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गोरखपुर के मदरसों में क्यों पढ़ाई जा रही है संस्कृत

मदरसा और धर्म से जुड़े तमाम रंगों की पहचान आज के समय में संकीर्ण होती जा रही है ऐसे में गोरखपुर की ये खबर चौंकाती भी है और खुश भी करती है

FP Staff Updated On: Apr 10, 2018 06:41 PM IST

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गोरखपुर के मदरसों में क्यों पढ़ाई जा रही है संस्कृत

मदरसों के बारे में बात करते हुए संस्कृत एक ऐसा शब्द है जिसका खयाल दिमाग में सबसे आखिर में आएगा. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के एक मदरसे में सारे कयासों को धत्ता बताते हुए संस्कृत पढ़ाई जा रही है. गोरखपुर के दारुल उलूम हुसैनिया मदरसा में तालिबों को संस्कृत सिखाई जा रही है. और बच्चों का कहना है कि उन्हें इसे सीखने में मजा भी आ रहा है. मदरसे में हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी औऱ संस्कृत को बतौर भाषा पढ़ाया जा रहा है.

सीखने वाले बच्चों का कहना है कि उन्हें संस्कृत सीखने में मजा आ रहा है. बच्चों का कहना है कि उनके टीचर और मां-बाप भी संस्कृत सीखने में उनकी मदद कर रहे हैं. मदरसा नया बना है और उत्तर प्रदेश एजुकेशन बोर्ड से मान्यता प्राप्त है.

मदरसे के प्रिंसिपल का कहना है कि उनके यहां 5वीं से ऊपर के बच्चों को संस्कृत पढ़ाने का फैसला लिया गया. इसमें किसी भी बच्चे के घरवालों को कोई आपत्ति नहीं हुई. वैसे मदरसों में NCERT की किताबें शुरू करवाने की पहल भी हो रही है.

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