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लखनऊ एनकाउंटर: क्या आईएस सच में हमारी दहलीज तक आ पहुंचा है?

देश के मंत्रियों अब सिर्फ बात करने की नहीं बल्कि सचेत होने की जरूरत है

Updated On: Mar 09, 2017 05:15 PM IST

Sreemoy Talukdar

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लखनऊ एनकाउंटर: क्या आईएस सच में हमारी दहलीज तक आ पहुंचा है?

जरा घटनाओं की इस तफ्सील पर गौर कीजिए. मंगलवार को भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में धमाका होता है. एक हल्का धमाका जिसमें लोग घायल होते हैं, जान नहीं जाती. इसके बाद दो राज्यों में आठ गिरफ्तारियां होती हैं.

इसी कड़ी में लखनऊ में पूरे 12 घंटे तक सांस थामे लुकाछिपी का खेल होता है, जिसमें एक तरफ आंतकरोधी दस्ते(एटीएस) के कमांडोज हैं और दूसरी तरफ एक घर में अड्डा जमाकर गोली बरसाते संदिग्ध आतंकवादी, जिन्हें इस्लामिक स्टेट के संपर्क वाला बताया जाता है.

बुधवार को एटीएस के कमांडोज ने एनकाउंटर में उन लोगों को मार गिराया और उनके पास से भारी मात्रा में गोला-बारुद और हथियार बरामद होते हैं. सिलसिलेवार घटी इन घटनाओं के बाद राजनाथ सिंह की तंद्रा टूट जानी चाहिए.

धार्मिक कट्टरता और देश प्रेम 

राजनाथ सिंह लगातार भारत की गंगा-जमुनी तहजीब के उपदेश देते रहते हैं. बताते रहते हैं कि भारत की समन्वयवादी संस्कृति ने देश को आईएसआईएस के चंगुल से बचा रखा है. हाल के इतिहास और वजनदार सबूतों को दरकिनार कर उन्होंने एक से ज्यादा दफे यह बेतुकी बात कही है कि धार्मिक कट्टरता का देशप्रेम से कोई विरोध नहीं है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राजनाथ सिंह ने कहा था, 'मुझे पक्का यकीन है कि आईएसआईएस के जरिए फैलाये जा रहे धार्मिक उन्माद का खतरा हमारे देश के लिए कोई मुद्दा नहीं है, क्योंकि भारत में इस्लाम को मानने वाले लोग भी  इस देश से प्यार करते हैं.'

अगर देशभक्ति नौजवानों को धार्मिक कट्टरता की राह पर जाने से रोकने में कारगर होती तो पाकिस्तान आतंकवादी पैदा करने के मामले में दुनिया का अव्वल देश नहीं होता. सर्वे के अनुसार वहां के 88 फीसद नौजवान कहते हैं कि जंग होती है तो वे अपने देश के लिए जान कुर्बान करने को तैयार हैं.

आईएसआईएस एक अलग ही किस्म के राष्ट्रवाद के सपने दिखाता है. उसके अनुसार, वो बहुत सारे लोगों को एक साथ करने वाले एक नए राष्ट्रीय पहचान की बात करता है जो समान जीवनशैली, धर्म, क्षेत्र और साझे के लक्ष्यों पर आधारित हो' (डायलन डीसूजा, आईएसआईएस एंड नेशनलिज्म)

आइएसआइएस की जारी की गई तस्वीर

आइएसआइएस की जारी की गई तस्वीर

बीते माह गृहमंत्री ने एक बार फिर अपनी झूठी आशा दिलाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि 'आईएसआईएस पर सरकार की नजर है, उसे देश के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरने नहीं दिया जाएगा.

देश को सतर्क होना चाहिए

जिस व्यक्ति पर देश की हिफाजत की जिम्मेदारी हो उसके मन में समस्या को अनदेखा करने का भाव दिखे तो इसे खतरनाक माना जाना चाहिए. राजनाथ सिंह की सोच के उलट इस बात की खबरें लगातार आ रही हैं कि भारत के नौजवान इस्लामिक स्टेट के जहरीले एजेंडे से मोहित हो रहे हैं, वे या तो अपनी मातृभूमि पर हमले की साजिश करने की जुगत में लगे हैं या फिर इराक और सीरिया के आतंकी गुटों से जा मिलने के मिलने के फिराक में हैं.

दरअसल, सीरिया के राक्का और इराक के मोसुल में कायम आईएसआईएस का मजबूत किला बस ढहने के कगार पर है. ऐसे में यह समूह अपनी विचारधारा फैलाने वाले एक प्रचार-तंत्र की तरह काम कर रहा है और सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर दुनिया भर के नौजवानों को प्रभावित करने की कोशिश में है ताकि वे जहां हैं वहां ज्यादा से ज्यादा हमले कर सकें.

ऐसे और भी कई संगठन हैं

अपने नए अवतार में आईएसआईएस पहले की तुलना में कहीं ज्यादा खतरनाक है. एक अहम बात यह भी है कि खतरा सिर्फ आईएसआईएस तक सीमित नहीं. भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा की एक शाखा एक्यूआईएस( अलकायदा इन इंडियन सब-कंटीनेंट) सक्रिय है. एक्यूआइएस बांग्लादेश के सेक्युलर ब्लॉगर पर बार-बार हमले करती है. इसने पिछले साल 15 मिनट का एक ऑडियो क्लिप जारी किया था जिसमें मुसलमानों का आह्वान किया गया था कि वे हिन्दुओं के खिलाफ उठ खड़े हों.

आतंकवाद पर नजर रखने वाली अमेरिकी संस्था एसआइटीई इंटेलीजेंस ग्रुप ने इस ऑडयो-क्लिप को वेबसाइट के खोज निकाला और उसमें भरे नफरत के बोल दुनिया के सामने आए.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) को आशंका है कि पिछले साल केरल से गायब हुए 22 नौजवान अफगानिस्तान में आईएसआईएस के गुर्गों के साथ प्रशिक्षण हासिल करने में लगे हैं. इस इलाके में आईएसआईएस का खुरासान मॉड्यूल सबसे ज्यादा सक्रिय है.

यह मॉडयूल आईएसआईएस के अबू बक्र अल-बगदादी गुट का वफादार है. इसमें अफगानिस्तान-पाकिस्तान-तुर्केमेनिस्तान इलाके में सक्रिय कई तरह के आतंकवादी शामिल हैं. हाल में काबुल के सुप्रीम कोर्ट के नजदीक हुए हमले(इसमें 20 से ज्यादा लोगों की जान गई) और पाकिस्तान के लाल शाहबाज कलंदर दरगाह पर हुए हमले(इसमें 80 से ज्यादा लोग मारे गये) की इसी मॉड्यूल ने जिम्मेवारी ली.

चिंता की बात यह है कि, खबरों के मुताबिक मध्यप्रदेश के जबड़ी रेलवे स्टेशन के नजदीक हुए धमाके में खुरासान के इसी मॉड्यूल का हाथ हो सकता है. हो सकता है यूपी में किसी और जगह पर घातक हमला करने से पहले मॉडयूल उसका एक ट्रायल-रन(परीक्षण) मध्यप्रदेश में कर लेना चाह रहा हो. बहरहाल, जांच एजेंसियां अभी इस बात की पड़ताल में लगी हुई हैं.

पैसेंजर ट्रेन के धमाके में 10 लोग घायल हुए. कहा जा रहा है कि यह देश में पनपे सैफुल्लाह जैसे आतंकियों का कारनामा था. मंगलवार को लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में सैफुल्ला की घेराबंदी हुई और 12 घंटे तक चले एन्काउंटर के बाद उसे मार गिराया गया.

आईएस से संपर्क की आशंका में आठ और लोगों को पकड़ा गया है लेकिन पुलिस का मानना है कि इस गुट में 12 जन शामिल हैं, सो वह कुछ और लोगों के धड़-पकड़ में लगी है. हाजी कॉलोनी में सैफुल्ला के किराए के कमरे में उसके साथ रहने वाले दो और लोग फरार हैं. उन्हें भी मॉड्यूल का सदस्य माना जा रहा है.

Lucknow Encounter

खबरों के मुताबिक यूपी पुलिस ने घटनास्थल से आईएसआईएस का काला झंडा, मैन्युअल, आठ पिस्टल, 650 राऊंड कारतूस, 50 कारतूस के खोखे, विस्फोटक-सामग्री, बम बनाने का सामान, सोना, कुछ नकदी, पासपोर्ट, सिम कार्ड, ट्रेन की टाइम-टेबल, सैफुल्ला की दिनचर्या बताने वाली डायरी और भारत और इजरायल के झंडे बरामद किए हैं. माना जा रहा है कि सैफुल्ला को देश के बाहर के किसी व्यक्ति से निर्देश हासिल हो रहे थे.

रुक्मिनी कैलीमेकी ने न्यूयार्क टाइम्स में एक लेख लिखा, 'नॉट लोन वुल्व्स ऑफ्टर ऑल: हाऊ आईएसआईएस गाइडस् वर्ल्डस् टेरर प्लॉट फ्रॉम अफार'. लेख में हैदराबाद के केस में चली जांच के रिकार्डस् का जिक्र करते हुए रुक्मिनी ने बताया है कि, किस तरह आईएसआईएस के लोगों 17 महीने तक एक नौजवान भारतीय इंजीनियर मोहम्मद इब्राहिम यज्दानी को हमले के लिए तैयार करते रहे. हालांकि उनकी कोशिश कामयाब नहीं हो पाई.

पहले धमाके असफल हुए थे 

रिपोर्ट के मुताबिक हमले की इस साजिश के बारे में पुलिस को पता चल गया. जब आईएसआईएस के लिए काम कर रहा एक भारतीय बम बनाने में असफल रहा. ये बताने के लिए उसने जिस सेलफोन से फोन किया था, पुलिस ने उसके नेटवर्क से उसका पता लगा उसे पकड़ लिया. कई विशेषज्ञों का मानना है कि आगे के दिनों में आईएसआईएस रिमोट-कंट्रोल की इसी रणनीति पर चलेगा क्योंकि अपने किले से उसके पांव तेजी से उखड़ रहे हैं.

हैदराबाद की घटना के खुलासे से यह साफ पता चलता है कि आईएसआईएस भारत में जड़ जमाने में लगा है. सो, हमारे मंत्रियों को चाहिए कि वे आत्मसंतोष के भाव से मीडिया के सामने प्रवचन करने की जगह समस्या के समाधान के लिए सक्रिय हों. वक्त की मांग है कि निगरानी और सतर्कता पहले की तुलना में कई गुणा ज्यादा बढ़ा दी जानी चाहिए.

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