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मध्य प्रदेश चुनाव: भोपाल गैस पीड़ित उसे वोट देंगे जो मुआवजे का वादा लिखित में देगा

भोपाल सेंट्रल और हुजूर निर्वाचन क्षेत्रों में भी पीड़ित और सर्वाइवर परिवारों की बड़ी आबादी है, जो अभी भी आपदा के असर से उबर नहीं पाए हैं

Updated On: Nov 01, 2018 05:03 PM IST

Shahroz Afridi

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मध्य प्रदेश चुनाव: भोपाल गैस पीड़ित उसे वोट देंगे जो मुआवजे का वादा लिखित में देगा
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दुनिया की सबसे भयानक औद्योगिक त्रासदी के बचे हुए लोग अभी भी एक दोहरी लड़ाई लड़ रहे हैं- अंदरूनी रूप से, आपदा के बाद स्वास्थ्य से जुड़ा संघर्ष और बाहरी, समुचित मुआवजे का इंतजार करते हुए.

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की घोषणा 6 अक्टूबर को हुई थी. पीड़ितों के लिए संघर्ष करने वाले समूह भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन, भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा, भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की एक साझा बैठक 18 सितंबर को हुई, और फैसला लिया गया कि हादसे में बचे लोग इस चुनाव में उस पार्टी को वोट देंगे जो मुआवजा दिलवाने का वादा करेगी.

वादा मौखिक नहीं होगा, बल्कि यह नोटरी (शपथपत्र) पर लिया जाएगा, ताकि शर्तों को पूरा न करने वाले दल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके.

करीब एक हफ्ता पहले 24 अक्टूबर को उन कालोनियों में दर्जनों होर्डिंग और बैनर लगे नजर आए, जहां त्रासदी में बचे लोग बड़ी संख्या में रहते हैं. होर्डिंग में गैस त्रासदी की एक ऐतिहासिक प्रतिनिधि तस्वीर के साथ नारा लिखा है- ‘जो मुआवजा दिलाएगा, वोट वही ले जाएगा.’ बैनर में यह भी कहा गया है कि वह सभी गैस पीड़ितों और बचे हुए लोगों की साझा आवाज की नुमाइंदगी करते हैं.

Shivraj Singh Chauhan's rally in Jabalpur Jabalpur: Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chauhan addresses a rally during his 'Jan Arashirvad Yatra' in Jabalpur, Thursday, Oct 25, 2018. (PTI Photo) (PTI10_25_2018_000119B)

इन दो निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग 40% सर्वाइवर मतदाता हैं

भोपाल ग्रुप फॉर इनफॉर्मेशन एंड एक्शन की संयोजक रचना ढींगरा कहती हैं, 'हमारे साथ सभी राजनीतिक दलों ने दगाबाजी की है. हमारे लिए बीजेपी कांग्रेस से अलग नहीं है, जिसने वॉरेन एंडरसन (यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का मालिक) को भागने की छूट दी थी. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने त्रासदी के हर जीवित व्यक्ति को 5 लाख रुपया मुआवजा देने का वादा किया था. इस बात को सात साल से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं किया गया.'

बचे हुए लोगों की रणनीति को समझाते हुए ढींगरा बताती हैं कि भोपाल जिले में सात निर्वाचन क्षेत्र हैं, जहां नरेला और भोपाल उत्तर में गैस पीड़ितों और सर्वाइवर की सबसे बड़ी आबादी रहती है. इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में 80-90% से अधिक मतदाता प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से गैस त्रासदी से जुड़े हुए हैं.

भोपाल सेंट्रल और हुजूर निर्वाचन क्षेत्रों में भी पीड़ित और सर्वाइवर परिवारों की बड़ी आबादी है, जो अभी भी आपदा के असर से उबर नहीं पाए हैं. इन दो निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग 40% सर्वाइवर मतदाता हैं, और इनकी संख्या नतीजों को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त है.

बैरसिया को जिले के ग्रामीण विस्तार के रूप में माना जाता है, लेकिन गोविंदपुरा और भोपाल दक्षिण-पश्चिम में सर्वाइवर्स की एक बड़ी आबादी है, जो यहां आकर बस गए हैं. रचना ढींगरा कहती हैं कि 'गैस सर्वाइवर समुदाय को बार-बार मिले धोखे को देखते हुए गैस पीड़ितों के लिए काम कर रहे सभी संगठनों ने उन निर्वाचन क्षेत्रों से विधायक पद के लिए चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों से नोटरी पर शपथ पत्र मांगने का फैसला लिया है. उन्हें कम से कम 5 लाख मुआवजा पक्का करने के लिए कहा गया है.'

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की राशिदा बी बताती हैं, 'हम एक नोटरी शपथपत्र पर जोर दे रहे हैं, जिससे कि नेता अगर अपनी बात से फिर जाते हैं, तो हम उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकेंगे.'

इन संगठनों ने, जो गैस पीड़ितों और सर्वाइवर के लिए काम कर रहे हैं, अभियान शुरू कर दिया है और बीजेपी व कांग्रेस के वार्ड स्तर के नेताओं को अपनी मांगों पर सहमत करने में कामयाब रहे हैं. विनोद कुलहरे, सोनू मांझी, सुरैया अंसारी और नारायण दुबे बीजेपी के प्रति निष्ठा रखते हैं और मोहल्ला स्तर पर काम करते हैं, लेकिन इन मांगों का दृढ़ता से समर्थन करते हैं. इसी तरह साजिद अंसारी, जेपी नागर और संजीव कुमार, जो कांग्रेस के लिए प्रचार और काम कर रहे हैं, कहते हैं कि वे अपने बड़े नेताओं को इस मांग पर गंभीरता से विचार करने या फिर नतीजे भुगतने को तैयार रहने को कहेंगे.

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गैस पीड़ितों और सर्वाइवर्स की आबादी वाले दो प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में से भोपाल उत्तर की नुमाइंदगी कांग्रेस विधायक आरिफ अकील करते हैं, जबकि नरेला की नुमाइंदगी बीजेपी विधायक और मुख्यमंत्री की कैबिनेट में राज्यमंत्री विश्वास सारंग करते हैं. दोनों विधायक मुआवजे पर सवाल को टाल गए, लेकिन मेडिकल और सामाजिक जरूरतों की देखभाल की बात करते हैं.

पिछले 15 सालों से भोपाल उत्तर का प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस विधायक आरिफ अकील कहते हैं कि वह पीड़ितों के लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं, लेकिन बीजेपी सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया. वह कहते हैं 'मैंने उन लोगों को अपने पैसे से पीने का पानी और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की कोशिश की है, लेकिन बीजेपी सरकार ने उनके लिए कुछ भी नहीं किया है. इसके बजाय उनके प्रतिनिधियों ने खेल के मैदान और सामुदायिक हॉल पर अतिक्रमण कर लिया है.'

नरेला के विधायक विश्वास सारंग कहते हैं, 'मैंने गैस अस्पताल में अच्छे डॉक्टरों की मौजूदगी के साथ ही नियमित दवा आपूर्ति सुनिश्चित की है. इसके अलावा मेरी सरकार ने रोजगार के लिए कई उपाय किए हैं.'

हालांकि सारंग के दावे को रचना ढींगरा खारिज कर देती हैं. वह कहती हैं कि शिवराज की अगुआई वाली बीजेपी सरकार में भोपाल गैस आपदा राहत मामलों के राज्यमंत्री होने के बावजूद सारंग ने राहत देने के लिए बहुत कम काम किया है.

bhopal gas

प्रतीकात्मक तस्वीर

 94% गैस पीड़ितों को मुआवजे के रूप में औसतन 25,000 रुपए मिले

भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार का कहना है कि यूसीसी (यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन) ने 47 करोड़ डॉलर (715 करोड़ रुपये) का मुआवजा दिया. भुगतान मार्च 1989 में मिला था. इस बीच, राज्य सरकार ने मुआवजे के फॉर्मों को भरने का काम शुरू किया. मुआवजे का वितरण 1990 में शुरू हुआ और एक दशक से अधिक समय बाद भी जारी रहा. लेकिन अधिकांश मुआवजा 1990-95 के बीच दे दिया गया था.

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जब्बार का कहना है कि 94% गैस पीड़ितों को मुआवजे के रूप में औसतन 25,000 रुपए मिले. बाद में कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें बैंकों में जमा रकम पर ब्याज के हिस्से के रूप में 25,000 रुपए मिले. इस तरह मुआवजे के रूप में, पीड़ितों को केवल 25,000 रुपये मिले.

जब्बार बताते हैं कि आज भी लगभग 5000-7000 गैस पीड़ित रोगी सात स्पेशलाइज्ड गैस राहत अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं ले रहे हैं. घातक एमआईसी (मिथाइल आइसोसाइनेट) गैस के संपर्क में आने के बाद दो लाख गैस पीड़ित स्थायी रूप से प्रभावित हुए थे. जब्बार कहते हैं, 'सबसे अचंभे की बात यह है कि 34 सालों में गैस पीड़ितों के लिए कोई मेडिकल ट्रीटमेंट प्रोटोकोल तय नहीं किया गया.'

दिलचस्प बात यह है कि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा मुहैया कराया गया मुआवजे और नुकसान का आंकड़ा मेल नहीं खाता है, और अदालत के आदेश पर एक संशोधन कसरत की गई. संशोधन के बाद अंतिम आंकड़े इस प्रकार हैं:

कल्याण आयुक्त, भोपाल गैस पीड़ित, मध्य प्रदेश सरकार

श्रेणी- मामलों की संख्या

- व्यक्तिगत इंजरी के मामले- 10,01,723

- पशुधन का नुकसान- 658

- संपत्ति और व्यापार को नुकसान- 4,901

- मौत का दावा- 22,14 9

- कॉरपोरेशन और अन्य के दावे- 85

कुल मामलों की संख्या- 10,29,516

(शहरोज अफरीदी भोपाल स्थित फ्रीलांस लेखक हैं और जमीनी पत्रकारों के अखिल भारतीय नेटवर्क 101Reporters.com के सदस्य हैं)

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