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चंद्रशेखर आजाद और तात्या टोपे को भुला दिया सिंधिया की शिवपुरी ने!

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके से तात्या टोपे और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों के नामों को मिटा कर सिंधिया परिवार का नाम पोत दिया गया है

Updated On: Sep 11, 2018 09:19 AM IST

Nitesh Ojha

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चंद्रशेखर आजाद और तात्या टोपे को भुला दिया सिंधिया की शिवपुरी ने!
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब 100 दिन से भी कम का समय बचा है. भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि के दम पर आगामी चुनावों में हुंकार भर रही है. वहीं कांग्रेस ने अपने मुख्यमंत्री पद का दावेदार अभी तक नहीं चुना है. ऐसे में इस पद के प्रबल दावेदारों में वरिष्ठ नेता कमलनाथ और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम उछाला जा रहा है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी के युवा नेता हैं और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी भी हैं. इसी के साथ उनके नाम के साथ आखिर में जुड़ने वाला शब्द सिंधिया भी उन्हें राजनीतिक माइलेज दिलाने का काम करता है. ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना-शिवपुरी क्षेत्र से सांसद हैं. इससे पहले उनके पिता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता माधवराव सिंधिया इसी क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं. लिस्ट लंबी है इसलिए कम में समझाएं तो इस क्षेत्र पर राज्य के गठन के समय से ही सिंधिया परिवार का शासन रहा है.

मध्य प्रदेश के गठन से पहले शिवपुरी ग्वालियर रियासत के अधीन आता था और इस पर सिंधिया रियासत का शासन था. और अब भी महल (सिंधिया परिवार) ही यहां पर राज कर रहा है. देश में आजादी और लोकतंत्र आए सात दशक बीत चुके हैं लेकिन इस इलाके में कई लोग अभी भी ऐसे मिल जाएंगे जो महल या सिंधिया परिवार के लोगों को सम्मान के साथ 'महाराज साहब' बोलते दिखेंगे. ऐसा सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं बल्कि हर उम्र के लोग करते हैं.

शहर में लगी दिवंगत माधवराव सिंधिया की मूर्ती सिंधिया रियासत के निशान के साथ

शहर में लगी दिवंगत माधवराव सिंधिया की मूर्ती सिंधिया रियासत के निशान के साथ

अगर आप इसका ठीकरा कांग्रेस के माथे पर फोड़ने के बारे में सोच रहे हैं तो जरा ठहरिए. शिवपुरी की मौजूदा विधायक के बारे में भी जान लीजिए. शिवपुरी की मौजूदा विधायक यशोधरा राजे भी सिंधिया परिवार से आती हैं और राज्य की सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार में मंत्री भी हैं. इस बात से अंदाजा हो गया होगा की इस इलाके में महल का क्या वर्चस्व है. एक समय ऐसा भी था जब शहर के लोग यहां तक कहते थे कि 'महल से अगर कुत्ता भी खड़ा होगा तो वह शिवपुरी में चुनाव जीत जाएगा.'

यहीं शहीद हुए थे तात्या टोपे, आजाद ने गुजारे थे पांच साल

अगर आप शिवपुरी शहर की इन बातों को पढ़कर इस इलाके की गुलाम मानसिकता को समझ भौं सिकोड़ रहे हो तो जरा ठहर जाएं. इस शहर के इतिहास के बारे में भी जरा जान लें. गूगल पर जा कर सर्च करेंगे तो आपको मिल जाएगा कि 1857 की महान क्रांति के योद्धा तत्या टोपे इसी शहर में शहीद हुए थे. उन्हें यहीं पर फांसी दी गई थी. इतनी एतिहासिक धरोहर के बारे में गूगल पर ढूंढने के लिए मेरे कहने का कारण था कि आप शहर में उनके नाम पर एक स्कूल और एक प्रतिमा के सिवाय कुछ नहीं ढूंढ सकेंगे. अगर थोड़ी खोजबीन न की हो तो शहर से कई दफा गुजरने के बाद भी आपको यह एहसास नहीं होगा कि आप जिस जगह से गुजर रहे हो वहां 1857 के समर के महान क्रांतिकारी ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया था.

शिवपुरी का क्रांतिकारी इतिहास सिर्फ इतना ही नहीं है. शिवपुरी जिले से करीब 80 किलोमीटर दूर खनियाधाना तहसील है. इस छोटी सी तहसील में रहने वाले ज्यादातर लोगों को यह भी नहीं पता कि यहां एक ऐसे क्रांतिकारी ने अपने जीवन के वो पांच साल बिताए हैं जब अंग्रेज सरकार उसके पीछे हाथ धो के पड़ी थी. जी हां, यह अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद थे. जो पंडित हरिशंकर के नाम से यहां के सीतापाठा मंदिर पर करीब पांच साल तक रुके थे.

शिवपुरी की खनियाधाना तहसील का सीतापाठा मंदिर जहां चंद्रशेखर आजाद रुके थे और वो पत्थर जिस पर बम के परीक्षण के दौरान निशान पड़ गए

शिवपुरी की खनियाधाना तहसील का सीतापाठा मंदिर जहां चंद्रशेखर आजाद रुके थे और वो पत्थर जिस पर बम के परीक्षण के दौरान निशान पड़ गए

खनियाधाना और चंद्रेशेखर आजाद का संबंध सिर्फ इतना ही नहीं है. बल्कि यही वह जगह है जहां कई क्रांतिकारियों ने प्रशिक्षण ले कर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था. यहां के पत्थरों पर पड़े बमों की चोट के निशान इस बात के सबूत हैं कि यह भूमि स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारियों की साक्षी रही है.

अफसोस इतने महान क्रांतिकारियों के इस जिले के साथ संबंध होने के बावजूद भी यहां उनके नाम पर ढंग का एक स्मारक तक नहीं हैं. बल्कि पिछले दिनों तो शहीद तात्या टोपे की एकलौती प्रतिमा को भी 18 महीने के लिए पुनर्निमाण के लिए ग्वालियर भेजा जा रहा था. स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह सरकारों की चाल है जिले से महान क्रांतिकारी का नाम निशान मिटाने की. जिस दौरान मूर्ति का बेस तोड़ा जा रहा था तभी उस इलाके के पार्षद आकाश वहां पहुंच गए थे. जिन्होंने अपने साथियों के साथ इसका विरोध किया था. जब यह मामला मीडिया के सामने आया तो सियासतदारों ने इसे रफा दफा कर दिया.

ऊपर दिए उदाहरणों से आप यह कतई मत सोचिएगा कि शिवपुरी में महान शख्सियतों को भुला देने का रिवाज है. लेकिन जब आप इस इलाके से गुजरेंगे तो आपको खुद बखुद महसूस हो जाएगा कि शायद यह किसी की साजिश है.

बस स्टैंड से लेकर नेशनल पार्क तक सब सिंधिया के नाम

दरअसल इस इलाके मे सिंधिया परिवार का शासन रहा है. शिवपुरी ग्वालियर रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी. इसके निशान आपको शहरभर में मिल जाएंगे. शहर में सिंधिया परिवार के सदस्य और दिवंगत कांग्रेस नेता के नाम पर संगमरमर की छत्री है. जो उनसे पहले सिंधिया रियासत की सेना की छत्री थी. शहर के मुख्य चौराहे का नाम भी माधव चौक है. उस चौक के बीचों बीच अष्टधातू की माधराव सिंधिया की प्रतिमा लगी थी. इस प्रतिमा को शहर में हुए उत्पात के दौरान कुछ असमाजिक तत्वों ने तोड़ दिया. तब से इस मूर्ति का स्थान खाली था. हालांकि इस स्थान पर अब 45 लाख से ज्यादा की लागत से पुनः निर्माण किया जा रहा है. यहां लगे बैनर से आपको पता चल जाएगा कि यह काम इलाके की विधायक और माधवराव सिंधिया की बहन यशोधरा राजे सिंधिया के प्रयासों से सफल हो रहा है.

शिवपुरी में दिवंगत माधवराव सिंधिया के नाम पर स्नातकोत्तर महाविद्यालय

शिवपुरी में दिवंगत माधवराव सिंधिया के नाम पर स्नातकोत्तर महाविद्यालय

इतना ही नहीं, अगर आप झांसी की तरफ से शहर में आ रहे हैं तो घुसते से ही आपको माधवराव सिंधिया की प्रतिमा दिख जाएगी. शहर में एक साइंस कॉलेज, एक राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क), बस स्टैंड और कई स्थानों के नाम सिंधिया परिवार के सदस्यों के नाम पर हैं. ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके से तात्या टोपे और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों के नामों को मिटा कर सिंधिया परिवार का नाम पोत दिया गया है.

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