों में अलाउद्दीन खिलजी के साम्राज्य के बारे में बताया गया है लेकिन पद्मावती के जौहर के बारे में एक शब्द नहीं लिखा गया है. हायर सेकण्डरी स्कूल में चलने वाली 12वीं क्लास की इतिहास की किताब में मध्य प्रदेश के बच्चे पहली मर्तबा रानी पद्मावती के बारे में पढ़ते हैं. किताब में साल 1303 में अलाउद्दीन खिलजी की चित्तौड़ की विजय पर पूरा एक पेराग्राफ है.

मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ पर हमले के बारे में लिखा है कि 'कहा जाता है कि चित्तौड़ पर आक्रमण का मकसद राणा रतनसिंह की अत्यन्त सुंदर स्त्री पद्मिनी को पाना था. चित्तौड़ के राजपूतों ने वीरता के साथ आक्रमणकारियों का सामना किया. लेकिन विजय आखिर अलाउद्दीन को मिली और उसने चित्तौड़ के किले पर अधिकार कर लिया. रानी पद्मिनी और दूसरी राजपूत महिलाओं ने जौहर कर लिया. इसके बाद अलाउद्दीन ने गुस्से में हज़ारों राजपूतों को मौत के घाट उतार दिया. चित्तौड़ का नाम बदलकर खिज्राबाद रख दिया.'

मुख्यमंत्री ने किया था ये ऐलान..!

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पद्मावती को 'राष्ट्रमाता' बताते हुए ऐलान किया था कि पद्मावती के जीवन और शौर्यगाथा पर ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ कर बनाई गई फिल्म को राज्य में प्रदर्शित नहीं होने दिया जाएगा. वहीं भोपाल में रानी पद्मावती की शौर्य गाथा को प्रदर्शित करने वाला स्मारक स्थापित किया जाएगा और राष्ट्रमाता पद्मावती पुरस्कार दिया जाएगा.

चौहान ने फिल्म के ऐतिहासिक तथ्यों से हुई छेड़छाड़ का जिक्र करते हुए कहा था, 'ऐतिहासिक तथ्यों से खिलवाड़ कर अगर राष्ट्रमाता पद्मावती जी के सम्मान के खिलाफ जो दृश्य दिखाए जाने की बात कही गई है तो मध्य प्रदेश की धरती पर फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने दिया जाएगा.'

मुख्यमंत्री ने कहा था, 'रानी पद्मावती के बलिदान का अपमान देश और प्रदेश स्वीकार नहीं करेगा. भोपाल में रानी पद्मावती की शौर्य गाथा को प्रदर्शित करने के लिए स्मारक स्थापित किया जाएगा. भावी पीढ़ी के लिए प्रस्तावित वीर भूमि प्रकल्प में वीरों की शौर्य गाथाओं को प्रदर्शित किया जाएगा.'

चौहान ने कहा था, 'भारत ने दुनिया को वीरता का पाठ पढ़ाया है. भारत के वीरों ने अपनी गरिमा, आत्म-सम्मान और मातृभूमि के लिए प्राणों का बलिदान दिया है. अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए बलिदान देने की भारतवर्ष की अद्भुत वीरगाथाओं का उदाहरण पूरी दुनिया में नहीं मिलता.'

(न्यूज18 के लिए मनोज शर्मा की रिपोर्ट)

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