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अमेरिका से बेहतर होने के दावे की पोल खोलते मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में दावा किया था कि उनका राज्य अमेरिका से कई मायनों में बेहतर है लेकिन उनके इस दावे की सच्चाई कुछ और ही है

Updated On: Nov 14, 2017 09:35 PM IST

FP Staff

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अमेरिका से बेहतर होने के दावे की पोल खोलते मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में दावा किया था कि उनका राज्य अमेरिका से कई मायनों में बेहतर है. उनके इस बयान पर जमकर बखेड़ा हुआ, लेकिन उनके इस दावे की सच्चाई कुछ और ही है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री के गृह जिले और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की लोकसभा विदिशा में सरकारी अस्पतालों की तस्वीर बेहद ही शर्मनाक है.

मुरैना के सरकारी जिला अस्पताल की हालत ये है कि यहां फर्श पर ही महिलाए बेहोश पड़ी रही और उनका सुध लेने वाला कोई नहीं रहा. सोमवार को 45 महिलाओं को नसबंदी के पहले बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया लेकिन अस्पताल ने न तो जमीन पर बिछाने के लिए कपड़ा दिया और न ही ओढ़ने के लिए चादर. इस हालात में उनको अस्पताल प्रशासन ने छोड़ दिया जबकि नसबंदी कराने वाली महिलाओं को जानलेवा संक्रमण हो सकता था लेकिन किसी ने इस बात की फिक्र नहीं की.

ये हाल उस अस्पताल का है जहां से खुद स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह विधायक है, तो बाकी के अस्पतालों की हालत को आप समझ सकते हैं. मामले पर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पलंग खाली न होने से जमीन पर लिटाने की नौबत आई. स्वास्थ्य मंत्री का शर्मनाक हादसे पर शर्मसार होना लाजमी है. अब कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया जा रहा है.

मंत्री ने दिया कार्रवाई का भरोसा

मामले पर स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह का कहना है कि निश्चित ही ये असंवेदशीलता और अमानवीयता है. इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संबंधित लोगों से जवाब लें. कैसे ये हालात बन गए. क्या मजबूरी हो गई. उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का भरोसा भी दिलाया है.

ये हालात सिर्फ एक जगह के नहीं है. पूरे प्रदेश में कमोबेश यही हाल है. एमपी के सबसे वीआईपी विदिशा के सरकारी जिला अस्पताल का हाल अलग नहीं है जबकि विदिशा मुख्यमंत्री का गृहनगर है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज लोकसभा में विदिशा की सांसद है. इस अस्पताल में एक बेड पर चार-चार मरीज रहते हैं. यहीं नहीं बेड खाली ना हो तो फर्श पर लिटाकर भी भर्ती कर लेते हैं.

जब सरकारी अस्पताल खुद बीमार हैं, तो किसी मरीज का इलाज कैसे करेंगे, लेकिन ऐसे हालात पर भी स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह का कहना है कि इसका पॉजिटिव पहलू देखिए. कम से कम इलाज तो हो रहा है. गांव देहात से आए लोगों को अस्पताल लौटा नहीं रहे हैं. यह भी बड़ी बात है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि महिलाओं को मजबूत बनाने में एमपी अमेरिका से आगे है. लेकिन वीआईपी इलाकों में सरकारी अस्पतालों में भर्ती महिलाओं को दयनीय हालत मुख्यमंत्री के दावे की पोल खोल रही है.

(मनोज शर्मा की न्यूज 18 इंडिया के लिए रिपोर्ट)

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