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नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ नाकाम: कश्मीर में उरी जैसे हमले से सेना सजग

सेनाधिकारी कहते हैं, 'हम किसी भी प्रकार के अप्रिय घटना से निपटने के लिए तैयार हैं.'

Sameer Yasir Updated On: Jun 13, 2017 08:57 PM IST

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नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ नाकाम: कश्मीर में उरी जैसे हमले से सेना सजग

शुक्रवार आधी रात आतंकियों का एक गुट 550 किलोमीटर की सीमा रेखा के उस बाड़ में सुराख कर कश्मीर में घुसपैठ कर गया जो 740 किलोमीटर वाली नियंत्रण रेखा का हिस्सा है. भारतीय सेना के जवानों ने नाइट विजन उपकरणों की मदद से इस हलचल को देख लिया. इसके बाद हुई मुठभेड़ में सेना ने पांच संदिग्ध आतंकियों को ढेर कर दिया.

गुवालता जंगल, जहां घुसपैठियों से मुठभेड़ हुई, वह उत्तरी कश्मीर के उरी सेक्टर में ठीक नियंत्रण रेखा के बाद पड़ता है. यह क्षेत्र बेहद गहरा और घने जंगलों वाला है, जहां कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाना बेहद मुश्किलों भरा काम है.

बहरहाल, रविवार दोपहर बाद भारतीय सेना की एक टुकड़ी ने इन घने जंगलों के भीतर खामोशी के साथ प्रवेश किया, जहां चिड़ियों की चींचीं के सिवा कुछ सुनाई न दे. सेना ने यहां उन दो आतंकियों की तलाश में अभियान चलाया जिनके बारे में संदेह था कि वे शुक्रवार को घुसपैठ करने वाले मुख्य समूह से अलग हो गए थे.

इस खूबसूरत जंगल का एक सिरा भारत का हिस्सा है जो देवदार पेड़ों से भरे पहाड़ों से मिला है. वहीं दूसरा सिरा पीओके में जाकर खत्म होता है. सेना ने यहां अब तक पांच आतंकियों के शव, हथियार, खाने-पीने का सामान, दवाएं और आश्चर्यजनक रूप से पांच सौ के नोटों वाली नौ हजार रुपए की भारतीय मुद्रा बरामद की है. यह तलाशी अभियान अभी भी जारी है.

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सेना का दावा है कि उसने उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पांच आतंकियों को मार कर उरी शैली के हमले को (जिसमें पिछले साल 19 जवान शहीद हो गए थे) नाकाम कर दिया है. सेना के मुताबिक इन आतंकियों ने शरीर से चिपके खास किस्म के आईईडी पहन रखे थे. आतंकी पहले भी एलओसी पर आत्मघाती हमले करने में इस तरह के 'यूनिक बॉडी फिटेड आईईडीज' का इस्तेमाल कर चुके हैं.

सेना या नागरिकों को टारगेट की योजना के साथ घुसपैठ

उरी में 12 ब्रिगेड के कमांडर, ब्रिगेडियर वाईएस अहलावत ने रविवार को फ़र्स्टपोस्ट को बताया, 'उन्होंने (आतंकी) यूनिक बॉडी फिटेड आईईडीज पहन रखे थे जिनमें टाइमर लगा था. इससे यह संकेत मिलता है कि यह एक फिदायीन (आत्मघाती) समूह था जो उरी में सेना के ठिकानों को लक्ष्य कर के, या संभव है नागरिकों को टारगेट करने की योजना के साथ घुसपैठ की कोशिश कर रहा था, ताकि माहौल को खराब किया जा सके.'

अहलावत ने कहा, 'हालांकि, पांच आतंकियों की मौत के साथ मुठभेड़ खत्म हो गई, लेकिन अभियान जारी है. वे सीमा पार करने के लिए घने जंगलों की ओट का फायदा उठाना चाहते थे.' पांचों शव, गोला-बारूद के साथ बरामद कर लिए गए हैं, जिनकी शिनाख्त होनी बाकी है. चूंकि, दो आतंकियों के जंगल में छिपे होने की आशंका है, इसलिए सेना का तलाशी अभियान जारी है.

ब्रिगेडियर अहलावत ने कहा कि इस बार गर्मियां ज्यादा अहम साबित हो सकती हैं, क्योंकि आतंकियों ने कुछ दिनों के भीतर ही नियंत्रण रेखा पार कर के घुसपैठ की यह दूसरी कोशिश की है. लेकिन सेना की टुकड़ियां किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं.

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उरी में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा घेरे को तोड़ने की दूसरी कोशिश

पिछले महीने, उरी में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा घेरे को तोड़ने की दूसरी कोशिश हुई है. पहला प्रयास 26 मई को किया गया था. तब भारतीय सेना ने कहा था कि उसने पाकिस्तानी बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) के दो सदस्यों को मार गिराया, जो उरी सेक्टर में घुसपैठ कर के सैनिकों पर हमला करना चाहते थे.

अहलावत ने कहा, 'नया समूह लश्कर-ए-तैयबा से संबंधित था और यह आत्मघाती दस्ता था. पिछले महीने घुसपैठ की कोशिशों में तेजी आई है, जिसके जारी रहने की आशंका है.' पिछले हफ्ते ही नियंत्रण रेखा पर 13 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं. वास्तविक सीमा रेखा पर नाटकीय ढंग से घुसपैठ की कोशिशें बढ़ी हैं, तो मुठभेड़ों की संख्या में भी इजाफा हुआ है.

सेना ने पाकिस्तान पर कश्मीर में हथियारबंद आतंकियों की घुसपैठ का ताना-बाना बुनने का आरोप लगाया है. सेना ने कहा कि नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी का कवर देकर इन समूहों को घुसपैठ करने समेत सक्रिय मदद उपलब्ध कराई जाती है. आम तौर पर कश्मीर में 27 वर्षों की अराजकता के दौरान उरी शांत रहा है क्योंकि इस इलाके में सशस्त्र सैनिकों की हमेशा बड़ी मौजूदगी रही है. लेकिन झेलम नदी से घिरे इस छोटे से नगर की सीमा ने नियंत्रण रेखा पर लगातार हलचल देखी है.

पिछले कुछ सालों में, कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर बिना दस्तखत सीजफायर पर भारत-पाकिस्तान की सहमति के बाद, इस शहर के सीमावर्ती नागरिक शांतिपूर्ण जीवन जीते रहे हैं. बहरहाल, पिछले साल उरी में 12 ब्रिगेड पर बंदूकधारियों के हमले के बाद शहर का माहौल खराब हो गया, जो रिपोर्टों के मुताबिक उसी दिन घुसपैठ कर के आए थे. हाल के दिनों में ऐसा लगता है कि आतंकी इस सेक्टर से घाटी में घुसपैठ की संभावनाएं तलाश कर रहे हैं.

एक सेनाधिकारी ने स्वीकार किया, 'नियंत्रण रेखा पर तो पूरी तरह शांति नहीं थी, लेकिन उरी में वर्षों तक शांतिपूर्ण माहौल रहा है. लेकिन पिछले साल के हमले के बाद अप्रिय घटनाओं से सुरक्षा उपाय के तौर पर सेना ने कुछ प्रतिबंध लगाए हैं.'

बढ़ती घटनाओं से स्थानीय निवासियों में डर का माहौल

नियंत्रण रेखा पर इस तरह की बढ़ती घटनाओं ने यहां के निवासियों में यह डर पैदा कर दिया है कि पहले जैसे बुरे दिन फिर वापस आ सकते हैं. नियंत्रण रेखा के गांव सुल्तान डाकी निवासी गुलाम मोहम्मद खटना कहते हैं, 'अगर एलओसी पर मुठभेड़ होगी तो हम झेलेंगे, हमारे बच्चे भुगतेंगे, जो हमारे लिए अच्छी स्थिति नहीं होगी.'

हालांकि, सेना यहां किसी भी तरह के घुसपैठ के प्रयासों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है, लेकिन एक छोटी सी चूक से भी आने वाले दिनों में कश्मीर में उरी जैसे हमले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

सेनाधिकारी कहते हैं, 'हम किसी भी प्रकार के अप्रिय प्रयासों से निपटने के लिए तैयार हैं और उरी हमले जैसी किसी कोशिश को दोहराने की इजाजत नहीं देंगे.'

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