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70 साल का नया दशरथ मांझी, गांव की प्यास बुझाने को अकेले खोद डाला कुआं

मध्यप्रदेश के 'दशरथ मांझी' कुआं खोदकर पानी निकालने की कोशिश में अकेले जुटे हुए हैं. ढाई साल से कुएं की खुदाई कर रहे राजपूत की मदद के लिए कोई सामने नहीं आया लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी है

Updated On: May 24, 2018 04:36 PM IST

FP Staff

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70 साल का नया दशरथ मांझी, गांव की प्यास बुझाने को अकेले खोद डाला कुआं

हिंदी में मशहूर कहावत है 'जहां चाह-वहां राह'. इस कहावत को कभी बिहार के दशरथ मांझी ने सच साबित कर दिखाया था. वहीं अब मध्य प्रदेश में भी 70 साल के एक बुजुर्ग ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है. सीताराम राजपूत अपनी दम पर कुछ भी करने का जज्बा रखते हैं.

बिना किसी की मदद के कर रहे हैं काम

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक छोटा सा गांव है 'हदुआ'. यह गांव पिछले तीन साल से पानी की किल्लत से जूझ रहा है. 70 साल के सीताराम राजपूत इसी गांव में रहते हैं. गांव में पानी की दिक्कत दूर करने के लिए राजपूत पिछले ढाई साल से अकेले कुआं खोदने में जुटे हुए हैं.

अपनी इस कोशिश के बारे में राजपूत बताते हैं कि गांववालों को हर दिन पानी का समस्या से जूझना पड़ता है लेकिन, रास्ता कोई नहीं निकालता. उन्होंने कहा, 'जब दशरथ मांझी अकेले पहाड़ का घमंड तोड़कर रास्ता बना सकते हैं तो क्या वह कुआं खोदकर पानी नहीं निकाल सकते?'

madhya pradesh

सीताराम राजपूत पिछले ढाई साल से अकेले कुआं खोद रहे हैं लेकिन उन्हें दुख इस बात का है कि उनकी मदद के लिए अब तक कोई सामने नहीं आया. वह कहते हैं कि इस काम में न तो सरकार और ना ही गांव का कोई व्यक्ति उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ा रहा है. वैसे सीताराम राजपूत को पूरी उम्मीद है कि एक दिन वह अपनी मंजिल जरूर हासिल कर लेंगे.

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