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मध्यप्रदेश किसान आंदोलन: 5 किसानों की मौत, मंदसौर में 4 जगहों पर कर्फ्यू लगा

मंदसौर जिले में आंदोलनकारियों ने रेलवे फाटक तोड़ दिया और पटरियां उखाड़ने की भी कोशिश की

Updated On: Jun 06, 2017 06:10 PM IST

FP Staff

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मध्यप्रदेश किसान आंदोलन: 5 किसानों की मौत, मंदसौर में 4 जगहों पर कर्फ्यू लगा

मध्यप्रदेश में किसानों का आंदोलन हिंसक हो गया है. राज्य के मंदसौर जिले में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने फायरिंग कर दी, जिसमें पांच किसानों की गोली लगने से मौत हो गई. हालात बेकाबू होता देख मंदसौर में 4 जगहों पर कर्फ्यू लगा दिया गया है.

मंदसौर जिले में आंदोलनकारियों ने रेलवे फाटक तोड़ दिया और पटरियां उखाड़ने की भी कोशिश की. जिसके बाद मंदसौर और राजस्थान के चित्तौड़ शहर के बीच रेल सेवा ठप हो गई है.

जानकारी के अनुसार, सोमवार रात करीब 10 बजे जिले के दलौदा में सैकड़ों आंदोलनकारियों ने रेलवे ट्रैक घेर लिया. इस दौरान रेलवे क्रॉसिंग पर गेट को तोड़ दिया. पटरियों को भी नुकसान पहुंचाया गया, जिसके बाद इस रेलवे ट्रैक पर यातायात रोक दिया गया है.

मंदसौर, रतलाम और उज्जैन में इंटरनेट सेवा पूरी तरीके से बंद कर दी गई है. माना जा रहा है कि आंदोलनकारी सोशल मीडिया के जरिए लामबंद हो रहे है. इसी आशंका के बाद मोबाइल इंटरनेट की सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गई.

मंदसौर और उससे सटे नीमच जिले में दिनभर हिंसक प्रदर्शन होते रहे. मंदसौर में किसानों ने जबरन बाजार बंद करवाए. कई जगहों पर खुली दुकानों में तोड़फोड़ कर सामान लूट लिया, जिसके बाद किसान और व्यापारी आमने-सामने हो गए. पुलिस को हालात पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े.

पश्चिमी मध्यप्रदेश के धार, देवास, झाबुआ, मंदसौर और नीमच जिलों सहित कई स्थानों पर तोड़फोड़ और हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आईं हैं. बताया जा रहा है कि नीमच में दो पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं. भड़भड़िया गांव में जाने के तमाम रास्तों पर अभियान चल रहा है. मांगे नहीं माने जाने पर प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले भी फूंके.

वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आनन-फानन में मुख्यमंत्री निवास पर प्रेस कांफ्रेन्स बुलाकर कहा, मध्यप्रदेश सरकार किसानों की सरकार है. मेरी सरकार ने किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं हैं. किसान आंदोलन के दौरान जो लोग हिंसा कर रहे हैं, वे किसान नहीं बल्कि असामाजिक तत्व है. वे किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं.

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