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अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी तक सुनवाई टाली

वक्फ वोर्ड की तरफ से कपिल सिब्बल की 2019 के चुनाव तक सुनवाई टालने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी

FP Staff Updated On: Dec 05, 2017 03:57 PM IST

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अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी तक सुनवाई टाली

-सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 फरवरी की तारीख तय की है. तब तक के लिए सुनाई स्थगित की जा चुकी है.

-कांग्रेस ने अपने आपको मामले में कपिल सिब्बल की दलीलों से अलग रखा है. पार्टी प्रवक्ता बृजेश कलप्पा ने कहा है कि कपिल सिब्बल ने ये दलीलें एक वकील की हैसियत से दी हैं, कांग्रेस पार्टी के नेता के रूप में नहीं.

-सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड की अपील मानने से इनकार कर दिया. वक्फ बोर्ड, बाबरी एक्शन कमिटी का कहना है कि अगर आज सुनवाई शुरू होगी तो वे इसका बहिष्कार करेंगे. ये चाहते हैं कि इस मामले की सुनवाई पांच जज या सात जजों की बेंच करे.

 -सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से कपिल सिब्बल ने निवेदन किया था कि इस मामले की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनावों तक रोक देना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल का यह निवेदन खरिज कर दिया.

-कपिल सिब्बल का कहना था कि 19,000 पेज के ये दस्तावेज इतने कम समय में कैसे दाखिल हो गए.

-एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से दलील देते हुए कहा कि सारे संबंधित दस्तावेज और कागजात रिकॉर्ड पर हैं.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है

-राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार से रोजाना सुनवाई शुरू हो चुकी है. सुप्रीम कोर्ट 6 साल बाद इस मामले पर सुनवाई कर रहा है. जस्टिस दीपक मिश्रा, अशोक भूषण और अब्दुल नजीर दाखिल करीब 20 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

-मामले में कपिल सिब्बल आल इंडिया सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से दलील पेश कर रहे हैं.

-इस मामले की सुनवाई 3 जजों वाली बेंच कर रही है. ये जज मामले से जुड़े 13 मामलों की सुनवाई कर रहे हैं.

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ पीठ ने साल 2010 में अयोध्या में विवादित क्षेत्र को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था. तीन न्यायाधीशों की पीठ ने आदेश दिया था कि भूमि को तीन पक्षकारों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बांट दिया जाए.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी. साथ विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था.

बातचीत से नहीं निकला हल

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मामले की सुनवाई के दौरान इसे धर्म और आस्था का मामला कहते हुए सभी पक्षकारों को बातचीत के जरिए हल ढूंढने के लिए कहा था. हालांकि, इसका कोई समाधान नहीं निकल पाया.

जस्टिस दीपक मिश्रा, अशोक भूषण और अब्दुल नजीर की तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. वहीं, भाजपा सांसद सुब्रमणयम स्वामी ने मामले को जल्दी सूचीबद्ध करने और सुनवाई शुरू करने का आग्रह किया था. प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर और न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ वाली ने पीठ ने इस पर निर्णय लेने की बात कही थी. अब पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट न मामले पर सुनवाई के लिए याचिका को सूचीबद्ध किया था.

इसके अलावा सुनवाई से पहले शिया वक्फ बोर्ड ने अदालत में अर्जी लगाकर राम जन्मभूमि विवाद में पक्षकार होने का दावा किया है. बोर्ड ने विवादित स्थल पर मालिकाना हक जताते हुए 30 मार्च 1946 के ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें मस्जिद को सुन्नी वक्फ की संपत्ति करार दिया गया था.

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