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लोकसभा चुनाव से पहले CBI के ताबड़तोड़ छापे के पीछे क्या हैं सियासी मायने!

राजनीतिक हल्के में ये चर्चा जोरों पर है कि छापा भले ही हुड्डा के दफ्तर में पड़ा हो, लेकिन निशाना रॉबर्ट वाड्रा पर है

Updated On: Jan 25, 2019 08:17 PM IST

FP Staff

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लोकसभा चुनाव से पहले CBI के ताबड़तोड़ छापे के पीछे क्या हैं सियासी मायने!

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चर्चा बीते साल अक्टूबर से जितनी हुई, उतनी शायद पहले कभी नहीं हुई हो. पहले सीबीआई अंदरूनी विवाद को लेकर सुर्खियों में रही और अब छापे को लेकर. आईएएस अधिकारी बी चंद्रकला के घर छापे के साथ इसकी शुरुआत हुई. हमीरपुर खनन घोटाले को लेकर हुई इस कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का नाम भी सामने आया.

ऐसे में आरोप लगना तो लाजमी था. जैसे ही इस छापे के बाद खनन घोटाले में अखिलेश यादव का नाम उछला, उन्होंने बुआ मायावती के साथ सीबीआई के बहाने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोल दिया.

ये मामला अभी शांत ही नहीं हुआ था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इसी मामले में बी चंद्रकला समेत कईयों को नोटिस जारी कर दिया. फिर बात आई लखनऊ के गोमती नदी पर बने रिवरफ्रंट में हुए कथित घोटाले की. इस मामले में ईडी ने लंबी-चौड़ी छापेमारी की. ठेकेदार, इंजीनियर समेत कंपनियों के दफ्तरों में सीबीआई के छापे पड़े, लेकिन इस छापे को भी चुनावी बताया गया.

राजनीतिक हल्के में ये चर्चा जोरों पर है कि छापा भले ही हुड्डा के दफ्तर में पड़ा हो, लेकिन निशाना रॉबर्ट वाड्रा पर है. वैसे तो 25 जनवरी तक सीबीआई ने कुल 45 एफआईआर दर्ज किए हैं. लेकिन, चर्चा सिर्फ 2-3 की ही है. क्योंकि छापे और बड़ी कार्रवाई आईसीआईसीआई बैंक को छोड़ इन 2-3 मामलों में ही हुई.

चुनावों के पहले छापा पड़ना बड़ी आम बात हैं. राजनीतिक शक्ति के दुरुपयोग की बात भी नई नहीं है. लेकिन, जिस तरह अक्टूबर से जनवरी तक अपने आप से लड़ रही सीबीआई आलोक वर्मा मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद अचानक आक्रमक हो गई है, उससे माना जा रहा है कि सीबीआई के छापों का ये दौर अभी आगे चलता रहेगा. सीबीआई का नया निदेशक आने के बाद इस पर लगाम लग जाएगी. क्योंकि, चुनावों की अधिसुचना में अब बहुत कम वक्त बचा है.

यूपी में एक और सीबीआई उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग भर्ती घोटाले की जांच कर रही है. दूसरी ओर बसपा सरकार के दौरान करीब 1400 करोड़ रुपए के स्मारक घोटाले की जांच भी अंतिम दौर में है. मतलब साफ है चुनावों की घोषणा से पहले अभी और एफआईआर और छापे की खबरें आ सकती हैं.

(न्यूज18 के लिए अनिल राय की रिपोर्ट)

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