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यूपी में मंत्रियों की जगह अफसरों को मिल सकते हैं पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगले

माना जा रहा था कि इन बंगलों में योगी सरकार के खास मंत्रियों को जगह मिलेगी, लेकिन सरकार इन बंगलों को मंत्रियों की जगह अफसरों को देने पर विचार कर रही है

Updated On: Jul 20, 2018 04:01 PM IST

FP Staff

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यूपी में मंत्रियों की जगह अफसरों को मिल सकते हैं पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगले

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगलों को योगी सरकार ने खाली करवा लिया है. अब उन बंगलों को यूपी सरकार के बड़े अधिकारियों को देने की तैयारी चल रही है. राज्य सम्पत्ति विभाग ने सीएम कार्यालय को पत्र लिखकर खाली बंगलों को वरिष्ठ अधिकारियों को आवंटित करने की अनुमति मांगी है. जबकि पूर्व सीएम अखिलेश यादव और मायावती के खाली बंगलों के आवंटन की प्रक्रिया पर राज्य सम्पत्ति विभाग ने फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया है.

बता दें कि कुछ महीने पहले सर्वोच्च अदालत के आदेश पर अखिलेश यादव और मायावती सहित राज्य के पूर्व मुख्‍यमंत्रियों राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, नारायण दत्त तिवारी और मुलायम सिंह के बंगलों को खाली करवाया गया था.

मंत्रियों ने की थी बड़े बंगले की मांग

माना जा रहा था कि इन बंगलों में योगी सरकार के खास मंत्रियों को जगह मिलेगी, लेकिन सरकार इन बंगलों को मंत्रियों की जगह अफसरों को देने पर विचार कर रही है. गौरतलब है कि बीते दिनों यूपी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कुछ समय पहले मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मांग की थी कि उन्हें 4 विक्रमादित्य मार्ग या 5 विक्रमादित्य मार्ग में से कोई एक बंगला आवंटित किया जाए. सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा है कि जो बंगला अभी उनके पास है, वह आने वाले मेहमानों के हिसाब से काफी छोटा है, इसलिए बड़ा बंगला दिया जाए.

अखिलेश यादव अपने परिवार समेत अंसल गोल्फ सिटी स्थित बंगले में शिफ्ट हो गए हैं. यह बंगला उन्होंने किराए पर लिया है. नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (एनएसजी) की टीम ने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के एक ही लेन में बने आवासों का निरीक्षण किया था. यहां महज चंद कदमों की दूरी पर दोनों ने अलग-अलग बंगलों में अपना आशियाना बनाया है.

उधर, राज्य संपत्ति अधिकारी ने अखिलेश यादव के खाली किए गए बंगले में हुई तोड़फोड़ की जांच शुरू कर दी है. राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश शुक्ला ने बताया था कि सभी खाली किए गए बंगलों को रिकॉर्ड से मिलान करवाया जाएगा. सभी निर्माण व सामान आदि का ब्यौरा विभाग के पास मौजूद है. अगर यह तथ्य प्रकाश में आया कि तोड़फोड़ जानबूझकर की गई है और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है, तो नोटिस और रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी.

(न्यूज 18 के लिए नरेंद्र यादव की रिपोर्ट)

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